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Wednesday, April 15, 2026, 10:39 pm

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तुमने किया ही क्या है? : हरसहाय ‘हर्ष’ मीणा

तुमने किया ही क्या है?

लेखक: हरसहाय ‘हर्ष’ मीणा

आज अट्ठारह वर्षीय युवराज पश्चाताप की आग में जल रहा था, आत्मग्लानि की गलन में गल रहा था, अफसोस के आंसुओं में नहा जा रहा था, शर्म के सागर में बहा जा रहा था और खुद को धिक्कारते हुए कहा जा रहा था, की शर्म आ रही है उसे अपने आप पर,वो इतना नालायक बेटा कैसे हो सकता है?
दरअसल आज युवराज ने अपनी मां की काफी पुरानी एल्बम देख ली थी, जिसमें उसने अपनी मां की ममता, प्यार, दुलार, त्याग, समर्पण सब देखा था। उस एलबम में युवी ने कुछ फोटो देखे, वो फोटो यूवी के जन्म से लेकर चार-पांच साल तक की उम्र के थे। कैसे उसकी मां उससे नहला रही है कैसे प्यार से सहला रही है,कैसे उसके लाड लडा रही है, उसको सू-सू और सोच करा रही है, कैसे अपने हाथों से उसकी मल-मूत्र साफ कर रही है, अंगुली पकड़ कर चलना सीखा रही है। वह तो युवी की मां को फोटोग्राफी का शौक था, जिससे युवराज आज अपने बचपन और मां के दुलार को देख पाया था, लेकिन युवी को फोटो देखने से अफसोस नहीं हो रहा था बल्कि युवी को अफसोस व पश्चाताप हो रहा था उसकी नालायकी और नादानी पर, उसकी बदतमीजी और बदजुबानी पर, आज ही सुबह उसने ना कुछ बात पर अपनी मां से गुस्से में बोला था कि “तुमने किया ही क्या है मेरे लिए?, जन्म देकर कौनसा बड़ा काम कर दिया, जन्म तो सब देते है बच्चों को, बड़ा तो मैं अपने आप ही हो गया हूं। बस यही बदजुबानी उसे वह एल्बम देखने के बाद पश्चात्ताप की आग में जला रही थी, तभी उसे एक बात और याद आ गई थी, उसे याद आया कि कुछ दिन पहले बुआ घर पर आई हुई थी तब पापा से कह रही थी, “अपना युवी जब छोटा सा था तब बहुत बीमार हुआ था, तीन दिन तक दूध भी नहीं पिया था युवी ने, तब लक्ष्मी भाभी ने भी तीन दिन तक एक निवाला तक नहीं खाया था। एक पल के लिए बच्चे को अकेला नहीं छोड़ा था। खाना-पीना, नहाना-धोना, सब भूल गई थी”। इस बात को याद करके तो युवराज अंदर-अंदर रो ही पड़ा था। अब वह यही सोच रहा था कि वह मां के सामने जाए कैसे? और किन शब्दों में माफी मांगे। खुद को धिक्कार रहा था वो। उसको खुद को उसके वह बोल कचोट रहे थे, कि उसने मां से कैसे बोल दिया कि उसने किया ही क्या है उसके लिए।”

यूवी ने खुद को संभालते हुए अपने आंसू पूछे और हिम्मत करके मां की तरफ धीरे-धीरे बढ़ गया। युवी को कुछ कहने की हिम्मत तो नहीं हुई पर अपनी मां से ऐसे लिपटकर रोने लगा जैसे छोटा बच्चा रोता है, “मां मुझ पागल को माफ कर दो।” मां को समझने में समय नहीं लगा और बेटे को सहलाते हुए बोली “अरे बावले बच्चे, मां हूं मैं तेरी, मां कभी बच्चों से नाराज होती है क्या?

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor