देवेंद्र सोमानी ने पत्नी की स्मृति में बनाया ट्रस्ट बना बेटियों की उम्मीद जगाई : 10 छात्राओं को मिली निःशुल्क शिक्षा, पहले ही बैच में 7 ने पास कर रचा इतिहास
दिलीप कुमार पुरोहित. उदयपुर
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समाज में अक्सर यह कहा जाता है कि किसी महान कार्य के पीछे गहरी संवेदना और एक बड़ा उद्देश्य छिपा होता है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की स्मृति को समाज सेवा का रूप देते हुए बेटियों की शिक्षा के लिए ट्रस्ट की स्थापना की। इस ट्रस्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को न केवल शिक्षा का अवसर दिया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत आधार भी प्रदान किया।
यह कहानी है रेखा सोमानी फाउंडेशन की, जिसने बहुत कम समय में समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल पेश की है। इस फाउंडेशन के माध्यम से जरूरतमंद बेटियों को हॉस्टल सुविधा के साथ पढ़ाई कराई जा रही है। विशेष बात यह है कि पहले ही बैच में पढ़ रही छात्राओं ने शानदार परिणाम देकर यह साबित कर दिया कि यदि अवसर मिले तो बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहतीं।
पत्नी की स्मृति में शुरू हुई सेवा की पहल
सीए और वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट देवेंद्र सोमानी ने अपनी पत्नी रेखा सोमानी की स्मृति में इस फाउंडेशन की स्थापना की। रेखा सोमानी का कैंसर के कारण निधन हो गया था। पत्नी के जाने के बाद देवेंद्र सोमानी ने उनके सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
उन्होंने महसूस किया कि समाज में अनेक ऐसी बेटियाँ हैं जो प्रतिभाशाली होने के बावजूद आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पातीं। इसी विचार से प्रेरित होकर उन्होंने रेखा सोमानी फाउंडेशन की शुरुआत की, जिसका मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद और प्रतिभाशाली बेटियों को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर देना है।
अप्रैल 2025 में शुरू हुआ ट्रस्ट
फाउंडेशन की शुरुआत अप्रैल 2025 में की गई। शुरुआती चरण में देशभर से चयनित 10 जरूरतमंद बेटियों को इस योजना में शामिल किया गया। इन छात्राओं को पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा के साथ-साथ हॉस्टल सुविधा, मार्गदर्शन और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए। फाउंडेशन का लक्ष्य सिर्फ पढ़ाई करवाना ही नहीं बल्कि छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसके लिए उन्हें नियमित मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी गतिविधियाँ भी करवाई जाती हैं।
पहले बैच का शानदार परिणाम
फाउंडेशन के पहले ही बैच ने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित कर दिया। दस छात्राओं में से सात छात्राओं ने परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। इनमें से कई छात्राओं ने अच्छे अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
परिणामों के अनुसार छात्राओं के अंक इस प्रकार रहे:
ज्योति शर्मा — 304 अंक (76%)
चहक चंडक — 298 अंक (74.5%)
सोनू कुमारी — 257 अंक (64.25%)
दिया लखवानी — 236 अंक (59%)
सलोनी शर्मा — 237 अंक (59.25%)
रिदम चंडक — 244 अंक (61.%)
सृष्टि अरोड़ा — 276 अंक (69%)
इन परिणामों से यह साबित हुआ कि यदि छात्राओं को उचित वातावरण और संसाधन मिलें तो वे बड़ी से बड़ी चुनौती को पार कर सकती हैं।
हॉस्टल सुविधा के साथ शिक्षा
रेखा सोमानी फाउंडेशन की एक विशेषता यह है कि यहाँ छात्राओं को हॉस्टल सुविधा भी दी जाती है। कई बार ग्रामीण या दूरदराज क्षेत्रों की बेटियाँ पढ़ाई इसलिए छोड़ देती हैं क्योंकि शहरों में रहने की व्यवस्था नहीं होती। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए फाउंडेशन ने हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध करवाई। इससे छात्राएँ बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे पा रही हैं।
प्रतिभाशाली बेटियों के लिए अवसर
फाउंडेशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस योजना में उन्हीं छात्राओं का चयन किया जाता है जो आर्थिक रूप से कमजोर हों और पढ़ाई में प्रतिभाशाली हों। चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जाती है ताकि सही छात्राओं को लाभ मिल सके। फाउंडेशन के अनुसार जिन छात्राओं ने 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, वे आवेदन कर सकती हैं। चयन के बाद उन्हें पूरी तरह नि:शुल्क शिक्षा, हॉस्टल और मार्गदर्शन दिया जाता है।
समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण
आज के समय में जब समाज में कई लोग निजी लाभ और व्यावसायिक सोच में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में रेखा सोमानी फाउंडेशन जैसी पहल समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है। देवेंद्र सोमानी का मानना है कि यदि समाज के सक्षम लोग आगे आएं और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करें तो देश की तस्वीर बदल सकती है। खासकर बेटियों की शिक्षा पर ध्यान देने से समाज में सकारात्मक परिवर्तन तेजी से आएगा।
शिक्षा से बदलती जिंदगी
फाउंडेशन से जुड़ी छात्राओं का कहना है कि उन्हें इस संस्था से जीवन में आगे बढ़ने की नई उम्मीद मिली है। कई छात्राएँ ऐसे परिवारों से आती हैं जहाँ उच्च शिक्षा का सपना देखना भी मुश्किल था। फाउंडेशन के सहयोग से अब वे अपने करियर के सपने पूरे करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर
भारत में पिछले कुछ वर्षों में बेटियों की शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक कारणों से बेटियाँ पढ़ाई से वंचित रह जाती हैं। ऐसे में रेखा सोमानी फाउंडेशन जैसी संस्थाएँ उन बेटियों के लिए उम्मीद की किरण बन रही हैं, जो पढ़ना चाहती हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह जाती हैं।








