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Thursday, April 16, 2026, 9:24 am

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जंगलराज !… जोधपुर का भाणेज पुलिस कमिश्नर फेल, छह दिन गायब युवक को भी नहीं ढूढ़ पाई पुलिस, जज ने प्रार्थना पत्र लेने से इनकार किया

राइजिंग भास्कर का पुलिस कमिश्नर को 24 घंटे का अल्टीमेटम, या तो युवक को सही सलामत ढूंढ़कर परिजनों के हवाले करो, या फिर जोधपुर का भानजा होने का भ्रम मत फैलाओ…

राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने लिखा सख्त पत्र, कहा—कानून का राज साबित करना है तो तुरंत कार्रवाई करें

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

शहर में कानून व्यवस्था को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। जोधपुर के निवासी राजेश दाधीच का बेटा राहुल दाधीच पिछले 28 फरवरी से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता है। परिवार का आरोप है कि कुछ हिस्ट्रीशीटर लंबे समय से अवैध वसूली के लिए राहुल को धमका रहे थे और उन्हें आशंका है कि उन्हीं लोगों ने उसके साथ कोई अनहोनी कर दी है या उसका अपहरण कर लिया है।

इस मामले में राहुल की पत्नी नीतू शेखावत ने 1 मार्च को माता का थान पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी, लेकिन छह दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस राहुल दाधीच का कोई सुराग नहीं लगा पाई है। इस बीच पीड़ित परिवार की पीड़ा और चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने जोधपुर के नव नियुक्त पुलिस कमिश्नर शरत कविराज को एक सख्त पत्र लिखकर 24 घंटे के भीतर राहुल दाधीच को तलाशने का अल्टीमेटम दिया है।

पत्र में कहा गया है कि यदि पुलिस वास्तव में जोधपुर में कानून का राज स्थापित करना चाहती है, तो उसे इस मामले में तुरंत और ठोस कार्रवाई करनी होगी।

छह दिन से लापता युवक, पुलिस के हाथ खाली

परिजनों के अनुसार राहुल दाधीच पिछले कुछ समय से कुछ हिस्ट्रीशीटरों द्वारा की जा रही अवैध वसूली और धमकियों से परेशान था। परिवार का कहना है कि उसे लगातार दबाव में रखा जा रहा था। 28 फरवरी को राहुल अचानक लापता हो गया। जब परिवार ने काफी तलाश की और उसका कोई पता नहीं चला तो उसकी पत्नी नीतू शेखावत ने 1 मार्च को माता का थान थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। एफआईआर दर्ज होने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि पुलिस तुरंत कार्रवाई करेगी, संभावित आरोपियों से पूछताछ करेगी और युवक का पता लगाएगी। लेकिन छह दिन बीत जाने के बाद भी न तो पुलिस ने कोई ठोस प्रगति दिखाई और न ही राहुल के बारे में कोई जानकारी सामने आई।

परिवार का कहना है कि हर गुजरते दिन के साथ उनकी चिंता और भय बढ़ता जा रहा है। उन्हें आशंका है कि कहीं राहुल के साथ कोई गंभीर अनहोनी न हो गई हो।

“जोधपुर का भानजा” कहे जाने वाले पुलिस कमिश्नर से सवाल

कुछ समय पहले ही जोधपुर में नए पुलिस कमिश्नर के रूप में शरत कविराज ने पदभार संभाला था। उस समय उन्होंने शहर में कानून का राज कायम करने और अपराध पर सख्ती से अंकुश लगाने का वादा किया था। स्थानीय मीडिया और पत्रकारों ने भी उनका स्वागत करते हुए उन्हें “जोधपुर का भानजा” कहकर संबोधित किया और उम्मीद जताई कि वे शहर में कानून व्यवस्था को मजबूत करेंगे। लेकिन राहुल दाधीच के छह दिन से लापता होने के बावजूद पुलिस की सुस्त कार्यवाही ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब शहर का एक युवक लगातार छह दिन से लापता है और उसके अपहरण की आशंका जताई जा रही है, तो पुलिस की ओर से इतनी धीमी कार्रवाई क्यों हो रही है।

राइजिंग भास्कर को फोन पर छलका पिता का दर्द

राहुल के पिता राजेश दाधीच ने दुखी मन से राइजिंग भास्कर को फोन कर अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि उनका बेटा छह दिन से गायब है और परिवार पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल रहा है।जब राइजिंग भास्कर ने उनसे कहा कि वे पुलिस कमिश्नर से मिलें और अपनी बात रखें, तो उन्होंने बेहद निराश स्वर में कहा कि आज पुलिस होली के उत्सव में व्यस्त है। यह सुनकर राइजिंग भास्कर ने उन्हें सलाह दी कि वे सादे कागज पर एक प्रार्थना पत्र लिखकर अदालत में प्रस्तुत करें ताकि न्यायालय से मदद मिल सके।

न्याय की उम्मीद भी टूटी

लेकिन इस पूरे मामले का सबसे दुखद और चिंताजनक पहलू तब सामने आया जब राजेश दाधीच अदालत पहुंचे। बताया जाता है कि उन्होंने एक जज के सामने अपना प्रार्थना पत्र देने की कोशिश की, लेकिन उस जज ने उनका प्रार्थना पत्र लेने से ही इनकार कर दिया। एक ऐसे समय में जब देश के प्रधानमंत्री बार-बार यह कहते हैं कि भारत में आम आदमी को पोस्टकार्ड पर भी न्याय मिल सकता है, उसी देश में यदि एक पीड़ित पिता का प्रार्थना पत्र तक स्वीकार नहीं किया जाता, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। यह घटना न केवल पीड़ित परिवार के लिए बल्कि पूरे लोकतांत्रिक तंत्र के लिए अत्यंत चिंताजनक है।

“जंगलराज की स्थिति” – दिलीप कुमार पुरोहित

राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने अपने पत्र में लिखा है कि यदि एक युवक छह दिन से लापता है, पुलिस उसे ढूंढने में असफल है और न्यायालय प्रार्थना पत्र तक स्वीकार नहीं कर रहा है, तो यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि यदि यही हाल रहा तो लोगों का कानून और न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा। पत्र में कहा गया है कि जोधपुर में कानून का राज स्थापित करने का दावा करने वाली पुलिस को अब यह साबित करना होगा कि वह आम नागरिक की सुरक्षा के लिए गंभीर है।

पुलिस कमिश्नर को 24 घंटे का अल्टीमेटम

दिलीप कुमार पुरोहित ने अपने पत्र में पुलिस कमिश्नर से कहा है कि:

  • राहुल दाधीच की गुमशुदगी को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए

  • जिन हिस्ट्रीशीटरों पर शक है, उनसे तुरंत पूछताछ की जाए

  • शहर में विशेष टीम बनाकर तलाश अभियान चलाया जाए

  • परिवार को नियमित जानकारी दी जाए

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि 24 घंटे के भीतर राहुल दाधीच की तलाश के लिए ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती, तो यह मामला जनआंदोलन का रूप भी ले सकता है। पत्र में लिखा गया है कि जोधपुर की जनता यह देखना चाहती है कि क्या वास्तव में यहां कानून का राज है या फिर अपराधियों का।

पुलिस और न्याय व्यवस्था पर उठते सवाल

इस घटना ने दो महत्वपूर्ण संस्थाओं—पुलिस और न्यायपालिका—दोनों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला सवाल यह है कि एक युवक छह दिन से लापता है और पुलिस अब तक उसे खोजने में क्यों असफल रही है। दूसरा सवाल यह है कि जब एक पीड़ित व्यक्ति न्यायालय पहुंचता है, तो उसका प्रार्थना पत्र लेने से इनकार क्यों किया जाता है। यदि आम नागरिक को पुलिस और अदालत—दोनों से ही निराशा मिले, तो वह आखिर किसके पास न्याय के लिए जाएगा?

पीड़ित परिवार की मांग

राहुल दाधीच के परिवार ने प्रशासन से निम्न मांगें की हैं—

  1. राहुल को जल्द से जल्द खोजा जाए

  2. जिन लोगों पर शक है, उनसे सख्ती से पूछताछ की जाए

  3. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए

  4. परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए

परिवार का कहना है कि उन्हें केवल अपने बेटे की सुरक्षित वापसी चाहिए।

पत्र

पुलिस कमिश्नर शरत कविराज के नाम

माननीय पुलिस कमिश्नर महोदय,

जोधपुर की जनता ने आपके पदभार संभालते समय आपसे बड़ी उम्मीदें लगाई थीं। आपने भी सार्वजनिक रूप से यह वादा किया था कि शहर में कानून का राज कायम करेंगे और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

लेकिन आज एक बेहद गंभीर मामला सामने है। जोधपुर के निवासी राहुल दाधीच पिछले छह दिनों से लापता हैं। उनके परिवार का आरोप है कि कुछ हिस्ट्रीशीटर उन्हें अवैध वसूली के लिए धमका रहे थे और उन्हीं पर अपहरण की आशंका जताई जा रही है। सबसे दुखद बात यह है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक पुलिस इस युवक का कोई सुराग नहीं लगा पाई है। यदि जोधपुर का एक नागरिक इस तरह गायब हो जाए और पुलिस उसे ढूंढने में असफल रहे, तो यह कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।आपको “जोधपुर का भानजा” कहा जाता है। यदि आप वास्तव में इस शहर को अपना मानते हैं, तो यह समय है कि आप अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

मैं, राइजिंग भास्कर का ग्रुप एडिटर होने के नाते, आपसे मांग करता हूं कि—

  • राहुल दाधीच की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की जाए

  • संदिग्ध हिस्ट्रीशीटरों से तुरंत पूछताछ की जाए

  • मामले की हर स्तर पर निगरानी की जाए

यदि 24 घंटे के भीतर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती, तो यह माना जाएगा कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। जोधपुर की जनता यह देखना चाहती है कि क्या यहां कानून का राज है या नहीं। आशा है कि आप इस मामले को व्यक्तिगत रूप से संज्ञान में लेकर तुरंत कार्रवाई करेंगे।

सादर

दिलीप कुमार पुरोहित
ग्रुप एडिटर
राइजिंग भास्कर

सुप्रीम कोर्ट से अपील: जोधपुर के उस जज पर कार्रवाई हो जिसने परिवाद लेने से मना किया

जोधपुर में सामने आई एक बेहद चिंताजनक घटना ने न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल दाधीच के पिता जब अपने बेटे की तलाश के लिए न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचे और एक प्रार्थना पत्र देने का प्रयास किया, तो बताया जाता है कि एक जज ने उनका प्रार्थना पत्र लेने से ही इनकार कर दिया। यह घटना बेहद गंभीर है। भारत का संविधान हर नागरिक को न्याय पाने का अधिकार देता है। यदि किसी पीड़ित व्यक्ति का आवेदन तक स्वीकार नहीं किया जाता, तो यह न्याय व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है। इसलिए भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से यह विनम्र आग्रह किया जाता है कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित जज के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। न्यायपालिका देश की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। आम नागरिक की अंतिम उम्मीद भी अदालत ही होती है। यदि वही दरवाजा बंद हो जाए तो लोकतंत्र की आत्मा पर चोट पहुंचती है। इसीलिए यह आवश्यक है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी पीड़ित व्यक्ति को न्याय पाने से रोका न जाए।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor