मिट्टी की प्रतिमाओं के लिए अलग व्यवस्था, पीओपी की मूर्तियां नांदड़ी में होंगी रिसाइकिल; निगम की बैठक में लिया गया फैसला
राइजिंग भास्कर. जोधपुर
अनंत चतुर्दशी पर इस बार शहर के प्रमुख जलाशयों में गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं किया जाएगा। नगर निगम ने जलस्रोतों के संरक्षण और प्रदूषण रोकने के उद्देश्य से विसर्जन की वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। बुधवार को आयुक्त की अध्यक्षता में सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और गणेश उत्सव समितियों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव और सुझावों पर चर्चा की गई। अंतिम निर्णय के लिए गुरुवार को पुनः समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में तय किया गया कि गुलाब सागर के पाईप क्षेत्र में एक अस्थायी कृत्रिम कुंड (पोंड) बनाया जाएगा, जिसमें मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा सकेगा। छोटी प्रतिमाओं के लिए भी अलग व्यवस्था रखने की योजना है। वहीं प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी प्रतिमाओं को जलाशयों में विसर्जित करने के बजाय नांदड़ी गोशाला क्षेत्र में रिसाइक्लिंग के लिए भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि शहर के प्रमुख जलाशयों में जलस्तर कम है और जलस्रोतों के संरक्षण के लिए उनमें प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं किया जाना चाहिए। गुलाब सागर को भी हाल में सफाई के लिए खाली किया गया था और वहां पानी की मात्रा काफी कम है। इसके अलावा कायलाना, पदमसागर और गुड़ा तालाब में विसर्जन पर न्यायालय की रोक भी लागू है।
पूजा के बाद कृत्रिम कुंड में विसर्जन
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार जो लोग अष्टधातु अथवा अन्य धातुओं की प्रतिमाएं लेकर आएंगे, वे पूजा के बाद गुलाब सागर के पास बनाए जाने वाले पोंड में स्नान कराकर प्रतिमाओं को वापस ले जा सकेंगे। इससे प्रतिमाओं को जलाशयों में डालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
विसर्जन को लेकर दो पक्षों में हुई बहस
बैठक में गणपति विसर्जन को लेकर दोनों पक्षों के बीच चर्चा और बहस भी हुई। एक पक्ष का कहना था कि गुलाब सागर पर प्रतिमाओं के विसर्जन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन लोगों को प्रतिमाओं को जलूस के रूप में वहां तक लाने की छूट दी जाए, ताकि चतुर्दशी का पारंपरिक आयोजन प्रभावित न हो। दूसरे पक्ष ने इस व्यवस्था का विरोध किया।
नगर निगम आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने और ऐसी व्यवस्था बनाने की अपील की, जिससे धार्मिक आयोजन की परंपरा भी बनी रहे और जलाशयों को प्रदूषण से बचाया जा सके।
आज फिर होगी समीक्षा बैठक
नगर निगम प्रशासन के अनुसार बुधवार की बैठक में मुख्य रूप से प्रस्ताव और सुझावों पर चर्चा हुई। अंतिम निर्णय के लिए गुरुवार को फिर बैठक होगी। इसमें सभी पक्षों की सहमति से गणपति विसर्जन की अंतिम व्यवस्था तय किए जाने की संभावना है। निगम का उद्देश्य जलस्रोतों को सुरक्षित रखने के साथ गणेश उत्सव समितियों और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक विसर्जन व्यवस्था उपलब्ध कराना है।