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Wednesday, August 19, 2026, 3:16 pm

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सकारात्मक समाचार : इंस्टेंट लोन नहीं, पहले सुरक्षा: एक क्लिक की जल्दबाजी कहीं जिंदगी भर का संकट न बन जाए

राइजिंग भास्कर की सकारात्मक पत्रकारिता का संकल्प जनता को डराना नहीं, सावधान करना है; फेक लोन ऐप्स से बचने के आसान उपाय जानिए

दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली

9783414079 diliprakhai@gmail.com

आर्थिक जरूरत अचानक सामने आ सकती है। बीमारी में इलाज का खर्च, बच्चों की फीस, घर का किराया या कारोबार में आई अस्थायी परेशानी—ऐसे समय में कुछ हजार रुपये की जरूरत भी बड़ी लगने लगती है। इसी मजबूरी को कुछ साइबर अपराधी अपना हथियार बना लेते हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर ‘इंस्टेंट लोन’, ‘बिना कागजी कार्रवाई’, ‘नो सिबिल चेक’ और ‘100 प्रतिशत अप्रूवल’ जैसे आकर्षक दावों के जरिए लोगों को ऐसी डिजिटल लोन सेवाओं की ओर खींचा जाता है, जिनका उद्देश्य कई बार वैध ऋण उपलब्ध कराना नहीं बल्कि व्यक्तिगत जानकारी हासिल करना और उसका दुरुपयोग करना होता है।

राइजिंग भास्कर ने भीष्म प्रतिज्ञा की है कि वह सकारात्मक पत्रकारिता को प्राथमिकता देगा और समाज में अनावश्यक भय या नकारात्मकता फैलाने वाली खबरों से बचेगा। लेकिन सकारात्मक पत्रकारिता का अर्थ यह नहीं कि जनता को संभावित खतरे से अनजान रखा जाए। इसलिए यह खबर किसी डर को बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि डिजिटल वित्तीय सुरक्षा की जानकारी देकर लोगों को सक्षम बनाने के उद्देश्य से प्रस्तुत की जा रही है।

खतरे की खबर नहीं, बचाव का रास्ता

भारतीय रिजर्व बैंक लंबे समय से अनधिकृत डिजिटल लोन प्लेटफॉर्म और ऐप्स को लेकर लोगों को सावधान करता रहा है। RBI ने डिजिटल लेंडिंग के लिए ग्राहक सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और पारदर्शिता से जुड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। साथ ही RBI ने अपने विनियमित संस्थानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले Digital Lending Apps की सार्वजनिक सूची उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की है, ताकि ग्राहक किसी ऐप के संबंध को सत्यापित कर सकें।

यानी सवाल यह नहीं है कि ऑनलाइन लोन लेना गलत है या नहीं। सवाल यह है कि लोन देने वाला कौन है, ऐप किस संस्था से जुड़ा है और वह आपके फोन से कौन-कौन सी जानकारी मांग रहा है।

फेक लोन ऐप का खेल समझिए : शुरुआत जरूरत से, निशाना निजी डेटा पर

ऐसे मामलों में तरीका अक्सर बेहद आकर्षक दिखाई देता है। व्यक्ति को कम समय में छोटी रकम उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है। ऐप डाउनलोड करने के बाद उससे कई तरह की अनुमतियां मांगी जा सकती हैं। यदि उपयोगकर्ता बिना पढ़े हर अनुमति स्वीकार कर देता है तो उसके फोन में मौजूद संपर्क, फोटो या अन्य निजी जानकारी जोखिम में पड़ सकती है।

इसके बाद कथित ऋण की शर्तों में अंतर, अत्यधिक शुल्क, कम अवधि में भुगतान का दबाव या लगातार वसूली जैसे तरीके सामने आ सकते हैं। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब निजी तस्वीरों या संपर्कों का दुरुपयोग कर व्यक्ति पर दबाव बनाने की कोशिश की जाए। यहां सबसे जरूरी बात है—हर डिजिटल लोन ऐप फेक नहीं होता और हर ऑनलाइन लोन धोखाधड़ी नहीं है। लेकिन किसी भी ऐप की वैधता जांचे बिना उसे फोन में जगह देना जोखिम जरूर पैदा कर सकता है।

छोटी रकम के लिए बड़ा जोखिम क्यों?

किसी व्यक्ति को दो-चार हजार रुपये की जरूरत हो सकती है। लेकिन यदि इसके बदले वह अपने फोन का निजी डेटा असुरक्षित कर देता है तो नुकसान रकम से कई गुना बड़ा हो सकता है। उपलब्ध मामलों में ऐसी शिकायतें सामने आई हैं जिनमें लोगों से कथित रूप से उधार ली गई राशि लौटाने के बाद भी अतिरिक्त भुगतान के लिए दबाव बनाया गया और निजी तस्वीरों या डेटा के दुरुपयोग की धमकी दी गई। इन घटनाओं का सबसे सकारात्मक संदेश यही है कि समस्या आने के बाद चुप रहना समाधान नहीं है। यदि कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में फंस गया है तो परिवार से बात करना, सबूत सुरक्षित रखना और तत्काल साइबर अपराध की शिकायत करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

राइजिंग भास्कर का पॉजिटिव फॉर्मूला : डरिए नहीं, ये 5 जांच जरूर कीजिए

1. ऐप किसके साथ जुड़ा है?

लोन ऐप के पीछे वास्तविक बैंक या NBFC कौन है, यह स्पष्ट होना चाहिए। RBI के अनुसार ग्राहक संबंधित बैंक/NBFC की वेबसाइट पर भी यह जांच सकते हैं कि कोई डिजिटल लेंडिंग ऐप उससे जुड़ा है या नहीं।

2. फोन की कौन-कौन सी परमिशन मांगी जा रही हैं?

लोन आवेदन के नाम पर अनावश्यक रूप से कॉन्टैक्ट, फोटो या अन्य निजी डेटा की मांग हो तो रुककर सोचिए। RBI की वित्तीय जागरूकता सामग्री भी संदिग्ध ऐप्स और सोशल मीडिया/SMS से मिले लोन लिंक से सावधान रहने की सलाह देती है।

3. लोन की कुल लागत पहले समझिए

ब्याज दर, प्रोसेसिंग शुल्क, अवधि, अन्य शुल्क और कुल भुगतान स्पष्ट रूप से समझे बिना ‘Accept’ न करें।

4. पहले पैसे मांगने पर सावधान

लोन मिलने से पहले किसी अनजान व्यक्ति या खाते में भुगतान करने को कहा जा रहा है तो अत्यधिक सावधानी जरूरी है।

5. WhatsApp/Telegram से आई APK से दूरी

RBI ने सोशल मीडिया या संदेशों के माध्यम से मिले संदिग्ध लोन ऐप लिंक डाउनलोड करने से बचने की सलाह दी है।

RBI की व्यवस्था जनता के लिए सुरक्षा कवच

RBI ने Digital Lending Apps की सार्वजनिक Repository विकसित करने की व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को यह सत्यापित करने में मदद करना है कि किसी डिजिटल लेंडिंग ऐप का संबंध RBI-विनियमित संस्था से है या नहीं। RBI ने स्पष्ट किया है कि इस Repository में जानकारी संबंधित विनियमित संस्थाओं द्वारा दी जाती है और उनके अपडेट के आधार पर इसमें बदलाव होते हैं।

इसलिए किसी भी डिजिटल लोन ऐप को इस्तेमाल करने से पहले संबंधित बैंक/NBFC और RBI की उपलब्ध जानकारी जरूर जांचें।

अगर फंस गए हैं तो सबसे पहले ये काम करें

सबसे महत्वपूर्ण बात—घबराइए नहीं और शर्मिंदा भी मत होइए। यदि किसी संदिग्ध लोन ऐप को पहले ही डाउनलोड कर लिया है या उससे संबंधित धमकी/वसूली शुरू हो गई है, तो:

पहला कदम: ऐप की अनावश्यक अनुमतियां तुरंत बंद करें।

दूसरा कदम: धमकी, चैट, फोन नंबर, UPI आईडी, बैंक खाते, भुगतान रसीद और ऐप से संबंधित स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।

तीसरा कदम: आगे किसी अनजान व्यक्ति को OTP, UPI PIN, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी न दें।

चौथा कदम: धमकी देने वालों को लगातार भुगतान करते रहना समाधान नहीं है। मामले को कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचाएं।

पांचवां कदम: तत्काल साइबर अपराध की शिकायत करें।

भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन उपलब्ध है। शिकायत National Cyber Crime Reporting Portal पर भी दर्ज की जा सकती है।

1930 क्यों याद रखें?

1930 — राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर जितनी जल्दी शिकायत की जाए, उतना बेहतर है। सरकारी साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने और उसे ट्रैक करने की सुविधा भी उपलब्ध है। पोर्टल पर संदिग्ध वेबसाइट, मोबाइल नंबर, WhatsApp/Telegram हैंडल आदि की रिपोर्ट करने की सुविधा भी दी गई है। याद रखें : साइबर अपराध में चुप्पी अपराधियों का आत्मविश्वास बढ़ा सकती है; समय पर शिकायत आपकी मदद कर सकती है।

एक और जरूरी फर्क : ऑनलाइन लोन और फेक लोन ऐप एक नहीं

डिजिटल बैंकिंग और डिजिटल लेंडिंग आज वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। तकनीक ने लोन लेने की प्रक्रिया आसान बनाई है। इसलिए हर ऑनलाइन लोन ऐप को देखकर डरना भी उचित नहीं है।RBI के दिशानिर्देशों के तहत विनियमित संस्थाओं और उनके Lending Service Providers द्वारा संचालित डिजिटल लेंडिंग व्यवस्था के लिए ग्राहक सुरक्षा और डेटा संबंधी नियम मौजूद हैं। RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी Lending Service Provider के माध्यम से काम करने पर भी विनियमित संस्था की जिम्मेदारियां समाप्त नहीं होतीं। इसलिए सही रास्ता है—डिजिटल सुविधा का इस्तेमाल करें, लेकिन डिजिटल सावधानी के साथ।

‘इंस्टेंट लोन’ देखकर तुरंत क्लिक करने से पहले 30 सेकंड का टेस्ट

रुकिए और खुद से पूछिए—

  • क्या मुझे लोन देने वाली वास्तविक संस्था का नाम पता है?
  • क्या वह RBI-विनियमित बैंक/NBFC से जुड़ी है?
  • क्या ब्याज और सभी शुल्क स्पष्ट हैं?
  • क्या ऐप अनावश्यक फोन परमिशन मांग रही है?
  • क्या मुझे सोशल मीडिया/WhatsApp से लिंक मिला है?
  • क्या मुझसे पहले ही पैसे जमा करने को कहा जा रहा है?
  • क्या मुझे ‘100% गारंटी’ या ‘नो सिबिल चेक’ जैसे असामान्य वादे किए जा रहे हैं?

इनमें कई सवालों का जवाब ‘हां’ है तो आगे बढ़ने से पहले सत्यापन जरूर करें।

सकारात्मक पत्रकारिता का अर्थ : समाधान सामने रखना

राइजिंग भास्कर की भीष्म प्रतिज्ञा समाज में सकारात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देने की है। इस प्रतिज्ञा का मूल उद्देश्य जनता को समस्याओं के अंधेरे में छोड़ना नहीं, बल्कि समस्या के साथ समाधान का रास्ता दिखाना है। फेक लोन ऐप्स पर जागरूकता इसी सोच का हिस्सा है। इस खबर का उद्देश्य किसी व्यक्ति को डराना नहीं, बल्कि यह बताना है कि आर्थिक जरूरत के समय भी निर्णय लेने की क्षमता बनाए रखी जा सकती है। यदि पांच मिनट की जांच किसी परिवार को महीनों की परेशानी से बचा सकती है, तो वह पांच मिनट बहुत महत्वपूर्ण हैं। जरूरत हो तो लोन लीजिए, लेकिन पहले लोन देने वाले की पहचान जांचिए। डिजिटल सुविधा अपनाइए, लेकिन अपनी निजता की कीमत पर नहीं।और यदि धोखा हो जाए तो छिपाइए नहीं—1930 और साइबर अपराध पोर्टल का सहारा लीजिए। राइजिंग भास्कर की सकारात्मक पत्रकारिता का संदेश साफ है—खतरे की खबर से डर पैदा करना हमारा उद्देश्य नहीं; सही जानकारी देकर जनता को खतरे से बचाना हमारा उद्देश्य है।

डिजिटल दुनिया में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच : सतर्कता, सत्यापन और समय पर शिकायत करना है

एक क्लिक आपकी सुविधा बन सकता है, लेकिन वही क्लिक आपकी परेशानी भी बन सकता है। इसलिए डिजिटल दुनिया में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है—सतर्कता, सत्यापन और समय पर शिकायत।

राइजिंग भास्कर : खबर ऐसी, जो डराए नहीं—जगाए।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor