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Monday, August 17, 2026, 7:37 pm

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मेहरान की 33 रचनाओं में साहित्य का अमृत, ‘मैं सृष्टा हूं’ ने जगाया सृजन का भाव

डॉ. मदन सावित्री डागा साहित्य भवन में दो पुस्तकों का भव्य लोकार्पण, साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने रचनाकारों का बढ़ाया उत्साह

सुमनेश व्यास. पंकज जांगिड़. जोधपुर

श्री जागृति संस्थान और श्रीमती जड़ाव श्रीराम निम्बावत वैष्णव परमार्थ ट्रस्ट, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में नेहरू पार्क स्थित डॉ. मदन सावित्री डागा साहित्य भवन में साहित्यिक गरिमा से परिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में साझा साहित्यिक संकलन ‘मेहरान’ तथा स्वामी डम डम डीकानंद की पुस्तक ‘मैं सृष्टा हूं’ का विधिवत लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, समाजसेवा और कला जगत से जुड़े अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

श्री जागृति संस्थान के अध्यक्ष राजेश शेरवानी ने बताया कि साझा संकलन ‘मेहरान’ के प्रधान संपादक वरिष्ठ अधिवक्ता एवं साहित्यकार एनडी निम्बावत, प्रबंध संपादक दिलीप कुमार पुरोहित तथा सह संपादक राखी पुरोहित हैं। वहीं ‘मैं सृष्टा हूं’ के लेखक स्वामी डम डम डीकानंद हैं। दोनों पुस्तकों के लोकार्पण ने साहित्य प्रेमियों के बीच विशेष आकर्षण पैदा किया।

समारोह के मुख्य अतिथि बाबा रामदेव शोधपीठ, जेएनवीयू के निदेशक डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित ने कहा कि ‘मेहरान’ शब्द का एक अर्थ समुद्र भी होता है। समुद्र अपने भीतर असंख्य रत्नों और अनमोल संपदाओं को समेटे रहता है। इसी प्रकार इस साझा संकलन में शामिल 33 रचनाकार साहित्य की अमृतधारा की 33 बूंदों के समान हैं। उन्होंने संकलन की कुछ कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक रचनाकार ने अपनी संवेदना, अनुभव और कल्पना के माध्यम से साहित्य को समृद्ध करने का प्रयास किया है। साझा संकलन केवल अलग-अलग रचनाओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि यह विभिन्न रचनाकारों की वैचारिक और रचनात्मक यात्राओं को एक मंच पर लाने का माध्यम भी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘मेहरान’ साहित्य जगत में अपनी अलग पहचान बनाएगा।

डॉ. राजपुरोहित ने संपादक मंडल को सुझाव दिया कि अगले साझा संकलन का केंद्र राजस्थानी साहित्य होना चाहिए, ताकि राजस्थान की समृद्ध लोकभाषा, संस्कृति, परंपराओं और साहित्यिक विरासत को व्यापक मंच मिल सके।

कार्यक्रम में प्रबंध संपादक दिलीप कुमार पुरोहित ने ‘मैं सृष्टा हूं’ पुस्तक के पीछे की रचनात्मक यात्रा और उसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर मौजूद सृजनात्मक शक्ति और सकारात्मक सोच को पहचानने का प्रयास है। मनुष्य अपने विचारों, कर्मों और संकल्पों के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है। साहित्य समाज को सोचने, समझने और बदलने की प्रेरणा भी देता है। इसी दृष्टि से दोनों पुस्तकों को पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

विशिष्ट अतिथि मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के पूर्व चेयरपर्सन मोहम्मद अतीक ने अपने संबोधन में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को साझा किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर और कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी का पौधा लगाया गया था, जो आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। उन्होंने अपनी शिक्षाविद के रूप में लंबी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके हाथों से अब तक 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि किसी विद्यार्थी को शिक्षा देना केवल उसे डिग्री दिलाना नहीं, बल्कि उसके भविष्य को आकार देना है। समाज में शिक्षा का विस्तार ही वास्तविक परिवर्तन की मजबूत आधारशिला है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एवं साहित्यकार तथा खुशदिलान-ए-जोधपुर के अध्यक्ष संदीप भांडावत ने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजनों में आकर उन्हें विशेष आनंद और आत्मिक संतोष मिलता है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं साहित्य के विद्यार्थी रहे हैं और साहित्य से उनका पुराना जुड़ाव रहा है। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के लिए एनडी निम्बावत को बधाई देते हुए साहित्य और समाज के बीच मजबूत संबंध की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने खुशदिलान-ए-जोधपुर संस्था की गतिविधियों और उसकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला। इस दौरान उन्होंने अपनी कई रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

इंडिगो पब्लिक सीनियर सेकंडरी स्कूल के निदेशक सुदर्शन अरोड़ा ने ‘मेहरान’ और ‘मैं सृष्टा हूं’ के प्रकाशन के लिए सभी रचनाकारों और संपादकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुस्तकों का प्रकाशन समाज में विचारों और अनुभवों को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पुस्तकें पाठकों के बीच लोकप्रिय होंगी और साहित्य प्रेमियों को नई दृष्टि प्रदान करेंगी।

विशिष्ट अतिथि एवं गायिका यशोदा माहेश्वरी ने सभी रचनाकारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपनी मधुर आवाज में सुंदर भजन प्रस्तुत किया। भजन की प्रस्तुति ने साहित्यिक वातावरण को आध्यात्मिक रंग दे दिया और उपस्थित श्रोताओं ने तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम की शुरुआत राखी पुरोहित द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। सरस्वती वंदना के साथ समारोह का वातावरण आध्यात्मिक एवं साहित्यिक ऊर्जा से भर गया। इसके बाद अतिथियों ने दोनों पुस्तकों का लोकार्पण किया। कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता एवं साहित्यकार एनडी निम्बावत ने किया। उन्होंने अपनी प्रभावी संचालन शैली से कार्यक्रम को क्रमबद्ध और गरिमापूर्ण बनाए रखा। उन्होंने दोनों पुस्तकों की पृष्ठभूमि, रचनाकारों और संपादकीय प्रयासों का परिचय भी प्रस्तुत किया।

समारोह के दौरान साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अनुराधा अडवानी, पवन जोशी, मंजू गहलोत और अनुराधा श्रीवास्तव का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ सम्मानित व्यक्तियों का अभिनंदन किया।

कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। शिवप्रकाश अरोड़ा, डॉ. जेके अरोड़ा, गौरव निम्बावत, तृप्ति गोस्वामी ‘काव्यांशी’, नीलम व्यास ‘स्वयंसिद्धा’, सीमा जोशी मूथा, सपना यशोवर्धन व्यास ‘श्रीपत’, स्वाति पुरोहित, श्रीमती दीपा टाक, असरार आहिल, श्याम गुप्ता ‘शान्त’, डॉ. अरविन्द कुमार पुरोहित, प्रमोद वैष्णव, पद्मजा शर्मा, हरिदास व्यास, हंसराज बारासा, अशफाक अहमद फौजदार, बसंती पंवार, हरिश, महेश कुमार पंवार, अनवर हुसैन अब्बासी, डॉ. मरजीना, अकमल नईम सिद्दिकी, मधुर परिहार, रिन्कल कुंभट, डॉ. वीडी दवे, डॉ. हस्तीमल आर्य, मदनदान चारण और पंकज बिंदास सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

समारोह का समापन साहित्य और रचनात्मकता को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ। ‘मेहरान’ ने जहां विभिन्न रचनाकारों की साहित्यिक संवेदनाओं को एक मंच प्रदान किया, वहीं ‘मैं सृष्टा हूं’ ने मनुष्य के भीतर छिपी सृजन शक्ति और आत्मविश्वास को पहचानने का संदेश दिया। दोनों पुस्तकों का लोकार्पण जोधपुर के साहित्यिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में सामने आया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor