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Sunday, October 25, 2026, 6:53 pm

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Lifestyle

प्राणायाम से बढ़ती है प्राण शक्ति, आयु बढ़ाने का यह अचूक आयाम

लेखक : शिव सिंह 

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शरीर को निश्चित अवधि के लिए आत्मा के रहने योग्य बनाये रखने की क्षमता हेतु जिस तत्व की प्रधान भूमिका होती है, उसे प्राण कहते हैं तथा उसकी ऊर्जा को प्राण ऊर्जा कहते हैं। प्राण के आधार पर ही मानव प्राणी कहलाता है। प्राण सूक्ष्म शरीर और स्थूल शरीर के बीच का संबंध सूत्र होता है, जो स्थूल शरीर को सूक्ष्म शरीर से जोड़ता है। प्राण ऊर्जा पंच महाभूतों (पृथ्वी, पानी, हवा, अग्नि, आकाश) के साथ मिलकर उन्हें उपयोगी बनाती है।

प्राणायाम का शाब्दिक अर्थ होता है – प्राण का आयाम। आयाम का तात्पर्य वृद्धि करना। प्रत्येक योनि में इसे निश्चित श्वासों के आने-जाने के अनुपात में बहुत कम होता है। यदि उन श्वासों को जल्दी-जल्दी अधिक पूर्ण ढंग से ग्रहण कर दिया जाये तो हम जल्दी ही मृत्यु को प्राप्त कर लेंगे और यदि उन्हीं श्वासों का आयाम न किया जाये, पूर्ण श्वास-प्रश्वास लिया और निकाला जाये तो उन सीमित श्वासों को लेने में हमें अधिक समय लगेगा अर्थात् हमारी आयु अर्थात् अन्य दूसरे शब्दों में कहें तो प्राणों की वृद्धि हो जायेगी ।

प्राणायाम को प्रभावी बनाने वाले बंध

ज्ञानेन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों के अतियोग अथवा दुरुपयोग से शारीरिक ऊर्जा का अपव्यय होता है। अतः आसन, प्राणायाम के साथ कुछ बंधों के प्रयोग से योगाभ्यास किया जाये तो उसका प्रभाव बहुत अधिक बढ़ जाता है। बंध का अर्थ होता है- “बांधना”, रोकना या कसना अथवा बंद करना। इसमें शरीर के निश्चित अंगों को बड़ी सतर्कता के साथ संकुचित किया जाता है।

प्राणायाम के लाभ

* फेफड़े मज़बूत होते हैं।
* रक्त के विकार दूर होते हैं।
* शरीर का संतुलित और सुडौल विकास होता है।
* मन में उत्साह एवं मानसिक बल भी बढ़ता है।
* ध्यान में चित्त लगता है।
* प्राणायाम से दीर्घ आयु प्राप्त होती है, स्मरण शक्ति बढ़ती है।
* स्फूर्ति आती है, आलस्य नहीं आता।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor