जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पेंशनर्स ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, रोजमर्रा के खर्च और इलाज पर पड़ा असर
राइजिंग भास्कर. जोधपुर
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जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पेंशनर्स इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। पेंशनर्स द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए एक पत्र में बताया गया है कि दिसंबर 2025 से अब तक उन्हें पेंशन का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनकी स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है।
यह पत्र राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को संबोधित करते हुए भेजा गया है, जिसमें पेंशनर्स की समस्याओं को विस्तार से रखा गया है। पत्र में कहा गया है कि लगातार पत्राचार और ज्ञापनों के माध्यम से सरकार और जनप्रतिनिधियों को इस गंभीर मुद्दे से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
एक पेंशनर्स का कहना है कि इस मुद्दे को विधानसभा के बजट सत्र में भी कुछ जनप्रतिनिधियों ने उठाया था, इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे पेंशनर्स में सरकार के प्रति नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि अधिकांश पेंशनर्स की आयु 80 वर्ष से अधिक है। इस उम्र में वे पूरी तरह पेंशन पर निर्भर हैं। पेंशन बंद होने से उनके सामने रोजमर्रा के खर्च, दवाइयों और इलाज की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। कई विधवाएं भी पारिवारिक पेंशन पर आश्रित हैं, जिनके लिए यह स्थिति और भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई पेंशनर्स उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं। नियमित पेंशन नहीं मिलने के कारण वे आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं भी नहीं ले पा रहे हैं। एक पेंशनर ने तो अपनी व्यक्तिगत स्थिति बताते हुए लिखा है कि वह स्वयं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहा है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण इलाज प्रभावित हो रहा है।
पेंशनर्स ने सरकार से मांग की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द बकाया पेंशन का भुगतान किया जाए। उन्होंने यह भी अपील की है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए स्थायी समाधान निकाला जाए। इस पूरे मामले ने राज्य में पेंशन व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो यह मुद्दा और अधिक गंभीर रूप ले सकता है। फिलहाल, पेंशनर्स की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं और उन्हें उम्मीद है कि उनकी परेशानी का जल्द समाधान होगा।
Author: Dilip Purohit
Group Editor








