Explore

Search

Saturday, August 29, 2026, 10:27 am

Saturday, August 29, 2026, 10:27 am

LATEST NEWS
[wonderplugin_slider id=1]
Lifestyle

गांधी कुष्ठ आश्रम में 23वीं बार मनाया रक्षाबंधन, बहनों से बंधवाया रक्षा सूत्र

सेवा और अपनत्व के साथ मनाया पर्व, राखी बंधवाकर जरूरतमंद बहनों के साथ किया भोजन

राखी पुरोहित. जोधपुर

रक्षाबंधन के पावन अवसर पर हर वर्ष की भांति इस बार भी मसूरिया स्थित गांधी कुष्ठ आश्रम में सेवा, स्नेह और अपनत्व से सराबोर रक्षाबंधन पर्व मनाया गया। आश्रम में रहने वाली बहनों ने उपस्थित लोगों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को आत्मीयता के साथ निभाया। इस अवसर पर लगातार 23वीं बार आश्रम में रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर बहनों से राखी बंधवाई और उनके साथ खुशियां साझा कीं।

राखी बंधवाकर निभाया भाई-बहन का रिश्ता

कार्यक्रम के दौरान आश्रम में रहने वाली बहनों ने पूरे उत्साह और भावनात्मक आत्मीयता के साथ उपस्थित लोगों को रक्षा सूत्र बांधे। राखी बंधवाने वालों में रमेश झामनानी, श्रीमती सुनीता झामनानी (पूर्व पार्षद), जागृति संस्थान के अध्यक्ष राजेश भेरवानी, प्रकाश इसरानी, पप्पु सुखनानी, सुरेश गंगवानी, कैलाश थावानी, सुरेश भागिया सहित अन्य लोग शामिल रहे।बहनों से राखी बंधवाने के बाद उपस्थित लोगों ने उन्हें स्नेह और सम्मान का भाव दिया। रक्षाबंधन के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि भाई-बहन का रिश्ता केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेम, संवेदना और सामाजिक अपनत्व के माध्यम से भी रिश्तों को मजबूत बनाया जा सकता है।

23 वर्षों से सेवा की परंपरा जारी

गांधी कुष्ठ आश्रम में लगातार 23 वर्षों से रक्षाबंधन मनाने की परंपरा अपने आप में सेवा और समर्पण की मिसाल है। हर वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर यहां पहुंचकर बहनों से राखी बंधवाना और उनके साथ पर्व की खुशियां साझा करना इस आयोजन की विशेष पहचान बन चुका है। लंबे समय से चली आ रही इस परंपरा ने आश्रम की बहनों के साथ भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत किया है। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी, सम्मान और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है। समाज के जरूरतमंद और वंचित वर्ग के बीच जाकर त्योहार मनाने से पर्व की खुशियां और अधिक सार्थक हो जाती हैं।

बहनों के साथ भोजन प्रसादी की सेवा

रक्षाबंधन कार्यक्रम के दौरान आश्रम में रहने वाली बहनों के लिए भोजन प्रसादी की सेवा भी की गई। सभी ने मिलकर भोजन प्रसादी ग्रहण की और कुछ समय बहनों के साथ बिताया। सेवा के इस कार्य से कार्यक्रम में आत्मीयता और सामाजिक सरोकार का भाव और गहरा हुआ। आयोजकों और उपस्थित लोगों का कहना था कि त्योहारों की वास्तविक खुशी तभी है, जब समाज के उन लोगों के साथ भी खुशियां बांटी जाएं, जिन्हें अपनेपन और सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता है। गांधी कुष्ठ आश्रम में आयोजित रक्षाबंधन समारोह इसी भावना का प्रतीक रहा।

सेवा के साथ दिया अपनत्व का संदेश

रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक समरसता, सेवा और मानवीय संवेदना का संदेश देने वाला रहा। आश्रम की बहनों ने रक्षा सूत्र बांधकर उपस्थित लोगों को भावनात्मक रूप से परिवार का हिस्सा बनाया, वहीं आगंतुकों ने भी बहनों के साथ समय बिताकर उन्हें सम्मान और अपनत्व का एहसास कराया। 23 वर्षों से जारी यह परंपरा बताती है कि सच्चा रक्षाबंधन केवल कलाई पर बंधे धागे में नहीं, बल्कि उस विश्वास, स्नेह और जिम्मेदारी में है जो इंसान को इंसान से जोड़ता है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor