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Sunday, August 23, 2026, 7:06 am

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33 वर्षों बाद नियुक्ति तिथि में संशोधन करवाना अनुचित

पशु पालन विश्वविद्यालय का मामला

राइजिंग भास्कर. जोधपुर
राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्डपीठ के न्यायाधीश डाॅ. पुष्पेन्द्रसिंह भाटी व संदीप शाह ने तैतीस वर्षों के बड़े अंतराल के बाद जन्मतिथि में संशोधन कराने के प्रार्थना पत्र को अस्वीकार करने के एकल पीठ के निर्णय को यथावत रखते हुए अपीलार्थी द्वारा प्रस्तुत अपील को खारिज किया।
सनद रहे लच्छीराम नामक कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 1988 में उसके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज के आधार पर राजस्थान पशुपालन विश्वविद्यालय से सम्बद्ध वल्लभनगर, उदयपुर में की गयी थी। उसके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में उसकी जन्मतिथि 18.05.1964 थी। वर्ष 2013 में उसे वाहन चालक के पद पर पदोन्नति प्रदान की गयी थी। यह पदोन्नति भी उसकी जन्मतिथि 18.05.1964 के आधार पर दी गई एवं समय समय पर जारी वरिष्ठता सूची में भी उसकी जन्मतिथि 18.05.1964 ही अंकित की गयी। वर्ष 2021 में उसके द्वारा एक प्रार्थना पत्र विश्वविद्यालय के समक्ष इस बाबत् प्रस्तुत किया गया कि उसकी जन्मतिथि 18.05.1964 न होकर 18.05.1969 है। इसके समर्थन में उसने एक डुप्लीकेट स्थानांतरण प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय द्वारा उसे डुप्लीकेट स्थानांतरण प्रमाण पत्र को अवैध मानते हुए उसे 31.05.2024 से सेवानिवृत करने का आदेश दिनांक 04.11.2023 को पारित किया।
लच्छीराम द्वारा विश्वविद्यालय द्वारा जारी सेवानिवृत आदेश को एकल पीठ के समक्ष चुनौती दी। एकल पीठ द्वारा उसकी रिट याचिका को खारिज किया गया। एकल पीठ के आदेश को अपीलार्थी द्वारा खण्ड पीठ के समक्ष चुनौती दी गयी। विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा, नीता छंगाणी ने पैरवी करते हुए यह तर्क दिया कि प्रथमतया उसके द्वारा जन्मतिथि में संशोधन उसकी नियुक्ति के 33 वर्षों के बाद किये जाने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है जो देरी के आधार पर ही खारिज किया जाने योग्य है।
दूसरा उसके आधार कार्ड, पहचान पत्र, वोटर आई.डी., लाईसेंस वगैरह के उसकी जन्मतिथि 18.05.1964 ही है। साथ ही विभाग द्वारा समय-समय पर उसकी वरिष्ठता सूची जारी की गयी एवं उसे पदोन्नति प्रदान की गयी तब उसने कोई आपति जाहिर नहीं की गयी। अचनाक 33 वर्षों बाद अपनी जन्मतिथि के संशोधन डुप्लीकेट स्थानांतरण प्रमाण पत्र जारी करवाये जाने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना अनुचित एवं विधि विरूद्ध है। उसको नियुक्ति उसके द्वारा प्रस्तुत किये गये मूल दस्तावेज व स्थानांतरण प्रमाण पत्र के आधार पर ही दी गयी। उनमें उसकी जन्मतिथि 18.05.1964 ही है। प्रार्थी के अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा व नीता छंगाणी के तर्कों से सहमत होते हुए खण्डपीठ ने एकल पीठ द्वारा पारित आदेश में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करते हुए एकलपीठ के आदेश को यथावत रखा व 33 वर्षों के असाधारण देरी के आधार पर अपीलार्थी द्वारा प्रस्तुत अपील को खारिज किया।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor