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Sunday, August 23, 2026, 7:48 am

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भोगीशैल परिक्रमा क्षेत्र दिव्य ऊर्जा का स्रोत: स्वामी सच्चिदानंद

श्रीविष्णु सहस्रनाम हवन के साथ अनुष्ठान संपन्न

भरत जोशी. जोधपुर

परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ईश्वरानंद गिरि महाराज द्वारा स्थापित जोधपुर संवित साधनायन सोसायटी के तत्वावधान में पिछले 17 मई से चल रहे एक माह के दिव्य अधिक मास अनुष्ठान के तहत 14 जून को संवित भोगीशैल परिक्रमा का आयोजन किया गया । 15 जून को संवित धाम आश्रम में नौ कुंडीय श्रीविष्णु सहस्रनाम पुरुषोत्तम हवन के साथ एक माह का अनुष्ठान संपन्न हुआ। सन्त सरोवर सोमाश्रम अबुर्दाचल के अधिष्ठाता स्वामी संवित सच्चिदानंद गिरि महाराज ने इस अवसर पर कहा कि सूर्यनगरी के चारों तरफ आई भोगीशैल पर्वत श्रृंखला दिव्य ऊर्जा, आध्यात्मिक शक्ति पुंज और साक्षात् चेतना का क्षेत्र है। इस क्षेत्र की परिक्रमा करने से अभूतपूर्व भक्ति, शक्ति, जप, तप की अनुभूति होती है। स्वामी सच्चिदानंद गिरि महाराज ने यह उदगार भोगीशील परिक्रमा के बाद आयोजित सभा में व्यक्त किए। सुबह रातानाडा गणेशजी मंदिर, चौपासनी श्याममनोहर मंदिर, चौखा श्रीजी बैठक, बड़ली भेरूजी मंदिर, अरणा झरणा महादेव मंदिर, मंडलनाथ महादेव मंदिर के बाद संवित धाम में भगवती गिरि राजेश्वरी के पूजन के साथ परिक्रमा यात्रा पूर्ण हुई। श्रीपुरुषोत्तम हवन के बाद आयोजित धर्मसभा को शंकरालोक आश्रम अहमदाबाद के महंत स्वामी वीरेश्वर गिरि महाराज और श्रीशंकराचार्य एकात्म धाम ओंकारेश्वर के रेजीडेंट आचार्य स्वामी भूमानंद सरस्वती महाराज ने भी संबोधित किया। साधनायन की अध्यक्षा रानी उषा देवी ने सभी संतों का स्वागत किया तथा आये हुए संवित साधकों का आभार व्यक्त किया।

जोधपुर संवित साधनायन सोसायटी के शेखर थानवी और महेश हर्ष ने बताया कि नौ कुण्डीय श्रीविष्णु सहस्रनाम पुरुषोत्तम हवन में घृत, शाकल्य, कमलगट्टा के साथ साथ कमल पुष्प और मालपुओं से वैदिक मन्त्रो के साथ आहुतियां दी गई। श्रीविष्णु सहस्रनाम पुरुषोत्तम हवन का शुभारभ गणपति पूजन, षोडश मातृका पूजन, सप्त घृत मातृ पूजन, नवग्रह पूजन, रूद्र कलश पूजन, प्रधान पीठ श्रीविष्णु पूजन, श्रीगुरु पूजन, ब्रह्या पूजन, हवन कुण्ड पूजन, श्रुवा सुचि पूजन के बाद आघार आहुति और सभी पीठों की पूजा की गई।पूर्णाहुति से पहले प्रत्येक हवन कुण्ड में 33-33 मालपुओं और कमल पुष्पों से आहुतियां देने के बाद श्रीविष्णु सहस्रनाम से 1008 आहुतियां दी गई।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor