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Thursday, April 16, 2026, 12:41 pm

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जन औषधि दिवस आज : सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं ने आम आदमी के स्वास्थ्य को बनाया बेहतर

इस समय देश में 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से लाखों लोग प्रतिदिन सस्ती दवाएं खरीद रहे हैं। जन औषधि योजना ने अब तक नागरिकों को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की बचत कराई है। इन केंद्रों पर लगभग 2,110 प्रकार की गुणवत्ता युक्त दवाएं तथा 315 से अधिक मेडिकल उपकरण और उपभोग की वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली

9783414079 diliprakhai@gmail.com

भारत में आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई जन औषधि योजना आज स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण क्रांति का रूप ले चुकी है। इसी क्रम में 7 मार्च को देशभर में जन औषधि दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर केंद्र सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आम नागरिकों को जन औषधि योजना के लाभों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
इस अभियान का उद्देश्य यह है कि हर व्यक्ति को कम कीमत पर बेहतर और प्रमाणित दवाएं उपलब्ध हो सकें, ताकि इलाज का खर्च कम हो और गरीब से गरीब व्यक्ति भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सके।

क्या है जन औषधि योजना

केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत देशभर में जन औषधि केंद्र खोले गए हैं, जहां लोगों को सामान्य बाजार में मिलने वाली महंगी ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 50 से 80 प्रतिशत तक कम कीमत पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। सरकार का मानना है कि इलाज का सबसे बड़ा खर्च दवाओं पर होता है। इसलिए यदि दवाएं सस्ती मिलें तो आम नागरिकों का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो सकता है। इसी सोच के साथ यह योजना शुरू की गई और धीरे-धीरे इसका दायरा पूरे देश में फैल गया।

देशभर में तेजी से बढ़ रहे जन औषधि केंद्र

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस समय देश में 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से लाखों लोग प्रतिदिन सस्ती दवाएं खरीद रहे हैं। जन औषधि योजना ने अब तक नागरिकों को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की बचत कराई है। इन केंद्रों पर लगभग 2,110 प्रकार की गुणवत्ता युक्त दवाएं तथा 315 से अधिक मेडिकल उपकरण और उपभोग की वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे मरीजों को एक ही स्थान पर इलाज से जुड़ी कई जरूरी चीजें सस्ती दरों पर मिल जाती हैं।

गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं

जन औषधि योजना के तहत मिलने वाली सभी दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। इन दवाओं का निर्माण विश्व स्वास्थ्य संगठन के विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित WHO-GMP मानकों के अनुसार किया जाता है। साथ ही इन दवाओं की गुणवत्ता की जांच राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) से प्रमाणित प्रयोगशालाओं में की जाती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाएं सुरक्षित और प्रभावी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं के बराबर ही प्रभावी होती हैं, क्योंकि इनमें वही सक्रिय तत्व होते हैं जो महंगी दवाओं में पाए जाते हैं।

महिलाओं के लिए भी विशेष सुविधा

जन औषधि योजना के तहत महिलाओं के स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इस योजना के अंतर्गत महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जन औषधि केंद्रों पर सैनिटरी पैड मात्र एक रुपये प्रति पैड की कीमत पर उपलब्ध हैं। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को सस्ती और सुरक्षित स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराना है, जिससे वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बच सकें।

डिजिटल सुविधा भी उपलब्ध

जन औषधि योजना को डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है। नागरिक अपने मोबाइल फोन में Jan Aushadhi Sugam मोबाइल ऐप डाउनलोड करके अपने आसपास के जन औषधि केंद्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से यह भी पता लगाया जा सकता है कि कौन-सी दवा किस केंद्र पर उपलब्ध है और उसकी कीमत क्या है। इसके अलावा योजना से जुड़ी जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800-180-8080 भी जारी किया गया है।

प्रधानमंत्री का संदेश

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जन औषधि दिवस सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत हर नागरिक को उच्च गुणवत्ता वाली और सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना देश को स्वस्थ और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाएं हर नागरिक का अधिकार हैं और सरकार का प्रयास है कि किसी भी व्यक्ति को सिर्फ दवाओं की महंगी कीमत के कारण इलाज से वंचित न रहना पड़े।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव

विशेषज्ञों के अनुसार जन औषधि योजना ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने का काम किया है। पहले जहां लोगों को महंगी दवाओं के कारण आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता था, वहीं अब वे कम कीमत पर इलाज करा पा रहे हैं।
विशेष रूप से मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग के मरीजों के लिए यह योजना काफी लाभकारी साबित हो रही है। कई मरीजों ने बताया कि पहले उन्हें हर महीने दवाओं पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब जन औषधि केंद्र से वही दवाएं बहुत कम कीमत में मिल जाती हैं।

रोजगार के अवसर भी बढ़े

जन औषधि योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसके माध्यम से युवाओं और फार्मासिस्टों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। सरकार जन औषधि केंद्र खोलने के लिए प्रोत्साहन भी देती है, जिससे कई लोग अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर रहे हैं।
इससे न केवल लोगों को रोजगार मिल रहा है बल्कि समाज को सस्ती दवाएं भी उपलब्ध हो रही हैं।

जागरूकता बढ़ाने के प्रयास

जन औषधि दिवस के अवसर पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता रैलियां, दवा वितरण कार्यक्रम और सेमिनार शामिल हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि जन औषधि केंद्रों से मिलने वाली दवाएं सस्ती होने के साथ-साथ पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी भी हैं।

सकारात्मक बदलाव का प्रतीक

कुल मिलाकर जन औषधि योजना देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव का उदाहरण बन चुकी है। सस्ती और गुणवत्ता वाली दवाओं की उपलब्धता से लाखों लोगों को राहत मिली है और इलाज का खर्च भी काफी कम हुआ है। जन औषधि दिवस के अवसर पर यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि अधिक से अधिक लोग जन औषधि केंद्रों से दवाएं खरीदेंगे तो न केवल उनकी जेब पर बोझ कम होगा बल्कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाया जा सकेगा। सरकार की यह पहल आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र में और बड़े परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे भारत एक स्वस्थ और मजबूत राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ सकेगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor