कविता : नाचीज बीकानेरी
अलवदा अलवदा हुवा माहे रमजान ।
चांद के दीदार की खुशी ले ईद आई।।
मिल्लत को बेशुमार सौगात देने को ।
रोज़े नमाज की फजीलत ले ईद लाई।।
गुनाहों से तौबा यादे इलाही सारी रात ।
खैर – ओ बरकत की सौगात ईद लाई।।
ज़कात फ़ितरा अदा कर सुकून मिला ।
अमन चैन की दुआएं लेकर ईद आई ।।
इबादत -सेहरी-इफ्तार की रौनक रही ।
इंसानियत का पैगाम लेकर ईद आई ।।
गिले शिकवे बुग्ज किना मिटाने वाली ।
“नाचीज़” भाईचारे का पैगाम ईद लाई।।
नाचीज़ बीकानेरी मो 9680868028








