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Sunday, April 19, 2026, 4:51 am

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विश्व कविता दिवस पर विशेष- आज की कविता : कल के आशावाद के साथ-दिलीप कुमार पुरोहित

आज की कविता : कल के आशावाद के साथ

आज लगता है

अब जिंदगी ने साथ छोड़ने की ठान ली है

पर ऐसा

पहले भी कई बार लगा था

पर वो जो नारायण है

वो हर बार थाम लेता था बाहें

आज लगता है

दुनिया मुझे सुला देना चाहती है चैन की नींद

और चाहती है मैं चैन से मर जाऊं और

मेरे परिवार को मिल जाए

बीमा की बड़ी राशि

दुनिया चाहती है

मुझ पर एहसान करना

मेरे मरने का जश्न मना कर

मेरे परिवार की मदद कर

पर क्या मेरी मौत इतनी आसानी से होगी?

जब नारायण किसी को बड़े उद्देश्य के लिए

भेजता है

तब उसकी मौत

भी पहले लिख देता है

इसलिए हे नारायण

मैं नहीं जानता कल की बातें

क्योंकि मैं भविष्यद्रष्टा नहीं

पर मैं यह जानता हूं

तुम जिसके साथ हो

उसे दुनिया की कोई ताकत मार नहीं सकती

मैं नहीं चाहता

कोई साहूकार मेरा बीमा कर

पॉलिसी भरे

और फिर साजिशन मेरी मौत (हत्या)

हो जाए

मैं जानता हूं नारायण

होने को मेरे साथ कुछ भी हो सकता है

पर मैं यह भी जानता नारायण

तुम बहुत ताकतवर हो

तुमने अर्जुन को रणभूमि में

अजेय बना दिया था

तुमने पांडवों को महाभारत जितवा दी थी

आज दुनिया की महाभारत में

मैं अकेला हूं

पर इतना जानता हूं नारायण

तुम्हारे रहते मैं अकेला कैसे हो सकता हूं

साजिशों का दौर गंभीर है

दायां हाथ बायें हाथ का छल सकता है

जहां साफ सरोवर का भ्रम है

वह दलदल निकल सकता है

एक विश्वास के साथ

मैं इस रण में डटा हूं

कि नारायण मेरे सारथी हैं

और जिसके नारायण सारथी हो

वो ही दुनिया का महारथी है

हे नारायण तुम्हें बारबंबार नमस्कार।

मैं अपना कल, आज और कल

आपको समर्पित करता हूं

जब कुछ समझ ना आए तो

इतना समझ लो

कोई तुम्हें समझ रहा है

कोई तुम पर नजर रख रहा है

कोई तुम्हें अकेला नहीं छोड़ेगा

और यह कोई और नहीं साक्षात नारायण है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor