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अश्विनी वैष्णव : जोधपुर से सफर शुरू, देश को दे रहे रफ्तार

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जोधपुर निवासी और देश के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपना सफर बेशक जोधपुर से शुरू किया हो मगर अपनी काबिलियत, मेहनत, लगन, ऊर्जा, दूरदृष्टि, प्रशासनिक और राजनीतिक क्षमताओं से देश को रफ्तार दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में रेलवे विकास के डग भर रहा है। आने वाला समय निश्चित रूप से अश्विनी वैष्णव का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैष्णव पर भरोसा कर न केवल जोधपुर का मान बढ़ाया है, वरन आने वाले समय में अश्विनी वैष्णव राजस्थान की राजनीति को नई दिशा देंगे।

डीके पुरोहित. नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम के विश्वस्त और ऊर्जावान सदस्य रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम ही उनकी पहचान है। उन्होंने अपनी मेहनत, लगन, प्रशासनिक और राजनीतिक दूरदृष्टि और प्रतिभा से जोधपुर से सफर शुरू कर देश के रेल मंत्री जैसा ओहदा प्राप्त कर रेलवे को नई रफ्तार दी है। आज देश को पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं है। वंदे भारत जहां ट्रैक पर कमाल दिखा रही है, वहीं वर्ष 2023-24 के लिए पश्चिमी मध्य रेलवे को रिकॉर्ड 8874.70 करोड़ का बजट आवंटन कर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। इस साल प्रदेश को 4646.70 करोड़ से अधिक रेल बजट मिला। और तो और अकेले जोधपुर में रेलवे स्टेशन को महानगर की तर्ज पर बनाने का सपना दिखाकर 500 करोड़ का बजट दिया है। इसके टेंडर हो गए हैं और काम भी शुरू हो गया है। इसके मूल स्वरूप को बचाए रखते हुए आने वाले दो-तीन साल में जोधपुर का रेलवे स्टेशन महानगर ही नहीं यूरोप की तरह चमकने लगेगा। और यह सब संभव हुआ है केवल और केवल रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की सोच से।

अश्विनी वैष्णव पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं, जो 8 जुलाई 2021 से भारत के रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। 28 जून 2019 से वे राज्यसभा, ऊपरी सदन में ओडिशा राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाली भारत की संसद के सदस्य हैं। वह केंद्रीय मंत्री बने और उन्हें 07 जुलाई 2021 को रेल मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री का पद दिया गया। वह मूल रूप से राजस्थान के पाली जिले में रानी के जीवनंद कलां गांव के रहने वाले हैं। बाद में उनका परिवार जोधपुर में बस गया।

अश्विनी वैष्णव का जन्म 1970 में जोधपुर में एक बैरागी (वैष्णव ब्राह्मण) परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम दाऊलाल वैष्णव, माता का नाम श्रीमती सरस्वती वैष्णव और पत्नी का नाम श्रीमती सुनीता वैष्णव है। उन्होंने 1991 में एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज (अब विवि) जोधपुर से इलेक्ट्रॉनिक और संचार इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में स्वर्ण पदक के साथ स्नातक किया और फिर आईआईटी कानपुर से एम.टेक पूरा किया। 1994 में आईएएस की अखिल भारतीय रैंक 27 थी। 2008 में वे पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल से एमबीए करने के लिए अमेरिका चले गए। अश्विनी वैष्णव ने बालासोर और कटक जिलों में कलेक्टर के रूप में कार्य किया। उन्होंने 2003 तक ओडिशा में काम किया। जब उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यालय में उप सचिव के रूप में नियुक्त किया गया। पीएमओ में अपने संक्षिप्त कार्यकाल के बाद जहां उन्होंने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सार्वजनिक-निजी-भागीदारी ढांचे को बनाने में योगदान दिया, उनको वाजपेयी के निजी सचिव के रूप में नियुक्त किया गया, वे 2004 में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए से चुनाव हार गए। 2006 में, वे मोरमुगाओ पोर्ट ट्रस्ट के उपाध्यक्ष बने, जहां उन्होंने अगले दो वर्षों तक काम किया। उन्होंने व्हार्टन बिजनेस स्कूल में एमबीए पूरा करने के लिए शैक्षिक ऋण लिया। उन्होंने महसूस किया कि शैक्षणिक ऋण चुकाने में उन्हें वर्षों लगेंगे और अंततः उन्होंने निजी क्षेत्र में शामिल होने के लिए 2010 में सिविल सेवा छोड़ दी। एमबीए पूरा करने के बाद अश्विनी वैष्णव भारत वापस आ गए और प्रबंध निदेशक के रूप में जीई ट्रांसपोर्टेशन में शामिल हो गए। फिर वे सीमेंस में वाइस प्रेसिडेंट लोकोमोटिव्स एंड हेड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैटेजी के रूप में शामिल हुए। 2012 में उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र को छोड़ दिया और गुजरात में थ्री टी ऑटो लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड और वीजी ऑटो कंपोनेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, दोनों ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की स्थापना की।

राजनीतिक सफर और रेल मंत्री की कमान

अश्विनी वैष्णव वर्तमान भारतीय संसद के सदस्य हैं। जो राज्यसभा में ओडिशा राजय का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने ओडिशा में बीजू जनता दल के सदस्यों की मदद से निर्विरोध राज्यसभा चुनाव जीता। अश्विनी वैष्णव को अधीनस्थ विधान और याचिका समिति और विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और वन समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था। वैष्णव ने संसद में तर्क दिया है कि वर्तमान आर्थिक मंदी प्रकृति में चक्रीय है और यह संरचनात्मक मंदी नहीं है और मार्च तक इसके निचले स्तर पर पहुंचने की संभावना है और इसके बाद ठोस विकास होगा। उनका दृढ़ विश्वास है कि देश के निर्माण का तरीका धन को उपभोग में लगाने के बजाय निवेश में लगाना है। अश्विनी वैष्णव ने 5 दिसंबर 2019 को राज्यसभा में कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2019 का भी समर्थन किया है। उनका मानना है कि कर ढांचे को कम करने या युक्तिसंगत बनाने के कदम से भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और भारतीय उद्योग का पूंजी आधार भी विकसित होगा। आगे का समर्थन करते हुए तर्क दिया कि कर संरचना के विशेष युक्तिकरण से कॉर्पोरेट्स को बनाए रखा आय और भंडार और अधिशेष में वृद्धि करने में मदद मिलेगी जो अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक विकास की नींव रखेगी। इनके अलावा उन्होंने राज्यसभा में जहाज पुनर्चक्रण विधेयक से लेकर महिला संरक्षण तक के मुद्दों पर भी बात की है ताकि उन मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा को आगे बढ़ाया जा सके। जुलाई 2021 में, जब दूसरे मोदी मंत्रालय में कैबिनेट में फेरबदल हुआ तो वह रेल मंत्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और संचार मंत्री बने।

इस साल पश्चिम मध्य रेलवे को मिला 8874.70 करोड़ का बजट

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यकाल में इस वर्ष पश्चिम मध्य रेलवे को रिकॉर्ड 8874.70 करोड़ का बजट मिला। जिसमें प्रदेश को 4646.70 करोड़ से अधिक का रेल बजट मिला। वैष्णव के मुताबिक इस बजट आवंटन से राज्य में रेल की विभिन्न परियोजनाओं, संरचनात्मक कार्यों के साथ-साथ रेलवे के आधुनिकीकरण को गति मिलेगी। रेलवे ने ये कार्य योजना बनाई है कि अब हर साल 4500 किलोमीटर नई रेल लाइन, आमान परिवर्तन व दोहरीकरण का कार्य किया जाएगा। इसे बढ़ाकर 7000 किलोमीटर हर साल किया जाएगा। रेलवे लाइनों के दोनों ओर बसे गांवों व शहरों को जोड़ने के लिए इस साल 1000 फ्लाईओवर, फुट ओवर ब्रिज और सब-वे का निर्माण किया जाएगा। इन्हें इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा ताकि इनमें बारिश के दिनों में पानी नहीं भरें। इसके अतिरिक्त फ्लाईओवर के साथ फुट ओवर ब्रिज का निर्माण भी किया जाएगा। इससे आमजन को लम्बा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। देशभर में 1275 स्टेशनों को विकसित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। 48 स्टेशनों पर पुनर्विकास का कार्य शुरू हो गया है। इन स्टेशनों का डिजाइन विरासत और विकास को ध्यान में रखकर किया जाएगा। स्टेशनों पर दिन-प्रतिदिन की जरूरतों की वस्तुओं को ध्यान में रखते हुए 2000 स्टेशनों पर जन सुविधा केन्द्र खोले जाएंगे।

टिकट और समस्याओं के निवारण के लिए सिस्टम किया जाएगा अपग्रेड

टिकट और पूछताछ सम्बंधी समस्याओं के निवारण के लिए सिस्टम अपग्रेड किया जाएगा। इसके तहत वर्तमान में 25,000 टिकट प्रति मिनट की क्षमता को 10 गुना बढ़ाकर 2,25,000 और 4,00,000 लाख प्रति मिनट इन्क्वायरी की क्षमता को 40,00,000 लाख प्रति मिनट किया जाएगा। इसके साथ ही अश्विनी वैष्णव ने एक स्टेशन-एक उत्पाद और कम दूरी के लिये वन्दे मेट्रो ट्रेनों, हाइड्रोजन ट्रेन की योजना बनाई है।

रेलवे की भावी विकास योजनाओं पर एक नजर

1- नई लाइनों का निर्माण – रुपए 2014 करोड़।
2- दोहरीकरण/तिहरीकरण – रुपए 1521.30 करोड़।
3- ट्रैफिक फेसीलिटिस – रुपए 114.71 करोड़।
4- रोड सेफ्टी वर्क (लेवल क्राॅसिंग) – रुपए 18.74 करोड़।
5- रोड सेफ्टी वर्क (आरयूबी/आरओबी) – रुपए 574.03 करोड़।
6- ट्रैक रिन्यूवल – रुपए 1090 करोड़।
7- ब्रिज वर्क/टनल वर्क – रुपए 100 करोड़।
8- सिगनल एंड टेलीकम्युनिकेशन – रुपए 207.10 करोड़।
9- इलेक्ट्रिकल वर्क – रुपए 106.07 करोड़
10- कस्टमर एमेनिटिस- रुपए 250.10 करोड़।
11- अन्य योजनाओं के अंतर्गत- रुपए 2878.25 करोड़।

राजस्थान के आधा दर्जन रेलवे स्टेशन की सूरत बदलेगी, यूरोप की झलक दिखेगी

पिछले दिनों राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रोजगार मेले के तहत अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। तब रेलमंत्री अश्विनी ने जयपुर में आयोजित किए गए विभिन्न कार्यक्रमों में भी शिरकत की और जयपुर के गांधीनगर रेलवे स्टेशन के रि-डेवलपमेंट का भी निरीक्षण किया था। इस मौके पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि राजस्थान के लगभग आधा दर्जन रेलवे स्टेशन की सूरत बदलने वाली है अब राजस्थान के रेलवे स्टेशन यूरोप के किसी भी रेलवे स्टेशन से कम नजर नहीं आएंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर मनाए जाने वाले अमृत महोत्सव के मौके पर देश में 75 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए, जिसे रोजगार मेले का नाम दिया गया है। इस मौके पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेलवे में पूरी तरह परिवर्तन ला रहे हैं। इससे पहले किसी भी स्टेशन पर जाने में मुंह और नाक को बंद करना पड़ता था, लेकिन अब सभी रेलवे स्टेशन पर साफ सफाई मिल रही है। रेल मंत्री ने कहा कि आने वाले 50 साल को ध्यान में रखते हुए रेल और रेलवे स्टेशन की कार्य योजना बनाकर उन्हें तैयार किया जा रहा है। देश में केंद्र के सभी मंत्रालयों की तरफ से 75 हजार नियुक्ति पत्र सौपें जा रहे हैं। आने वाले कुछ महीनो में लगभग 10 लाख युवाओं को रोजगार से जोड़कर नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। रेल मंत्री के अनुसार इस साल लगभग 57 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही इस साल के लिए 7565 करोड़ रुपए का आवंटन भी कर दिया है।

जोधपुर रेलवे स्टेशन का होगा कायाकलप, 500 करोड़ होंगे खर्च, टैंडर हुए

उत्तर-पश्चिम रेलवे के जोधपुर रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड क्लास स्टेशन के रूप में विकसित करने की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसके तहत जहां एक ओर बेंगलुरु की कंस्ट्रक्शन कंपनी को इसका टेंडर आवंटित कर दिया गया है वहीं दूसरी ओर स्टेशन की मौजूदा बिल्डिंग में चल रहे कार्यालयों को अन्यत्र शिफ्ट करने की कवायद भी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के अनुरूप देश के विभिन्न स्टेशनों का पुनर्विकास करवाया जा रहा है, जिसमें जोधपुर भी शामिल है। जोधपुर रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में तो शुमार है ही लेकिन साथ ही रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के गृह नगर में भी आता है। इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाओं की उपलब्धता के लिए सदैव विभिन्न प्रयास किए गए, लेकिन अब लगभग पांच सौ करोड़ रुपए की लागत से इसकी कायाकलप की जाएगी और आने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट सरीखी पांच सितारा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। जोधपुर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास पूर्व निर्धारित योजना और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के दिशा-निर्देशानुसार होगा तथा रेल भूमि विकास प्राधिकरण ने इस दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए इसका टेंडर भी आवंटित कर दिया है। जोधपुर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का टेंडर बेंगलुरू की मैसर्स ओजेएससी यूरो एशियन कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन एवर स्कोन (जेवी) विशाल इनफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दिया गया है जो तीन वर्षों में इस कार्य को पूरा करेगी। इंजीनियरिंग खरीद और निर्माण (ईपीसी) मोड पर जोधपुर रेलवे स्टेशन के लिए प्रारंभिक बजट चार सौ चौहत्तर करोड़ बावन लाख रुपए निर्धारित है तथा चार से पांच चरणों में पूर्ण व्यवस्थित तरीके से पुनर्विकास का कार्य होगा। टेंडर प्रक्रिया की औपचारिकताएं पूर्ण होते ही स्टेशन की तस्वीर बदलने का काम प्रारंभ हो जाएगा। हालांकि रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का कार्य चार से पांच चरणों में पूरा होगा, लेकिन इसके तहत मुख्य प्लेटफार्म पर चल रहे विभिन्न कार्यालयों और टिकट बुकिंग विंडो को अस्थाई तौर पर अन्य जगहों पर स्थानांतरित किया जाएगा। इस संबंध में पिछले दिनों स्टेशन इंप्रूवमेंट ग्रुप (एसआईजी) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें जानकारी दी गई कि स्टेशन पुनर्विकास कार्यक्रम को देखते हुए इसके पहले चरण के लिए आरपीएफ, बुकिंग विंडो, पूछताछ, उद्घोषणा कक्ष, क्लर्क रूम, अपर क्लास वेटिंग रूम, स्लीपर वेटिंग रूम, भूतल पर यात्री प्रतीक्षालय इत्यादि को अन्यत्र शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए रेलवे स्टेशन पर ही कम प्रयोग में आने वाले कार्यालयों जिनको पुनर्विकास के दूसरे चरण में हटाया जाएगा, में स्थानांतरित किया जाएगा। जिसके तहत बुकिंग विंडो, करंट रिजर्वेशन काउंटर, पूछताछ इत्यादि महत्वपूर्ण कार्यालय वीआईपी गेट के पास स्थित कार्यालयों में व्यवस्थित तरीके से शिफ्ट करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। रेल भूमि विकास प्राधिकरण की ओर से प्राप्त निर्देशों की अनुपालना में प्रमुख स्टेशनरी कार्यालयों को शिफ्ट किया जा रहा है। इसकी विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है। इधर यात्री सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए जोधपुर मंडल के उपनगरीय भगत की कोठी रेलवे स्टेशन लिफ्ट और एस्केलेटर स्थापित करने का कार्य लगभग पूरा करवा लिया गया है। भगत की कोठी रेलवे स्टेशन पर रेलवे द्वारा यात्री सुविधाओं के विस्तार के तहत लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपए के आधुनिक विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। भगत की कोठी पर दिव्यांग, बुजुर्ग व अन्य यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तीन लिफ्ट और चार एस्केलेटर स्थापित किए गए हैं, जिसमें एस्केलेटर्स की स्थापना का कार्य अंतिम चरण में है। इनमें से यात्रियों के लिए तीन लिफ्ट स्थापित कर शुरू कर दी गई हैं जबकि चार एस्केलेटर में से द्वितीय प्रवेश द्वार पर दो एस्केलेटर स्थापित किए जा चुके हैं, अब मुख्य प्लेटफॉर्म नंबर एक पर दो एस्केलेटर लगाने का कार्य अंतिम चरण में है जिसे जल्द से जल्द पूरा करवा कर यात्रियों के लिए आंरभ कर दिया जाएगा। स्टेशन के द्वितीय प्रवेश द्वार, प्लेटफॉर्म संख्या दो व तीन तथा मुख्य प्लेटफॉर्म पर लगवाई गई लिफ्ट सेवाएं आंरभ की जा चुकी हैं। इनके साथ-साथ भगत की कोठी रेलवे स्टेशन पर अन्य अत्याधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर भी रेलवे संकल्पबद्ध है जिस पर चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।

अब खाटूश्यामजी को सीधे रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा

रेलवे द्वारा रींगस के समीप स्थित विश्व प्रसिद्ध धार्मिक आस्था के केंद्र खाटूश्यामजी को सीधे रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए मंजूरी प्रदान की गई है। खाटूश्यामजी के दर्शन हेतु प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु विभिन्न माध्यमों जैसे रेल, रोड तथा पैदल मार्ग से दर्शन के लिए आते हैं। रेल से आने वाले श्रद्धालु रींगस तक रेल से आते हैं उसके पश्चात वह विभिन्न साधनों से खाटू तक पहुंचते हैं। रींगस से खाटू तक का सफर सुगम व सुरक्षित बनाने के लिए रेलवे ने सांस्कृतिक धरोहर व धार्मिक आस्था के केंद्रों को जोड़ने की योजना के तहत रींगस से खाटूश्यामजी तक नई रेल लाइन के सर्वे को मंजूरी प्रदान की है। रींगस से खाटूश्यामजी तक 16 किलोमीटर नई रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) के लिए डीपीआर की तैयारी हेतु 40 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। सर्वे का काम शीघ्र ही पूरा करके इस नई रेल लाइन के काम को स्वीकृति प्रदान कर कार्य प्रारंभ किया जाएगा जिससे श्रद्धालुओं को जल्द से जल्द खाटूश्यामजी तक रेल सुविधा प्राप्त हो सके। रेल, संचार इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रींगस से खाटूश्यामजी नई रेल लाइन की घोषणा करते हुए कहा कि खाटूश्याम जी आस्था का प्रमुख केंद्र है और प्रतिवर्ष यहां पर 50 से 60 लाख श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं। रेलवे द्वारा सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक आस्था के केंद्रों की कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिसमें कुछ समय पूर्व अंबाजी के लिए नई लाइन का कार्य प्रारंभ किया गया है तथा अब खाटूश्याम जी के लिए नई लाइन के सर्वे को मंजूरी दी गई है। रेलवे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी के मिशन विरासत और विकास के तहत धार्मिक स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।

वंदे भारत ट्रैनों से बढ़ेगी देश भर में कनेक्टिविटी

फाइल फोटो

पिछले दिनों दिल्ली-जयपुर के बीच शुरू हुई वंदेभारत ट्रेन के साथ ही अब देश में वंदे भारत युग शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 अप्रैल को वीडियों कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से (अजमेर-दिल्ली कैंट वंदे भारत एक्सप्रेस) की उद्घाटन स्पेशल रेलसेवा को जयपुर से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। जयपुर में आयोजित शुभारम्भ समारोह में राज्यपाल राजस्थान कलराज मिश्र, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे। 6 महीने में छठीं वंदे भारत ट्रेन को प्रधानमंत्री ने हरी झंडी दिखाई। आधुनिक तकनीक से बनी वंदे भारत ट्रेन में अब तक 60 लाख लोग सफर कर चुके है। वंदे भारत की 1 ट्रिप की यात्रा से 2500 घंटे समय की बचत हो रही है जिसका उपयोग वे दूसरे कामों में कर रहें हैं। वंदे भारत ट्रेन तमाम खूबियों से सम्पन्न है। वंदे भारत ट्रेन देश का गौरव गान है। तेज रफ्तार इसकी विशेषता है और यह पहली सेमी हाई स्पीड ‘मेक इन इंडिया’ ट्रेन है, पहली स्वदेशी सुरक्षित कवच प्रणाली के अनुकूल है। यह ट्रेन इंडिया फर्स्ट आलवेज फर्स्ट एवं विकास, आधुनिकता व स्थिरता का प्रतीक है। नई संभावनाओं और अवसरों की धरती राजस्थान में टूरिज्म को बढ़ाने के लिये कनेक्टिीविटी की अहम भूमिका है और रेल मंत्री वैष्णव ने कनेक्टिीविटी बढ़ाने पर बहुत काम किया है। तारंगा हिल-अंबाजी-आबूरोड नई लाइन के काम को प्रारम्भ किया है जो इस क्षेत्र की 100 वर्षों की पुरानी मंाग थी। इसके साथ ही उदयपुर-अहमदाबाद मार्ग को ब्रॉडगेज कर मेवाड का गुजरात और देश के अन्य राज्यों से सम्पर्क स्थापित किया है। राजस्थान में रेलवे लाइनों के विद्युतीकरण के बारे में बताते हुए कहा कि वर्ष 2014 तक यहां पर नाममात्र का विद्युतीकरण था और अश्विनी वैष्णव के मंत्री बनने के बाद युद्ध स्तर पर लाइनों का विद्युतीकरण किया गया है और अब 75 प्रतिशत क्षेत्र में विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया गया। राजस्थान में रेल कार्यों को गति प्रदान करने के लिये अभी तक का सर्वाधिक निवेश किया जा रहा है। वर्ष 2009-2014 में राजस्थान राज्य का औसत रेलवे बजट आवंटन 682 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष था, जो वर्ष 2023-24 के बजट में करीब 14 गुना बढ़ कर 9532 करोड़ रुपए हो गया है। बजट के पर्याप्त आंवटन से राजस्थान राज्य में रेलवे का विकास तेज गति से हो रहा है। आज स्टेशनों का कायाकल्प किया किया जा रहा है। स्टेशनों का ‘अमृत भारत स्टेशन’ योजना के तहत पुनर्विकास किया जा रहा है। पर्यटन की सुविधा प्रदान करने के लिये भारत गौरव सर्किट ट्रेने चलाई जा रही है। इन भारत गौरव सर्किट ट्रेनों के 70 ट्रिप में 15 हजार से अधिक पर्यटकों ने यात्रा की है और ये ट्रेन अयोध्या, काशी व दक्षिण राज्यों में संचालित की गई है। इन ट्रेनों की फीडबैक में बहुत सराहना मिल रही है। आज भारतीय रेल ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सतत् रूप से प्रदर्शित कर रही है। स्थानीय उत्पादों को देशभर में पहुंचाने के लिए ´एक स्टेशन-एक उत्पाद योजना के तहत राजस्थान में 70 स्टॉल खोली गई है जिनमें जयपुरी रजाईयां, सांगानेरी पिंरट की चद्दरे, गुलाब से बने उत्पाद, हस्त निर्मित उत्पाद की स्टॉल शामिल है। इसके माध्यम से छोटे किसानों, व्यापारियों, हस्तषिल्पियों और कारीगरों को रोजगार मिल रहा है। इसके साथ ही राजस्थान के आदिवासी और जनजातीय क्षेत्रों जैसे उदयपुर, डूंगरपुर, चित्तौडगढ, पाली और सिरोही जिलों में रेल सुविधा उपलब्ध करवाई , जिससे इन क्षेत्रों में आर्थिक, सामाजिक और रोजगार जनित गतिविधियों में तेजी आई है। रेल का इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो तो देश विकास की ओर अग्रसर होता है। राजस्थान में विकास को गति देने में रेलवे का अहम योगदान है। जयपुर में आयोजित समारोह में रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि आज राजस्थान में लगभग 57 हजार करोड़ रूपए के विकास के अनेक कार्य किये जा रहें है जिसमें राजस्थान के 83 स्टेशनों का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकास किया जा रहा है।

 

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


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