जोधपुर की शिक्षिका दीपा टाक का अद्भुत टैलेंट, जो किसी भी विषय पर तुरंत रच देती हैं कविता
मंच पर मिला विषय… और कुछ ही सेकंड में बह निकली कविता की धारा
आशुकविता की ऐसी विलक्षण प्रतिभा कि लोग बोले— “इनके दिमाग में जरूर एआई की चिप लगी है”
दिलीप कुमार पुरोहित | जोधपुर

मो. 9783414079 | diliprakhai@gmail.com
कहते हैं कि प्रतिभा कभी छुपती नहीं। वह एक न एक दिन दुनिया के सामने अपना प्रकाश फैला ही देती है। कुछ ऐसा ही हुआ जोधपुर की शिक्षिका श्रीमती दीपा टाक के साथ। पेशे से एक साधारण शिक्षिका, लेकिन प्रतिभा ऐसी कि लोग उन्हें “चलता-फिरता गूगल” और “इंसानी एआई” तक कहने लगे हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्हें कोई भी विषय दे दीजिए, वे बिना एक पल गंवाए उसी समय कविता रच देती हैं और इतनी सहजता, लय और भाव के साथ सुनाती हैं कि लगता है जैसे वर्षों पहले लिखी हुई कविता को याद करके सुना रही हों।
हाल ही में आयोजित “कहकशां” पुस्तक के लोकार्पण समारोह में जब दीपा टाक का यह अनोखा टैलेंट लोगों के सामने आया तो उपस्थित हर व्यक्ति आश्चर्यचकित रह गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उन्हें अलग-अलग विषय दिए और उन्होंने तुरंत उन विषयों पर आशु कविताएं सुनाकर माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया। यही वह क्षण था जब राइजिंग भास्कर की टीम ने महसूस किया कि इस असाधारण प्रतिभा को दुनिया के सामने लाना चाहिए।
कहकशां के मंच पर चमका अनोखा टैलेंट
कहकशां पुस्तक के लोकार्पण समारोह में साहित्यकारों, कवियों और साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या मौजूद थी। कार्यक्रम अपने पूरे शबाब पर था। इसी दौरान बातचीत में यह चर्चा सामने आई कि कार्यक्रम में मौजूद शिक्षिका दीपा टाक किसी भी विषय पर तुरंत कविता रच सकती हैं। पहले तो लोगों को यह सामान्य दावा लगा, लेकिन जब मंच से उन्हें अलग-अलग विषय दिए गए और उन्होंने उसी क्षण कविताएं सुनानी शुरू कीं तो पूरा सभागार स्तब्ध रह गया।
किसी ने प्रकृति पर कविता मांगी, किसी ने मां पर, किसी ने समाज पर, तो किसी ने शिक्षा और संस्कारों पर। दीपा टाक ने बिना सोचे, बिना रुके और बिना किसी तैयारी के ऐसी कविताएं सुनाईं कि लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली।
उनकी आवाज में आत्मविश्वास था, शब्दों में गहराई थी और भावों में ऐसी संवेदनशीलता कि हर कविता सीधे दिल को छू रही थी। सबसे बड़ी बात यह थी कि कविता में केवल तुकबंदी नहीं थी, बल्कि विचार, दर्शन और भावनाओं का सुंदर समन्वय था।
“जैसे पहले से लिखी हुई कविता सुना रही हों”
कार्यक्रम में मौजूद लोगों का कहना था कि यदि कोई व्यक्ति डायरी में लिखी हुई कविता भी सुनाता है तो उसे पन्ने पलटने और सोचने में समय लगता है। लेकिन दीपा टाक ने तो मानो शब्दों की धारा बहा दी। उन्हें जैसे ही विषय मिलता, वे तुरंत कविता शुरू कर देतीं। कार्यक्रम में मौजूद करीब 70 से अधिक लोगों में से दर्जन भर लोगों ने उन्हें अलग-अलग विषय दिए। हर बार उन्होंने नए अंदाज और नए भावों के साथ कविता प्रस्तुत की। उनकी यह क्षमता लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी।
राइजिंग भास्कर की एडिटर इन चीफ राखी पुरोहित ने भी दीपा टाक से कई विषयों पर कविताएं सुनाने का आग्रह किया। उन्होंने हाथों-हाथ कविताएं बनाकर सुनाईं। उस दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई थी, ताकि इस अद्भुत प्रतिभा को पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जा सके। हालांकि तकनीकी कारणों से वह वीडियो फिलहाल उपलब्ध नहीं है, लेकिन जिन्होंने वह दृश्य देखा, उनके लिए वह यादगार अनुभव बन गया।
बचपन से शब्दों से दोस्ती
दीपा टाक का साहित्य और कविता से रिश्ता नया नहीं है। वे बचपन से ही शब्दों के संसार में जीती आई हैं। उन्होंने बताया कि वे नौवीं कक्षा से ही कविताएं लिख रही हैं। उस समय शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि यह शौक एक दिन उनकी पहचान बन जाएगा। धीरे-धीरे कविता उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बनती चली गई। जहां दूसरे लोग भावनाओं को सामान्य शब्दों में व्यक्त करते हैं, वहीं दीपा टाक उन्हें कविता में ढाल देती हैं। यही कारण है कि आज वे आशुकविता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
दोनों हाथों से लिखने की अद्भुत क्षमता
दीपा टाक की प्रतिभा केवल आशु कविता तक सीमित नहीं है। उनकी एक और विशेषता लोगों को चौंका देती है— वे दोनों हाथों से लिख सकती हैं। यह क्षमता बहुत कम लोगों में देखने को मिलती है। आमतौर पर व्यक्ति एक ही हाथ से सहजता से लिख पाता है, लेकिन दीपा टाक दोनों हाथों से समान गति और स्पष्टता के साथ लिखती हैं। यही वजह है कि लोग उनकी प्रतिभा को सामान्य नहीं मानते। उनके परिचित मजाक में कहते हैं कि शायद उनके दिमाग में कोई “एआई चिप” लगी हुई है, जो तुरंत शब्दों और भावनाओं को कविता में बदल देती है।
शिक्षिका होने के साथ संवेदनशील साहित्यकार भी
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सर में शिक्षिका के रूप में कार्यरत दीपा टाक केवल एक अध्यापिका नहीं, बल्कि संवेदनशील साहित्यकार भी हैं। उन्होंने एमए और बीएड तक शिक्षा प्राप्त की है। शिक्षा और साहित्य— दोनों क्षेत्रों में उनका समान रूप से योगदान रहा है। एक ओर वे विद्यार्थियों को शिक्षा का प्रकाश देती हैं, वहीं दूसरी ओर साहित्य के माध्यम से समाज को संवेदनशील बनाने का कार्य कर रही हैं। उनकी कविताओं में जीवन, प्रेम, रिश्ते, समाज, संस्कार, स्त्री-मन और मानवीय संवेदनाओं की झलक साफ दिखाई देती है।
कई पुस्तकें और दर्जनों साझा संकलन
दीपा टाक की साहित्यिक यात्रा केवल मंच तक सीमित नहीं रही। उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनका कहानी संग्रह “इश्क का बुखार” पाठकों द्वारा सराहा गया। इसके अलावा कविता संग्रह “तेरे आने से जाने तक” और “प्रीत के मोती” भी साहित्य प्रेमियों के बीच लोकप्रिय रहे हैं।इतना ही नहीं, वे 80 से अधिक साझा संकलनों में अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। देशभर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कविताएं और रचनाएं लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। यह साबित करता है कि दीपा टाक केवल मंचीय कवयित्री नहीं, बल्कि गंभीर साहित्य साधिका भी हैं।
शिक्षा और साहित्य— दोनों में सम्मान
दीपा टाक को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में ब्लॉक लेवल अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें “भामाशाह प्रेरक पुरस्कार” भी मिला है। उत्तर प्रदेश से उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। यह सम्मान केवल उनके शिक्षण कार्य के लिए नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के प्रति उनकी संवेदनशीलता और समर्पण का भी प्रमाण है। उनकी साहित्यिक प्रतिभा को भी विभिन्न मंचों पर सराहा गया है। जम्मू से प्रकाशित “नई रोशनी” ने उन्हें “चलता-फिरता गूगल” की उपाधि दी है। यह उपाधि यूं ही नहीं मिली। उनकी स्मरण शक्ति, तत्काल सोचने की क्षमता और शब्दों पर अद्भुत पकड़ उन्हें सामान्य लोगों से अलग बनाती है।
लोग बोले— “ये इंसानी एआई हैं”
आज जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की चर्चा कर रही है, तब दीपा टाक जैसी प्रतिभाएं लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि इंसानी दिमाग की क्षमता किसी मशीन से कम नहीं। कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि “दीपा जी के दिमाग में जरूर एआई की चिप लगी है।” लेकिन वास्तव में यह उनकी वर्षों की साधना, अध्ययन, संवेदनशीलता और साहित्य प्रेम का परिणाम है। उनकी कविताएं केवल शब्दों का खेल नहीं होतीं, बल्कि उनमें भावनाओं की सच्चाई और अनुभवों की गहराई भी होती है। यही कारण है कि लोग उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं।
प्रतिभा जिसे दुनिया तक पहुंचना चाहिए
समाज में कई प्रतिभाएं ऐसी होती हैं जो सीमित दायरों में रह जाती हैं। उन्हें वह मंच और पहचान नहीं मिल पाती जिसकी वे हकदार होती हैं। दीपा टाक भी उन्हीं प्रतिभाओं में से एक हैं, जिन्हें अब व्यापक पहचान मिलने लगी है।उनकी आशुकविता की कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि साहित्य की एक दुर्लभ विधा है। तुरंत कविता रचना आसान नहीं होता। इसके लिए भाषा पर पकड़, विचारों की गहराई, संवेदनशील मन और अद्भुत मानसिक एकाग्रता की आवश्यकता होती है। दीपा टाक ने यह साबित कर दिया है कि यदि व्यक्ति के भीतर प्रतिभा और समर्पण हो तो वह साधारण परिस्थितियों में रहकर भी असाधारण पहचान बना सकता है।
साहित्य जगत के लिए प्रेरणा
आज के दौर में जहां लोग मोबाइल और सोशल मीडिया में व्यस्त हैं, वहीं दीपा टाक जैसी साहित्य साधिकाएं शब्दों की शक्ति को जीवित रखे हुए हैं। वे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं कि साहित्य केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को समझने और संवेदनशील बनाने का माध्यम भी है। उनकी सफलता यह भी संदेश देती है कि शिक्षकों की भूमिका केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं होती। शिक्षक यदि चाहें तो समाज में संस्कृति, साहित्य और संवेदनाओं की मशाल भी जला सकते हैं।
दीपा टाक की प्रमुख विशेषताएं
◆ तुरंत कविता रचने की अद्भुत क्षमता
किसी भी विषय पर बिना तैयारी आशुकविता सुनाने में माहिर।
◆ दोनों हाथों से लिखने की कला
बहुत कम लोगों में पाई जाने वाली विलक्षण क्षमता।
◆ कई पुस्तकें प्रकाशित
- इश्क का बुखार
- तेरे आने से जाने तक
- प्रीत के मोती
◆ 80 से अधिक साझा संकलन
देशभर के साहित्यिक संकलनों में सक्रिय भागीदारी।
मिले प्रमुख सम्मान
- ब्लॉक लेवल शिक्षा सम्मान
- भामाशाह प्रेरक पुरस्कार
- राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान (उत्तर प्रदेश)
- “चलता-फिरता गूगल” की उपाधि
लोगों की जुबानी
“ऐसा लग रहा था जैसे कविता पहले से लिखी हो”
— कार्यक्रम में मौजूद साहित्य प्रेमी
“उनकी प्रतिभा किसी चमत्कार से कम नहीं”
— उपस्थित अतिथि
“दीपा जी सचमुच इंसानी एआई हैं”
— कार्यक्रम में मौजूद श्रोता
शब्दों की साधिका को सलाम
दीपा टाक केवल एक नाम नहीं, बल्कि उस जीवंत प्रतिभा का उदाहरण हैं जो यह साबित करती है कि इंसानी दिमाग की रचनात्मकता किसी तकनीक से कम नहीं। आज जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ओर बढ़ रही है, तब दीपा टाक जैसी साहित्यकार यह याद दिलाती हैं कि संवेदनशीलता, भावनाएं और सृजनशीलता अब भी इंसान की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनकी कविताएं केवल मंच पर सुनाई जाने वाली पंक्तियां नहीं, बल्कि दिल से निकले हुए वे भाव हैं जो सीधे श्रोताओं के मन तक पहुंचते हैं। जोधपुर की यह शिक्षिका आज साहित्य जगत में अपनी अलग पहचान बना रही हैं और आने वाले समय में निश्चित रूप से उनका नाम और अधिक ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।
Author: Dilip Purohit
Group Editor



