लेखनी : ’धारा’ के अन्तर्गत ऋचा अग्रवाल का एकल रचना पाठ सम्पन्न
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
गर्मी के मौसम में एसी कूलर सी माँ…., सर्दी की ठिठुरन में गर्म रज़ाई सी माँ….., माँ…. को प्रकृति से जोड़ते हुए अपने रचना संसार का आग़ाज़ करने वाली कहानीकार, उपन्यासकार और कवयित्री ऋचा शरद अग्रवाल ने साहित्य और सांस्कृतिक संस्था लेखनी द्वारा नेहरू पार्क स्थित मदन-सावित्री डागा साहित्य भवन में आयोजित धारा कार्यक्रम के अन्तर्गत एकल रचनाकार के रूप में अपनी चुनिन्दा रचनाओं और कहानियों का पाठ किया।
लेखनी के अध्यक्ष, कवि और रंगकर्मी प्रमोद वैष्णव ने बताया कि साहित्य के क्षेत्र में विस्तृत लेखन करने वाले छुपे हुए रचनाकारों को धारा कार्यक्रम के माध्यम से मंच प्रदान कर एकल रचनापाठ के रूप में साहित्य प्रेमियों के समक्ष प्रस्तुति की पहल की गई है। इसी कड़ी के तीसरे कार्यक्रम की मेहमान कवयित्री ऋचा शरद अग्रवाल ने ’होली के रंगों से सजी, धरती के दामन में, सरसों के फूल खिले पीले-पीले…, बसंत ही बसंत है खिला आज चहुँ ओर…., घर के किसी कोने में खुलकर हंसने की जगह रखना….,’’ सहित मित्रता, प्रकृति, भाव, राजनीति, बाल विवाह आधारित कविताओं का पाठ किया। साथ ही लघु कथा के अन्तर्गत बुज़ुर्गों को बोझ समझने वाले परिवार का चित्रण करती कहानी में छोटी बच्ची के मुख से उभरता संवाद ’दादी तुम ऊपर कब जाओगी..’ तथा माँ का सन्दूक़ सुनाकर भाव विभोर किया।
प्रारम्भ में शहर के जाने-माने कहानीकार हरिप्रकाश राठी ने आमन्त्रित रचनाकार के व्यक्तित्व और लेखन का परिचय दिया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध अफ़सानानिगार और शाइर हबीब कैफ़ी, डाॅ. पद्मजा शर्मा, डाॅ. नीना छिब्बर, चांदकौर जोशी, डाॅ. मनीषा डागा, सत्येन्द्र छिब्बर, डाॅ. रेणुका श्रीवास्तव, बसन्ती पंवार, अशफ़ाक़ फौजदार, अद्वैत बोहरा सहित साहित्य से जुड़े बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मज़ाहिर सुलतान ज़ई ने किया तथा प्रमोद वैष्णव ने आभार व्यक्त किया।










