जितना हो सके स्वदेशी अपनाओ : आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता देश, संस्कृति और अर्थव्यवस्था दोनों की जरूरत
विदेशी चमक के दौर में फिर लौट रही स्वदेशी की चेतना, गांधी-विवेकानंद से लेकर आधुनिक अर्थशास्त्री तक बता रहे स्वदेशी का महत्व आधुनिक दौर में जब विदेशी कंपनियों और वैश्विक बाजारों का प्रभाव तेजी से बढ़ा, तब कुछ व्यक्तित्वों और संगठनों ने स्वदेशी विचारधारा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। इनमें प्रमुख रूप से बाबा … Read more