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संवित धाम में पूरे श्रावण मास हो रहा शिव पंचांग अनुष्ठान 1008 शिवसहस्रनामावली से भस्मी अर्चना


सुमनेश व्यास जोधपुर/19.08.2026

श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना के निमित्त दईजर लाछा बासनी स्थित संवित धाम आश्रम में संपूर्ण माह प्रतिदिन शिव पंचांग अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर शिव पुराण एवं शुक्ल यजुर्वेद मंत्रों के साथ भगवान गिरीश्वर का अभिषेक तथा 1008 शिवसहस्रनामावली से पुष्प, बिल्वपत्र एवं भस्मी द्वारा अर्चना की जा रही है। यह अनुष्ठान जोधपुर संवित साधनायन सोसायटी की अध्यक्षा  ऊषा रानी  के मार्गदर्शन में महेश हर्ष द्वारा विधिवत रूप से संपादित किया जा रहा है, जिसमें शेखर थानवी एवं पं. सुमेर सिंह का सहयोग प्राप्त हो रहा है।

शिव पंचांग के पाँच अंग

 जोधपुर संवित साधनायन सोसायटी दिनेश चन्द्र सिंघल एवं डॉ. सी. एस. कल्ला ने बताया कि शिव पंचांग  साधना भगवान शिव के पाँच प्रमुख अंगों में विभाजित है, जिनमें कवच — अमोघ शिव कवच पाठ द्वारा आध्यात्मिक संरक्षण, हृदय — रुद्रहृदय उपनिषद् के माध्यम से अंतर्मुखी साधना, सहस्रनाम — 1008 नामों द्वारा पुष्प, बिल्वपत्र एवं भस्मी अर्पण, स्तोत्र — नित्य शिव स्तोत्रों का पाठ तथा गीता — शिव गीता का अध्ययन एवं मनन सम्मिलित हैं।

भस्मी अर्चना का महत्व 

जोधपुर संवित साधनायन सोसायटी के रामराज पुरोहित और अनिल राघवानी पुरोहित ने बताया कि भस्मी से अर्चना शिव तत्त्व में नश्वरता के बोध का प्रतीक मानी जाती है। बिल्वपत्र, पुष्प एवं भस्मी के साथ सहस्रनाम अर्चना के माध्यम से मंत्र, भाव एवं समर्पण का समन्वित स्वरूप प्रकट होता है, जो साधना को अधिक गहन एवं प्रभावी बनाता है।

श्रावण मास की परंपरा

श्रावण मास में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप, शिव सहस्रनाम एवं बिल्वार्चन जैसी विविध साधनाओं का विशेष महत्व है। यह अनुष्ठान कवच, हृदय, सहस्रनाम, स्तोत्र एवं गीता के समन्वय के माध्यम से समग्र शिव साधना का सुसंगठित स्वरूप प्रस्तुत करता है।

महिला साधकों का सहयोग

पूजन एवं  शिव श्रृंगार  में लक्ष्मी सोनी, दुर्गा व्यास, शशिबाला कल्ला, उमा थानवी, अंजू हर्ष, शिवांगी थानवी, हेमांगी वशिष्ठ सहित अनेक महिला साधिकाएँ सक्रिय सहयोग प्रदान कर रही हैं। सोसायटी के अनुसार यह पंचांग आधारित वैदिक अनुष्ठान श्रावण मास की शिव आराधना का एक दुर्लभ एवं समन्वित स्वरूप है।
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Author: sumnesh vyas