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Sunday, November 1, 2026, 2:47 pm

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जहरीली हल्दी-मिर्च पाउडर का कारोबार! आटे में मिला कपड़े रंगने वाला केमिकल

खाद्य पदार्थों में मिले प्रतिबंधित रसायन

पाली/सुमेरपुर। बाजार से खरीदा जाने वाला हल्दी, लाल मिर्च और आटा वास्तव में शुद्ध है या उसमें मिलावट की गई है? यह सवाल आम लोगों की सेहत से जुड़ा है। राजस्थान के पाली जिले के सुमेरपुर में मसाला फैक्ट्रियों से लिए गए नमूनों की जांच को लेकर सामने आई रिपोर्ट में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। एक पड़ताल के अनुसार, रिपोर्टर ने खरीदार बनकर मसाला इकाइयों से नमूने जुटाए और उन्हें सरकारी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा। रिपोर्ट में नमूनों के भीतर ऐसे रसायनों की मौजूदगी का दावा किया गया है, जो खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं।

एक महीने की पड़ताल में सामने आई मिलावट

रिपोर्ट के मुताबिक, सुमेरपुर की मसाला फैक्ट्रियों में करीब एक महीने तक पड़ताल की गई। इस दौरान दो प्रमुख इकाइयों से थोक खरीदार बनकर संपर्क किया गया। आरोप है कि इन इकाइयों से मिर्च, हल्दी और धनिया पाउडर की आपूर्ति के लिए बातचीत हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि नमूने राजस्थान सरकार की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला, उदयपुर भेजे गए। वहां जांच के बाद कुछ नमूनों में खाद्य पदार्थों के लिए असुरक्षित माने जाने वाले रासायनिक रंगों की मौजूदगी सामने आने का दावा किया गया।

हालांकि, जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति, प्रत्येक नमूने का पूरा विवरण और संबंधित इकाइयों का पक्ष सामने आने के बाद ही सभी निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि हो सकेगी।

लाल मिर्च पाउडर में सूडान-2 और मेटानिल येलो का आरोप

रिपोर्ट में लाल मिर्च पाउडर के नमूने में सूडान-2 और मेटानिल येलो जैसे रासायनिक रंग पाए जाने का उल्लेख है। ये औद्योगिक रंग खाद्य पदार्थों में मिलाने के लिए अनुमत नहीं हैं।

सूडान श्रेणी के रंगों का इस्तेमाल औद्योगिक उत्पादों को रंगने में किया जाता है। वहीं, मेटानिल येलो भी ऐसा रंग है, जिसका खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा करता है। खाद्य पदार्थों में प्रतिबंधित रंग मिलाकर उन्हें अधिक चमकीला दिखाना उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है।

लाल मिर्च का प्राकृतिक रंग उसकी गुणवत्ता और किस्म के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए केवल चमकीले रंग के आधार पर मिलावट का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है।

हल्दी पाउडर में आटा और रासायनिक रंग

रिपोर्ट में हल्दी पाउडर के एक नमूने में चावल का आटा और मेटानिल येलो जैसे रासायनिक रंग मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, नमूने में स्टार्च यानी आटे की मात्रा 80.73 प्रतिशत बताई गई, जबकि संबंधित मानक के तहत इसकी स्वीकार्य सीमा का उल्लेख 60 प्रतिशत किया गया है।

यदि जांच के निष्कर्ष प्रमाणित होते हैं, तो यह मिलावट की गंभीर स्थिति होगी। हल्दी पाउडर में बड़ी मात्रा में दूसरे पदार्थ मिलाकर बेचना न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि खाद्य सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन भी हो सकता है।

हालांकि, 80.73 प्रतिशत की मात्रा किस परीक्षण पद्धति और किस विशिष्ट मानक के आधार पर निर्धारित की गई, इसकी पुष्टि मूल प्रयोगशाला रिपोर्ट से करना आवश्यक है।

गेहूं-चावल की भूसी से लेकर खराब स्टार्च तक की आशंका

रिपोर्ट में मसालों और खाद्य पदार्थों में गेहूं-चावल की भूसी, खराब स्टार्च तथा औद्योगिक रंगों के इस्तेमाल से जुड़ी आशंकाएं भी सामने रखी गई हैं। यदि खाद्य पदार्थों में सस्ते पदार्थ मिलाकर उन्हें असली उत्पाद के रूप में बेचा जाता है, तो उपभोक्ता को कीमत के अनुरूप गुणवत्ता नहीं मिलती।

ऐसी मिलावट की पहचान सामान्य आंखों से करना कठिन हो सकता है। खासकर पिसे हुए मसालों में अलग-अलग पदार्थ आसानी से मिलाए जा सकते हैं। इसलिए केवल पैकेट की चमक, रंग या खुशबू देखकर उसकी शुद्धता का निर्णय करना उचित नहीं है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी बढ़ी

इस मामले ने खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। मसाला निर्माण इकाइयों, थोक कारोबारियों और खुदरा विक्रेताओं की नियमित जांच होनी चाहिए। जिन नमूनों में प्रतिबंधित रसायन या अन्य मिलावट की पुष्टि होती है, उनके संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित कारोबारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिले और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर उचित कानूनी कदम उठाए जाएं।

उपभोक्ता कैसे रहें सतर्क?

खाद्य पदार्थ खरीदते समय पैकेट पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, निर्माण एवं समाप्ति तिथि और एफएसएसएआई लाइसेंस संबंधी जानकारी देखें। खुले मसाले खरीदते समय विश्वसनीय विक्रेता को प्राथमिकता दें। असामान्य रंग या गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी से शिकायत की जा सकती है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor