वायदे, घोषणाएं और इंतजार… लेकिन जमीन पर नतीजा शून्य; राइजिंग भास्कर ने उठाई आवाज, सरकार से सात दिन में मांगा सिलसिलेवार स्पष्ट जवाब
दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर एलपी पंत ने दो दिन पहले सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर बेरोजगारों से समस्याएं पूछी थीं और उसे मंच देने का वादा किया था, मगर अखबार में सरकार के खिलाफ एक शब्द नहीं छापा और अब सरकार का पीआरओ बनकर गोलमोल जवाब दे रहे हैं।
बेरोजगारों के मुद्दों को हम यहां सिलसिलेवार प्रकाशित कर रहे हैं और भजनलाल सरकार से मांग करते हैं कि बेरोजगारों की समस्याओं का बाकायदा लिखित में जवाब दें।
दिलीप कुमार पुरोहित. जयपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
राजस्थान में बेरोजगारी अब केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक उबलता हुआ सामाजिक सवाल बन चुकी है। हजारों युवा वर्षों से भर्तियों, परिणामों और नियुक्तियों का इंतजार करते-करते निराशा की कगार पर पहुंच चुके हैं। हाल ही में दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर श्री एलपी पंत द्वारा सोशल मीडिया पर बेरोजगारों से उनके मुद्दे मांगे गए थे, लेकिन दो दिन बीतने के बाद भी जब कोई ठोस पहल या खबर सामने नहीं आई, तो युवाओं का धैर्य जवाब देने लगा। इधर दैनिक भास्कर ने बेरोजगारों की समस्याओं पर अखबार में कोई खबर छापने की बजाय नेशनल एडिटर पंत सरकार का पीआरओ बनकर सरकारी भाषा में स्पष्टीकरण देते नजर आए। मगर इससे बेरोजगार युवा संतुष्ट नहीं है और उन्होंने आर-पार की लड़ाई लड़ने का निर्णय कर लिया है। अब राइजिंग भास्कर ने इन मुद्दों को मंच देते हुए सीधे सरकार से सवाल किया है—आखिर बेरोजगारों की आवाज कब सुनी जाएगी? राइजिंग भास्कर ने भजनलाल सरकार को सात दिन का समय दिया है और कहा है कि इन सात दिनों में बेरोजगारों के सवालों का सिलसिलेवार लिखित में जवाब दे अन्यथा बेरोजगारों को राइजिंग भास्कर ने सलाह दी है कि अपना संगठन बनाकर लोकतंत्र में सत्ता के अहंकार को चूर-चूर कर दे और अपने न्याय के लिए शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करें।
वादों से आगे क्यों नहीं बढ़ रही सरकार?
राजस्थान में सरकार बदलने के साथ उम्मीदें भी बदली थीं। युवाओं को भरोसा था कि नई सरकार रोजगार के मोर्चे पर ठोस कदम उठाएगी। लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि घोषणाएं और धरातल के बीच की दूरी लगातार बढ़ती जा रही है। राइजिंग भास्कर ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि भजनलाल शर्मा की सरकार सात दिन में इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं देती, तो बेरोजगारों को संगठित होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना चाहिए।
धरनों में सिमटी उम्मीदें
राज्य के कई हिस्सों में युवा लंबे समय से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
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नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2023 के अभ्यर्थी पिछले 70 दिनों से जयपुर में धरने पर बैठे हैं।
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चयन सूची में नाम आने के बाद भी अंतिम सूची से बाहर कर दिए गए उम्मीदवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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चिकित्सा मंत्री के आश्वासन भी अब भरोसे में नहीं बदल पाए हैं।
यह स्थिति बताती है कि केवल घोषणाएं अब युवाओं को संतुष्ट नहीं कर सकतीं।
33 साल से कला शिक्षकों की अनदेखी
शिक्षा व्यवस्था की हालत भी बेरोजगारी की कहानी कहती है। सरकारी स्कूलों में 1992 से आज तक कला शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई।
जबकि बोर्ड परीक्षाओं में कला विषय की ग्रेडिंग होती है, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं। यह विरोधाभास न केवल शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि हजारों प्रशिक्षित कलाकारों के भविष्य को भी अंधकार में डालता है।
भर्तियां: फॉर्म भरे, फीस दी… लेकिन परीक्षा कब?
राजस्थान हाईकोर्ट की चतुर्थ श्रेणी भर्ती इसका बड़ा उदाहरण है।
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2019 में आवेदन मांगे गए
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लाखों युवाओं ने फीस जमा की
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वर्षों तक परीक्षा नहीं हुई
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2025 में फिर से नई भर्ती निकाल दी गई
युवाओं का सवाल सीधा है—क्या भर्ती प्रक्रिया केवल फीस वसूलने का जरिया बन गई है?
कोर्ट-कचहरी में उलझा भविष्य
बहुदिव्यांग अभ्यर्थियों का मामला हो या पुलिस उप निरीक्षक भर्ती 2021—कई भर्तियां कोर्ट में अटकी हुई हैं।
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बहुदिव्यांग अभ्यर्थी 2021 से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं
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एसआई भर्ती का फैसला महीनों से लंबित है
इस देरी ने युवाओं के करियर को ठहराव में डाल दिया है।
ठेका प्रथा और कम वेतन का जाल
सरकार ने बजट में ठेका प्रथा खत्म करने का वादा किया, लेकिन अब तक केवल कागजों में ही सीमित है।
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नरेगा में तकनीकी सहायकों को मात्र 16,900 रुपए
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योग प्रशिक्षकों को 5,000 से 8,000 रुपए
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13 महीने से वेतन बकाया
युवाओं का कहना है कि यह रोजगार नहीं, बल्कि शोषण है।
बेरोजगारों के प्रमुख सवाल
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भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध क्यों नहीं?
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चयन के बाद नियुक्ति में देरी क्यों?
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कोर्ट में अटकी भर्तियों का समाधान कब?
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ठेका प्रथा खत्म करने का वादा कब पूरा होगा?
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कम वेतन और बकाया भुगतान कब मिलेगा?
शिक्षा और स्वास्थ्य में सबसे ज्यादा संकट
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एनटीटी भर्ती 2018 अब तक अधूरी
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लाइब्रेरियन ग्रेड-3 का रिजल्ट लंबित
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कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर इंटरव्यू अटके
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फार्मासिस्ट भर्ती 2023 अधूरी
यह स्थिति बताती है कि सबसे जरूरी क्षेत्रों—शिक्षा और स्वास्थ्य—में ही भर्ती प्रक्रिया ठप है।
युवाओं की प्रमुख मांगें
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सभी लंबित भर्तियों को तुरंत पूरा किया जाए
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पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती कैलेंडर जारी हो
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ठेका प्रथा खत्म कर स्थाई नौकरी दी जाए
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फर्जी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो
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वेतन और मानदेय में वृद्धि की जाए
फर्जी नियुक्तियों पर भी सवाल
युवाओं ने आरोप लगाया है कि हजारों फर्जी लोग सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही। यदि यह सच है, तो यह न केवल व्यवस्था की विफलता है, बल्कि योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय भी है।
राजनीति बनाम हकीकत
चुनावों के दौरान रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा होता है, लेकिन सत्ता में आने के बाद यही मुद्दा पीछे छूट जाता है। युवाओं का आरोप है कि—“नेता मंच से वादे करते हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता।”
चेतावनी—अब आंदोलन ही विकल्प?
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7 दिन में जवाब नहीं तो आंदोलन
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बेरोजगारों को संगठन बनाने की अपील
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लोकतांत्रिक तरीके से विरोध की तैयारी
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“अब चुप नहीं बैठेंगे” का संदेश
राइजिंग भास्कर का सीधा सवाल
राइजिंग भास्कर ने सरकार से सीधा सवाल किया है—
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क्या बेरोजगारों की आवाज केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहेगी?
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क्या सरकार इन मुद्दों पर ठोस जवाब देगी?
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क्या युवाओं को रोजगार का अधिकार मिलेगा?
अब निर्णायक समय
राजस्थान का युवा अब इंतजार के मूड में नहीं है। वह जवाब चाहता है, समाधान चाहता है और सम्मानजनक रोजगार चाहता है। यदि सरकार ने समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया, तो यह असंतोष एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है, और जब उसकी आवाज अनसुनी होती है, तो वही आवाज आंदोलन बन जाती है। अब देखना यह है कि सरकार सात दिन में जवाब देती है या फिर बेरोजगार अपने हक के लिए सड़कों पर उतरते हैं।
Author: Dilip Purohit
Group Editor









