जोधपुर पुलिस के नए कप्तान से सीधा सवाल: क्या बदलेगी कार्यशैली या जारी रहेगा पुराना रवैया? जोधपुर की जनता प्रतीक्षा कर रही है—सिर्फ आश्वासनों की नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की। आपका कार्यकाल इस शहर के इतिहास में किस रूप में दर्ज होगा, यह आने वाले कुछ महीनों में तय होगा। राइजिंग भास्कर समूह की ओर से हम आपको शुभकामनाएं देते हैं, पर साथ ही यह स्पष्ट भी करते हैं कि जनता के हितों से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। यदि व्यवस्था में सुधार हुआ तो हम खुलकर सराहना करेंगे, और यदि चूक हुई तो सवाल भी उतनी ही मजबूती से उठाएंगे।
सेवा में,
शरत कविराज
पुलिस आयुक्त, जोधपुर
विषय: जोधपुर पुलिस की कार्यशैली में आमूलचूल सुधार, बजरी माफिया पर सख्त कार्रवाई, साइबर क्राइम नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था को लेकर खुला पत्र
महोदय,
जोधपुर की जनता ने आपको एक नई उम्मीद, एक नए संकल्प और एक सख्त लेकिन न्यायपूर्ण नेतृत्व के रूप में देखा है। यह शहर वीरों की धरती है, परंपराओं का गढ़ है और कानून-व्यवस्था के प्रति सजग नागरिकों का नगर है। ऐसे में जब भी पुलिस नेतृत्व बदलता है, तो लोगों के मन में यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या अब व्यवस्था बदलेगी? क्या अब आम आदमी को सम्मान मिलेगा? क्या अब अपराधियों के बजाय ईमानदार नागरिक निर्भय होकर सांस ले पाएंगे?
आपसे पहले जोधपुर पुलिस की कमान ओमप्रकाश के हाथों में थी। उनके कार्यकाल के दौरान पुलिस का आमजन के प्रति व्यवहार कई बार सवालों के घेरे में रहा। यह आरोप केवल राजनीतिक या व्यक्तिगत नहीं हैं, बल्कि सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय रहे हैं। पुलिस की छवि “जनसेवक” से अधिक “सत्ता-प्रदर्शक” की बनती चली गई।
इसी संदर्भ में कुड़ी थाना क्षेत्र के तत्कालीन एसएचओ हमीर सिंह का मामला अत्यंत गंभीर है। एक अधिवक्ता के साथ जिस प्रकार का दुर्व्यवहार सार्वजनिक रूप से सामने आया, वह न केवल पुलिस की गरिमा के विरुद्ध था बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ था। “तेरा खोपड़ा खराब है क्या, तेरे जैसे कई वकील देखे हैं…” जैसी भाषा यदि एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी द्वारा उपयोग की जाती है, तो यह केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि पूरे न्याय तंत्र का अपमान है।
जब एक अधिवक्ता—जो स्वयं न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है—उसके साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम आदमी के साथ पुलिस कैसा व्यवहार करती होगी, यह सहज ही समझा जा सकता है। दुर्भाग्यपूर्ण यह भी है कि कुछ समय पूर्व इसी अधिकारी को बहाल कर दिया गया। इससे जनता के मन में यह संदेश गया कि अनुशासन और जवाबदेही केवल कागजों तक सीमित है।
महोदय, आपसे अपेक्षा है कि आप इस प्रकरण की पुनः निष्पक्ष जांच करवाएं।
-
क्या हमीर सिंह की फाइल दोबारा खोली जाएगी?
-
क्या पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने के लिए स्वतंत्र जांच समिति गठित होगी?
-
क्या भविष्य में किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा अमर्यादित व्यवहार पर “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी?
यदि पुलिस के भीतर जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तो बाहर अपराध पर नियंत्रण की उम्मीद बेमानी होगी।
बजरी माफिया: कानून को खुली चुनौती
जोधपुर और उसके आसपास का क्षेत्र इन दिनों बजरी माफिया के आतंक से त्रस्त है। आधी रात हो या दिनदहाड़े—अवैध बजरी से भरे डंपर और ट्रक सड़कों पर बेलगाम दौड़ते नजर आते हैं। ये न केवल राजस्व की चोरी कर रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों की जान को भी खतरे में डाल रहे हैं।
जोधपुर के आसपास की नदियों को अवैध खनन ने छलनी कर दिया है। पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिगत जलस्तर प्रभावित हुआ है। यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि पर्यावरण के विरुद्ध संगठित अपराध है।
अब तक जितने भी पुलिस आयुक्त आए, वे इस माफिया पर निर्णायक लगाम नहीं लगा सके। प्रश्न यह है:
-
क्या आपके नेतृत्व में बजरी माफिया के खिलाफ विशेष टास्क फोर्स बनाई जाएगी?
-
क्या रात्रिकालीन संयुक्त अभियान चलाए जाएंगे?
-
क्या पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत की जांच होगी?
-
क्या अवैध खनन में लिप्त बड़े चेहरों को भी कानून के दायरे में लाया जाएगा, या केवल छोटे ड्राइवरों पर कार्रवाई होती रहेगी?
यदि कानून का भय समाप्त हो जाए, तो अराजकता स्थापित हो जाती है। आज जोधपुर में यही स्थिति बनती जा रही है।
साइबर क्राइम: अदृश्य अपराध, बढ़ता खतरा
डिजिटल युग में अपराध का स्वरूप बदल चुका है। जोधपुर में साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, बैंकिंग धोखाधड़ी और सोशल मीडिया अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। चिंताजनक तथ्य यह है कि कई पीड़ितों की शिकायत तक दर्ज नहीं की जाती। उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि “ऑनलाइन शिकायत कर दो” या “यह हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं आता।”
महोदय, क्या जोधपुर में एक समर्पित साइबर क्राइम सेल को मजबूत किया जाएगा?
-
क्या प्रत्येक थाने में साइबर प्रशिक्षित अधिकारी नियुक्त होंगे?
-
क्या शिकायत दर्ज न करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
-
क्या आम जनता के लिए साइबर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे?
यदि अपराधी डिजिटल हो चुके हैं, तो पुलिस को भी डिजिटल दक्षता के साथ संवेदनशीलता दिखानी होगी।
बढ़ता बाहरी दबाव और अपराध
जोधपुर में बिहार, उत्तरप्रदेश, नेपाल और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में लोग आकर बस गए हैं। साथ ही पाक विस्थापितों की भी संख्या है। मानवता के नाते उनका सम्मान आवश्यक है, लेकिन साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से उचित सत्यापन और निगरानी भी अनिवार्य है।
शहर में रूटीन अपराध—चोरी, लूट, वाहन चोरी, चेन स्नैचिंग—लगातार बढ़ रहे हैं। क्या इन सबका कोई समेकित डेटा विश्लेषण हुआ है?
-
क्या बाहरी निवासियों का व्यापक वेरिफिकेशन अभियान चलाया जाएगा?
-
क्या किरायेदार सत्यापन को सख्ती से लागू किया जाएगा?
-
क्या रात्रि गश्त को तकनीकी निगरानी (सीसीटीवी, ड्रोन आदि) से जोड़ा जाएगा?
पुलिस और जनता के बीच भरोसे की खाई
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या जोधपुर पुलिस जनता का विश्वास पुनः अर्जित कर पाएगी? पुलिस का भय अपराधियों में होना चाहिए, आम नागरिक में नहीं। यदि थाने में जाने से पहले व्यक्ति को अपमान का डर लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेत है।
आपसे आग्रह है कि:
-
प्रत्येक थाने में “जनसुनवाई दिवस” अनिवार्य किया जाए।
-
दुर्व्यवहार की शिकायत के लिए स्वतंत्र हेल्पलाइन हो।
-
थानों में सीसीटीवी फुटेज की नियमित समीक्षा हो।
-
पुलिसकर्मियों के लिए व्यवहार प्रशिक्षण (Behavioral Training) अनिवार्य हो।
अंत में कुछ सीधे प्रश्न
महोदय,
क्या आप पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाएंगे?
क्या आप बजरी माफिया के खिलाफ निर्णायक युद्ध छेड़ेंगे?
क्या आप साइबर अपराध पर विशेष नीति घोषित करेंगे?
क्या आप यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पुलिस अधिकारी कानून से ऊपर नहीं है?
क्या आप जोधपुर को एक सुरक्षित, संवेदनशील और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था का मॉडल शहर बनाएंगे?
जोधपुर की जनता प्रतीक्षा कर रही है—सिर्फ आश्वासनों की नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की। आपका कार्यकाल इस शहर के इतिहास में किस रूप में दर्ज होगा, यह आने वाले कुछ महीनों में तय होगा।
राइजिंग भास्कर समूह की ओर से हम आपको शुभकामनाएं देते हैं, पर साथ ही यह स्पष्ट भी करते हैं कि जनता के हितों से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। यदि व्यवस्था में सुधार हुआ तो हम खुलकर सराहना करेंगे, और यदि चूक हुई तो सवाल भी उतनी ही मजबूती से उठाएंगे।
आपसे ठोस, त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा है।
सादर,
दिलीप कुमार पुरोहित
ग्रुप एडिटर
राइजिंग भास्कर
जोधपुर
Author: Dilip Purohit
Group Editor









