राखी पुरोहित. पोकरण
समावेशी शिक्षा के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान एवं उन्हें आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने के लिए होने वाले CWSN सर्वे को लेकर सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी गोविंद सिंह पड़िहार, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, पोकरण में बैठक आयोजित हुई। बैठक में अधिकारियों ने विशेष शिक्षकों को सर्वे कार्य गंभीरता, संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में एसीबीईओ रायपाल सिंह, आरपी हिम्मत सिंह उज्ज्वल, आरपी सीडब्ल्यूएसएन योगेश गिरी एवं रमाकांत योगी सहित ब्लॉक के 14 विशेष शिक्षक मौजूद रहे।
‘तारे जमीन पर’ फिल्म का दिया उदाहरण
एसीबीईओ रायपाल सिंह ने CWSN सर्वे को केवल विभागीय कार्य नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी बताते हुए इसे पूरी रुचि और निष्ठा के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने ‘तारे जमीन पर’ फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की क्षमताओं को समझने और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने के लिए संवेदनशील एवं सकारात्मक दृष्टिकोण जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सर्वे के दौरान प्रत्येक बच्चे की वास्तविक स्थिति को समझते हुए सही जानकारी दर्ज की जाए, ताकि जरूरतमंद बच्चों को सरकार की योजनाओं और आवश्यक शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ मिल सके।
समय पर रिपोर्ट साझा करने के निर्देश
आरपी हिम्मत सिंह उज्ज्वल ने विशेष शिक्षकों को निर्धारित समयसीमा का ध्यान रखते हुए CWSN बच्चों की सही और पूर्ण जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सर्वे की प्रगति की नियमित रिपोर्ट साझा करने पर भी जोर दिया।
सर्वे फॉर्म भरने की समझाई प्रक्रिया
आरपी सीडब्ल्यूएसएन योगेश गिरी ने बैठक में सर्वे फॉर्म एवं दिव्यांगता संबंधी फॉर्म भरने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सर्वे के दौरान दर्ज की जाने वाली आवश्यक सूचनाओं और सावधानियों से शिक्षकों को अवगत कराया।
वहीं रमाकांत योगी ने सर्वे कार्य से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां और आवश्यक दिशा-निर्देश साझा किए।
18 अगस्त से शुरू हुआ सर्वे
बैठक में बताया गया कि ब्लॉक क्षेत्र में 18 अगस्त से CWSN सर्वे कार्य शुरू हुआ। अधिकारियों ने विशेष शिक्षकों से सर्वे को गंभीरता से लेते हुए प्रत्येक बच्चे तक पहुंचने और निर्धारित समय में कार्य पूरा करने का आह्वान किया। बैठक में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करने पर विशेष जोर रहा।


