एक सकारात्मक पहल के लिए एक पते की बात : वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट मनोज बोहरा की कलम और कैमरे से…।
मनोज बोहरा. जोधपुर
आज विश्व फोटोग्राफी दिवस है। यह फोटो जब मैं क्लिक कर रहा था तो मुझे अपनी ब्ल्यू सिटी की विरासत कुछ कह रही थी। यह बात मैं आपको इसलिए बता रहा हूं क्योंकि विरासत जो आज हमारे हाथ में है कल हमारी आने वाली पीढ़ी के हाथ में होगी और परसों फिर किसी पीढ़ी के हाथ में। लेकिन विरासत को बचा पाएंगे? धीरे-धीरे ब्ल्यू सिटी का नैसर्गिक स्वरूप खत्म हो रहा है…।
भीतरी शहर को छोड़ दिया जाए तो अब हमारा शहर महानगरों की श्रेणी में खड़ा हो गया है। खुशी की बात है। लेकिन क्या कभी चिंतन किया कि ब्ल्यू सिटी का गौरव और नैसर्गिक सौंदर्य छोड़कर हम वास्तविक विकास कर पाएंगे? आज राजस्थान का हर शहर अपनी मौलिक पहचान खो रहा है। गुलाबी नगर अब गुलाबी रंग छोड़ रहा है, स्वर्ण नगरी स्वर्ण रंग से विमुख हो रहा है और कमोबेश ब्ल्यू सिटी भी अब धीरे-धीरे ब्ल्यू आभा खो रहा है।
यह फोटो कुछ सैलानी क्लिक कर रहे थे और अचानक मेरे कैमरे ने भी इसे क्लिक किया। भीतरी शहर का यह नजारा ब्ल्यू सिटी के गौरव का गौरवान्वित करने वाला क्षण है। लेकिन साथ ही साथ हमें सचेत भी करता है और जागरूक भी। ऐसे नजारे देखने के लिए ही सैलानी आते हैं। हमारे गौरव और विरासत पर कई फिल्में बन चुकी है, कई डॉक्यमेंट्री बन चुकी है। देश-दुनिया में ब्ल्यू सिटी प्रसिद्ध है। इसलिए हम सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम इसके नैसर्गिक स्वरूप को बचाएं और आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ छोड़कर जाएं।


