आइडिया एंड क्यूरेटर : केबी व्यास, दुबई
वर्ड्स ऑफ इंटरव्यू : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
प्रजेंट : दिलीप कुमार पुरोहित. राइजिंग भास्कर
🎶 ♪♪… खट्… खट्… फुस्स… फुस्स… खबर… खबर… खबर… ♪♪ “आप सुन रहे हैं—ऑन द स्पॉट एफ.एम. 102.4… जहाँ सवाल भी हँसते हैं और खबरें कभी-कभी खबर बनने से पहले ही स्टूडियो पहुँच जाती हैं!” (स्टूडियो में तालियों की गड़गड़ाहट…) के बी व्यास:नमस्कार सा… राम-राम सा… खम्मा घणी सा! आज हमारे स्टूडियो में पधारी हैं एक ऐसी विशिष्ट महिला, जिनसे मोहल्ले की कोई बात छिप नहीं सकती। किसके घर मेहमान आए, किसके घर से मेहमान नाराज़ होकर गए, किसने नई साड़ी खरीदी, किसका गैस सिलेंडर खत्म हुआ और किसने रात को चुपके से ऑनलाइन खाना मँगाया—इनके पास हर खबर रहती है! लोग अख़बार सुबह पढ़ते हैं, मगर ये खबरें एक रात पहले ही सुना देती हैं! स्वागत कीजिए—मोहल्ला न्यूज़ नेटवर्क की संस्थापक, संपादक, संवाददाता, कैमरा पर्सन और स्वयंभू ब्यूरो चीफ—श्रीमती खबरीना देवी जी का! (जोरदार तालियाँ…) खबरीना देवी:धन्यवाद-धन्यवाद! वैसे आपके परिचय में दो-तीन महत्वपूर्ण खबरें छूट गईं। के बी व्यास:अभी तो इंटरव्यू शुरू भी नहीं हुआ और आपको खबर मिल गई? खबरीना देवी:हमारे रहते खबर शुरू होने का इंतज़ार नहीं करती, व्यास जी! खबर हमें देखते ही खुद चलकर आ जाती है। के बी व्यास:सबसे पहले बताइए, आपको “खबरीना देवी” नाम कैसे मिला? खबरीना देवी:देखिए, बचपन से ही हमें जानने की बड़ी इच्छा रहती थी कि आसपास क्या चल रहा है। स्कूल में मैडम पूछती थीं—“होमवर्क किया?” हम कहते थे—“नहीं मैडम, लेकिन मुझे पता है कि सीमा ने भी नहीं किया, रीना की कॉपी उसकी बहन ने लिखी है और मुकेश सुबह बहाना बनाकर आया है कि उसकी दादी बीमार हैं, जबकि मैंने उनकी दादी को बाजार में सब्ज़ी खरीदते देखा है!” के बी व्यास:फिर मैडम क्या कहती थीं? खबरीना देवी:कहती थीं—“तुम पढ़ाई पर ध्यान दो।” हमने कहा—“मैडम, पढ़ाई तो कोई भी कर सकता है, सूचना-संग्रह प्रतिभा से होता है!” (स्टूडियो में ठहाका…) के बी व्यास:आप खबरें जुटाती कैसे हैं? खबरीना देवी:उसके कई स्रोत हैं। बालकनी हमारा राष्ट्रीय मुख्यालय है।खिड़की क्षेत्रीय कार्यालय है।सब्ज़ीवाला फील्ड रिपोर्टर है।दूधवाला विशेष संवाददाता है।और कामवाली बाई तो हमारी अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी है! के बी व्यास:अंतरराष्ट्रीय? खबरीना देवी:बिल्कुल! उसे सिर्फ हमारी बिल्डिंग की नहीं, सामने वाली चार बिल्डिंगों की भी खबर रहती है। उनके रिश्तेदार जो दुबई में रहते हैं, अमरीका, इंग्लैंड में रहते हैं उनकी भी खबर वो दे देती है। (स्टूडियो में ठहाका…) फिर किसके घर बहू आई, किसकी बहू मायके गई, किसकी सास आई और किसकी सास जाने का नाम नहीं ले रही—सब अपडेट! के बी व्यास:तो आप हर खबर की पुष्टि करती हैं? खबरीना देवी:बिल्कुल करती हूँ! के बी व्यास:कैसे? खबरीना देवी:एक ही खबर तीन लोगों से सुनती हूँ। अगर तीनों अलग-अलग बातें बताएँ तो तीनों को जोड़कर चौथी खबर बना देती हूँ। के बी व्यास:वो पुष्टि हुई या निर्माण? खबरीना देवी:आजकल दोनों में बहुत कम अंतर रह गया है! के बी व्यास:सुना है आपके पास सुबह पाँच बजे से ही खबरें आने लगती हैं? खबरीना देवी:हम पाँच बजे तक इंतज़ार नहीं करते। हमारी नींद भी सूचना-संवेदनशील है। रात दो बजे ऊपर वाले फ्लैट में कुर्सी खिसकी— हमारी आँख खुल गई। हमने पति से कहा—“लगता है कुछ हुआ है।” पति बोले—“सो जाओ, कुर्सी खिसकी है।” मैंने कहा—“कुर्सियाँ बिना कारण नहीं खिसकतीं!” सुबह पता चला उनकी बिल्ली ने कुर्सी गिराई थी। के बी व्यास:तो आपकी आशंका गलत निकली? खबरीना देवी:गलत कहाँ? घटना तो हुई थी! (हँसी…) के बी व्यास:आपके पति आपकी इस आदत से खुश रहते हैं? खबरीना देवी:बहुत! के बी व्यास:सच? खबरीना देवी:अब उन्होंने बोलना कम कर दिया है। पहले ऑफिस से आते थे तो बताते थे—“आज बॉस ने ये कहा, सहकर्मी ने वो कहा।” अब घर आते ही कहते हैं—“तुम्हें तो पहले से पता होगा!” के बी व्यास:कभी आपने पति की भी खबर फैलाई? खबरीना देवी:अरे, घर की खबर बाहर नहीं फैलाते! के बी व्यास:अच्छा सिद्धांत है। खबरीना देवी:हाँ, पहले अपनी सहेली को बताते हैं। फिर अगर वह आगे फैला दे तो हमारी क्या गलती? के बी व्यास:आपकी सहेलियाँ आपसे अपने राज़ साझा करती हैं? खबरीना देवी:बहुत करती हैं। बस शुरू में कहती हैं—“देखना, किसी को बताना मत।” मैं कहती हूँ—“अरे, मैं किसी को क्यों बताऊँगी!” के बी व्यास:फिर? खबरीना देवी:फिर जिसको बताती हूँ, उसे भी यही कहती हूँ—“देखो, तुम्हें अपना समझकर बता रही हूँ, किसी और को मत बताना!” इस तरह राज़ की गोपनीयता बनी रहती है। हर व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से बताया जाता है! के बी व्यास:अद्भुत गोपनीयता है! खबरीना देवी:जी! हमारे यहाँ खबर फैलती नहीं—व्यक्तिगत रूप से वितरित होती है। (तालियाँ और ठहाके…) के बी व्यास:आप व्हाट्सऐप पर भी सक्रिय होंगी? खबरीना देवी:वहीं तो हमारा डिजिटल न्यूज़रूम है! हमारे छह ग्रुप हैं— “अपना मोहल्ला”“मोहल्ले की महिलाएँ”“सिर्फ जरूरी सूचना”“बहुत जरूरी सूचना”“गोपनीय सूचना”और “ये बात बाहर नहीं जानी चाहिए।” के बी व्यास:सबसे ज्यादा संदेश किस ग्रुप में आते हैं? खबरीना देवी:“ये बात बाहर नहीं जानी चाहिए” वाले में! के बी व्यास:कभी कोई गलत खबर भी भेज देती हैं? खबरीना देवी:देखिए, हम खबर गलत नहीं भेजते, परिस्थितियाँ बाद में बदल जाती हैं। एक बार मैंने खबर दी कि शर्मा जी की बेटी की शादी तय हो गई। बाद में पता चला रिश्ता देखने आए थे। तो मैंने सुधार भेजा—“अभी प्रारंभिक वार्ता चल रही है।” फिर रिश्ता नहीं हुआ। मैंने लिखा—“विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार वार्ता असफल।” के बी व्यास:शर्मा जी ने कुछ कहा? खबरीना देवी:कहा—“आपको किसने बताया?” मैंने कहा—“पत्रकार अपने सूत्र नहीं बताते!” के बी व्यास:आप पत्रकार भी हैं? खबरीना देवी:मोहल्ला स्तर पर हम सब कुछ हैं। जहाँ पुलिस पहुँचने से पहले पड़ोसी पहुँच जाए और पड़ोसी से पहले खबर मेरे पास—वहाँ पदवी की क्या आवश्यकता? के बी व्यास:कभी आपकी खबर के कारण झगड़ा हुआ? खबरीना देवी:एक-दो बार मामूली गलतफहमी हुई है। के बी व्यास:जैसे? खबरीना देवी:मैंने एक सहेली से कहा—“सुना है तुम्हारी पड़ोसन तुम्हारे बारे में बहुत कुछ कह रही थी।” उसने पूछा—“क्या?” मैंने कहा—“मैं पूरी तरह नहीं सुन पाई।” बस! उसने स्वयं बाकी कहानी तैयार कर ली। शाम तक दोनों में झगड़ा हो गया। के बी व्यास:और आपने क्या किया? खबरीना देवी:मैंने दोनों को समझाया—“बहनों, आपस में मत लड़ो। समाज में प्रेम से रहो।” के बी व्यास:आग भी आपने लगाई और पानी भी आप ले गईं? खबरीना देवी:इसी को सामाजिक सेवा कहते हैं! (स्टूडियो में जोरदार ठहाका…) के बी व्यास:आपको सबसे रोमांचक खबर कौन-सी लगती है? खबरीना देवी:वो खबर जिसमें सामने वाला कहे—“किसी को मत बताना।” जैसे ही ये चार शब्द सुनती हूँ, भीतर का पत्रकार जाग जाता है। के बी व्यास:और अगर कोई कहे—“यह खबर बिल्कुल निजी है”? खबरीना देवी:तब तो उसका महत्व दोगुना हो जाता है। के बी व्यास:आपके घर की बालकनी में कुर्सी हमेशा बाहर क्यों रहती है? खबरीना देवी:उसे कुर्सी मत कहिए, वह हमारा ऑब्जर्वेशन डेस्क है। वहाँ चाय, मोबाइल, चश्मा, सभी कुछ रखा रहता है। के बी व्यास:मान लीजिए सामने वाले घर में नया फर्नीचर आया। आप क्या करेंगी? खबरीना देवी:पहले पता लगाएँगे कि कहाँ से आया। फिर कितना महँगा था। फिर पुराना क्यों बदला। फिर पैसे कहाँ से आए। और शाम तक रिपोर्ट तैयार— “विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि परिवार में बड़े बदलाव के संकेत हैं।” के बी व्यास:सिर्फ सोफा बदलने से बड़े बदलाव हो जाते हैं? खबरीना देवी:हर बड़े बदलाव की शुरुआत सोफे से भी हो सकती है! के बी व्यास:अगर मोहल्ले में एक दिन कोई खबर न हो तो? खबरीना देवी:ऐसा कभी नहीं होता। जहाँ चार मनुष्य रहेंगे, वहाँ कम-से-कम सात खबरें अवश्य होंगी। और सच में कुछ न हो तो हम पूछ लेते हैं—“आज सब इतना शांत क्यों है?” बस, लोग कारण ढूँढ़ना शुरू कर देते हैं और खबर बन जाती है! (तालियाँ…) के बी व्यास:आपका जीवन-मंत्र क्या है? खबरीना देवी:बहुत सीधा है— “जानकारी वही अच्छी, जो सिर्फ आपको पता हो… और पाँच मिनट बाद सबको!” के बी व्यास:वाह! अंत में हमारे श्रोताओं को कोई संदेश? खबरीना देवी:हाँ। किसी के बारे में कोई बात सुनें तो तुरंत विश्वास न करें। पहले दो-चार लोगों से पूछें… फिर मुझे फोन करें! मेरे पास पूरी फाइल होगी। के बी व्यास:आपका नंबर भी बता दें? खबरीना देवी:उसकी जरूरत नहीं। जिसके पास मेरा नंबर नहीं, उसकी खबर मेरे पास पहले ही पहुँच चुकी होगी! के बी व्यास:बहुत खूब! वैसे आपको जाते-जाते एक सूचना दे दूँ—हमारे स्टेशन की कैंटीन में आज समोसे आए हैं। खबरीना देवी:मुझे पता है। के बी व्यास:कैसे? खबरीना देवी:आपके साउंड इंजीनियर ने अभी तीसरा समोसा खाया है और रिसेप्शन वाली मैडम दो पैक करवाकर घर ले जा रही हैं। के बी व्यास:आप यहाँ इंटरव्यू देने आई हैं या स्टेशन की निगरानी करने? खबरीना देवी:पत्रकार कभी ड्यूटी से बाहर नहीं होता! के बी व्यास:और श्रोताओं, हमारी सबसे ताज़ा खबर यह है कि खबरीना देवी को स्टूडियो से विदा करने से पहले हमें अपने सारे कर्मचारियों को सावधान करना पड़ेगा! (जोरदार ठहाके और तालियाँ…) 🎶 ♪♪… खबर… खबर… फुस्स… फुस्स… ♪♪ के बी व्यास:तो श्रोताओं, ये थीं आज की हमारी विशिष्ट मेहमान—खबरीना देवी! इनसे हमने सीखा— खबर रखना अच्छी बात है, लेकिन हर घर की खिड़की को अपना न्यूज़ चैनल समझ लेना पत्रकारिता नहीं, खबरीना-विद्या है! फिर मिलेंगे एक नए किरदार, नई अदा और नए ठहाकों के साथ— ऑन द स्पॉट एफ.एम. 102.4 पर—जहाँ सवाल भी हँसते हैं और जवाब अपनी खबर खुद बना लेते हैं! 🎶 ♪♪… खट्… खट्… फुस्स… फुस्स… खबर… खबर… खबर… ♪♪ |

