Explore

Search

Sunday, August 9, 2026, 10:34 am

Sunday, August 9, 2026, 10:34 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

अग्रसेन संस्थान में गीता प्रचार अभियान के तहत स्वामी रामसुखदास जी की साधक संजीवनी के आधार पर गीता जी की हुई भाव भरी व्याख्या

दिलीप कुमार पुरोहित, जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला कालजयी मार्गदर्शक है। वर्तमान समय में जब तनाव, प्रतिस्पर्धा, असंतोष और मानसिक अशांति तेजी से बढ़ रही है, तब श्रीमद्भगवद्गीता के सिद्धांत प्रत्येक व्यक्ति को आत्मविश्वास, कर्तव्यनिष्ठा और आत्मिक शांति प्रदान कर सकते हैं। इसी उद्देश्य को लेकर जोधपुर में 8 अगस्त को तीन दिवसीय गीता सेमिनार पहला पुलिया चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित अग्रसेन संस्थान मे शुरू हुआ।

गीता प्रचारक एवं आध्यात्मिक विचारक श्रीमती सुधा गर्ग ने बताया कि यह सेमिनार गीता परिचय अभियान तथा श्री अग्रसेन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में श्री अग्रसेन संस्थान, पहला पुलिया, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, जोधपुर में आयोजित किया जा रहा है। सेमिनार में परम श्रद्धेय वीतराग संत एवं गीता मर्मज्ञ स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ ‘साधक संजीवनी’ के आधार पर श्रीमद्भगवद्गीता के गूढ़ रहस्यों का अत्यंत सरल एवं भावपूर्ण ढंग से विवेचन किया जा रहा है।

श्रीमती गर्ग ने बताया कि गीता भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य वाणी है। यह केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं देती, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने, कर्तव्य पालन, आत्मविश्वास बनाए रखने और निष्काम कर्म का संदेश भी देती है। गीता मनुष्य को स्वयं से परिचित कराती है तथा जीवन को सफल, आनंदमय और सार्थक बनाने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने बताया कि सेमिनार में अनुभवी एवं मर्मज्ञ आचार्यगण संपूर्ण गीता का सार पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से अत्यंत सरल भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं। जिससे सामान्य व्यक्ति भी गीता के गहन संदेशों को सहज रूप से समझ सकते हैं।

दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का आगाज

श्रीमती सुधा गर्ग की अगुवाई में दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का आगाज हुआ। गीता प्रेमियों का सेमिनार में उत्साह देखा गया। 140 से अधिक लोगों ने पंजीयन करवाया। पंजीयन कराने वाले साधकों को ‘गीता जीवन संगीत’ पुस्तक एवं लेखन सामग्री उपलब्ध कराई गई।

भगवद्गीता क्यों है आज भी प्रासंगिक?

महाभारत के युद्धक्षेत्र कुरुक्षेत्र में अर्जुन के मोह और संशय को दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने जो उपदेश दिए, वही श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में विश्वविख्यात हुए। गीता मनुष्य को सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, धैर्य, विवेक और कर्तव्य का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

गीता का सबसे प्रसिद्ध संदेश “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” आज भी उतना ही प्रासंगिक है। इसका सार यह है कि मनुष्य को अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, फल की चिंता में नहीं उलझना चाहिए। यही सिद्धांत व्यक्ति को तनावमुक्त, सकारात्मक और सफल जीवन की ओर ले जाता है।

आज विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों, प्रबंधन संस्थानों और नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी गीता के सिद्धांतों का अध्ययन कराया जा रहा है। गीता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, नैतिकता और जीवन प्रबंधन का भी अद्भुत ग्रंथ मानी जाती है।

सरल भाषा में दिया जा रहा है गीता का सार

सेमिनार में सरल शब्दों में गीता का सार बताया जा रहा है। पहले दिन संरक्षक श्री संतोष कुमार गुप्ता ने मार्गदर्शन किया। उन्होंने उद्घाटन सत्र में उदाहरणों, चित्रों और पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से गीता के संदेशों को रोचक एवं सरल शैली में प्रस्तुत किया जाएगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor