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Sunday, August 30, 2026, 11:27 am

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Lifestyle

ऑन द स्पॉट एफ.एम. 102.4 पर छठा इंटरव्यू व्हाट्सऐप गुरु का केबी व्यास के साथ

आइडिया एंड क्यूरेटर : केबी व्यास, दुबई

वर्ड्स ऑफ इंटरव्यू : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

प्रजेंट : दिलीप कुमार पुरोहित. राइजिंग भास्कर

 ♪♪… टिंग… टिंग… टिंग… “मैसेज आया… मैसेज आया…” ♪♪

 गुड मॉर्निंग… सुप्रभात… जय श्रीराम… शुभ सोमवार… शुभ मंगलवार…

 ♪♪… ऑन द स्पॉट एफ.एम. 102.4… जहाँ खबर पहुँचने से पहले उसका फॉरवर्ड पहुँच जाता है! ♪♪

(स्टूडियो में तालियों की गड़गड़ाहट…)

के बी व्यास:

नमस्कार सा… राम-राम सा… खम्मा घणी सा!

आप सुन रहे हैं ऑन द स्पॉट एफ.एम. 102.4 और आज हमारे स्टूडियो में पधारे हैं एक ऐसे महान ज्ञानी, जिनके पास दुनिया के हर सवाल का जवाब है—और अगर जवाब नहीं भी हो, तो पाँच मिनट में किसी व्हाट्सऐप ग्रुप से आ ही जाता है!

इन्हें न अखबार पढ़ने की जरूरत है, न टीवी देखने की, न किताब खोलने की। इनके पास है एक ऐसा डिजिटल ज्ञानकोष, जिसमें स्वास्थ्य से लेकर राजनीति तक, इतिहास से लेकर अंतरिक्ष तक और दाँत दर्द से लेकर डॉलर के भाव तक—सबका ज्ञान उपलब्ध है। स्रोत पूछिए तो स्रोत भी उपलब्ध है—“एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक के अनुसार”, “नासा ने कहा है” या “मेरे एक रिश्तेदार पुलिस में हैं”!

जोरदार तालियों से स्वागत कीजिए—

परम पूजनीय, फॉरवर्डाचार्य, स्क्रीनशॉट शिरोमणि, बिना-सत्यापन प्रसारक, व्हाट्सऐप गुरु जी महाराज!

व्हाट्सऐप गुरु:

धन्यवाद… धन्यवाद! और यह इंटरव्यू खत्म होते ही इसे कम से कम दस लोगों को फॉरवर्ड अवश्य कर देना। वरना अगले सात दिनों तक आपका मोबाइल चार्जर केवल एक तरफ से ही काम करेगा—यह बात मुझे अभी-अभी एक नीले टिक वाले विद्वान ने भेजी है!

के बी व्यास:

अरे गुरु जी! आते ही धमकी?

व्हाट्सऐप गुरु:

धमकी नहीं व्यास जी, डिजिटल चेतावनी है। मैसेज के नीचे लिखा था—“सौ प्रतिशत प्रमाणित।”

के बी व्यास:

किसने प्रमाणित किया?

व्हाट्सऐप गुरु:

जिसने भेजा, उसने। और जिसे भेजा गया, उसने आगे भेजकर पुष्टि कर दी। अब इससे लोकतांत्रिक प्रमाण क्या होगा?

के बी व्यास:

गुरु जी, आपको “व्हाट्सऐप गुरु” की उपाधि कब मिली?

व्हाट्सऐप गुरु:

सन्… एक मिनट…

 टिंग!

हाँ, अभी ग्रुप में पूछा है।

(कुछ सेकंड बाद)

मिल गया! मेरे मित्र ने लिखा है—“बहुत पहले।”

तो समझ लीजिए बहुत पहले मिली थी।

के बी व्यास:

वाह! आपकी स्मरण शक्ति भी क्लाउड पर चलती है!

व्हाट्सऐप गुरु:

बिल्कुल। दिमाग में रखने की क्या जरूरत? सब व्हाट्सऐप में पड़ा है—हालाँकि आधा ज्ञान गलत है, एक-चौथाई अधूरा है और बाकी का स्रोत “किसी ने बताया” है।

के बी व्यास:

तो आप जानकारी रखते हैं या केवल संदेशों का गोदाम?

व्हाट्सऐप गुरु:

गोदाम ही समझिए। फर्क इतना है कि गोदाम में माल की जाँच होती है, मेरे ग्रुप में नहीं, क्यों कि मेरी तो व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी बनी हुई है, यहाँ एडमिशन बिना फॉर्म के, डिग्री बिना पढ़ाई के और ज्ञान बिना प्रमाण के मिल जाता है!

के बी व्यास : ओय तेरी तो ? 

व्हाट्स ऐप गुरु :     यहाँ सुबह अफ़वाह आती है, दोपहर तक “वैज्ञानिक तथ्य” बन जाती है! यहाँ प्रोफेसर बनने के लिए PhD नहीं चाहिए बस हर विषय पर बिना पूछे सलाह देने का आत्मविश्वास होना चाहिए!

( जोरदार ठहाका ) 

के बी व्यास:

आपका दिन कैसे शुरू होता है?

व्हाट्सऐप गुरु:

सुबह साढ़े चार बजे आँख खुलती है।

के बी व्यास:

योग करते हैं?

व्हाट्सऐप गुरु:

नहीं, पहले 127 लोगों को “गुड मॉर्निंग” भेजता हूँ।

के बी व्यास:

127?

व्हाट्सऐप गुरु:

हाँ। फूलों के साथ सूरज उगता हुआ, पीछे पहाड़, नीचे झरना और ऊपर लिखा होता है—

“रिश्ते मोतियों जैसे होते हैं, गिर जाएँ तो झुककर उठा लेना।”

के बी व्यास:

और अगर सामने वाला सो रहा हो?

व्हाट्सऐप गुरु:

तो फोन की टिंग सुनकर उठ जाएगा। इस प्रकार मैं समाज में जल्दी उठने की आदत भी डाल रहा हूँ।

के बी व्यास:

यानी आप व्हाट्सऐप गुरु कम, मोबाइल अलार्म ज्यादा हैं!

व्हाट्सऐप गुरु:

और कभी-कभी भावनात्मक प्रदूषण भी। रोज वही फूल, वही सूरज, वही संदेश—बस तारीख बदल जाती है और लोग समझते हैं कि रिश्ते ताज़ा हैं।

के बी व्यास:

सुना है आप स्वास्थ्य संबंधी सलाह भी देते हैं?

व्हाट्सऐप गुरु:

बहुत! मेरे पास हर बीमारी का इलाज है।

के बी व्यास:

डॉक्टर हैं?

व्हाट्सऐप गुरु:

उससे भी आगे हूँ। डॉक्टर एक विषय पढ़ता है, मैं आठ ग्रुप पढ़ता हूँ!

के बी व्यास:

लेकिन डॉक्टर जाँच भी करता है।

व्हाट्सऐप गुरु:

मैं भी करता हूँ—मैसेज के अंत में “आगे जरूर भेजें” लिखा है या नहीं, यह देखता हूँ।

के बी व्यास:

कोई उदाहरण?

व्हाट्सऐप गुरु:

कल ही मैसेज आया—सुबह खाली पेट चार लौंग, दो इलायची, आधा नींबू, सात तुलसी के पत्ते, एक चम्मच हल्दी और दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके गुनगुना पानी पीने से 84 बीमारियाँ दूर होती हैं।

के बी व्यास:

किसने प्रमाणित किया?

व्हाट्सऐप गुरु:

मैसेज के अंत में लिखा था—“आयुर्वेद में बताया गया है।”

के बी व्यास:

कहाँ बताया गया है?

व्हाट्सऐप गुरु:

इतना गहरा सवाल व्हाट्सऐप पर पूछना मना है। वहाँ स्रोत पूछना असहमति माना जाता है और असहमति को तुरंत “देश-विरोधी”, “धर्म-विरोधी” या “ज्ञान-विरोधी” घोषित कर दिया जाता है।

के बी व्यास:

और अगर किसी ने यह नुस्खा अपनाकर नुकसान कर लिया?

व्हाट्सऐप गुरु:

तो नया मैसेज आएगा—“गलत तरीके से लेने पर नुकसान।” जिम्मेदारी हमेशा उपयोगकर्ता की, ज्ञान हमेशा गुरु का!

के बी व्यास:

गुरु जी, कोई खबर फॉरवर्ड करने से पहले उसकी सत्यता जाँचते हैं?

व्हाट्सऐप गुरु:

बिल्कुल!

के बी व्यास:

कैसे?

व्हाट्सऐप गुरु:

अगर मैसेज तीन अलग-अलग ग्रुपों में आ जाए, तो पक्का सच।

के बी व्यास:

और अगर वही आदमी तीनों ग्रुप में भेज रहा हो?

व्हाट्सऐप गुरु:

तो और भी पक्का! आदमी इतना मेहनत कर रहा है, झूठ थोड़े ही भेजेगा!

के बी व्यास:

यानी आपके लिए दोहराव ही प्रमाण है?

व्हाट्सऐप गुरु:

हाँ। एक झूठ अकेला हो तो अफवाह, सौ बार घूम जाए तो “जनता की भावना” और हजार बार पहुँच जाए तो “सबको पता है”!

के बी व्यास:

यही तो फेक न्यूज़ का कारोबार है—पहले संदेश बनता है, फिर स्क्रीनशॉट, फिर वीडियो, फिर “मेरे भरोसेमंद स्रोत” और अंत में सामूहिक विश्वास।

व्हाट्सऐप गुरु:

बिल्कुल। सत्य को जाँच चाहिए, झूठ को केवल नेटवर्क।

के बी व्यास:

कभी आपके कारण कोई गलतफहमी हुई?

व्हाट्सऐप गुरु:

एक-दो मामूली घटनाएँ हुई हैं।

के बी व्यास:

जैसे?

व्हाट्सऐप गुरु:

एक बार मैसेज आया कि सोमवार को शहर के सारे बैंक बंद रहेंगे। मैंने तुरंत 43 ग्रुप में भेज दिया।

के बी व्यास:

फिर?

व्हाट्सऐप गुरु:

लोग रविवार को ही पैसे निकालने दौड़ पड़े।

के बी व्यास:

और सोमवार?

व्हाट्सऐप गुरु:

बैंक खुले थे।

के बी व्यास:

तो आपने माफी माँगी?

व्हाट्सऐप गुरु:

नहीं, मैंने दूसरा मैसेज भेज दिया—

“अभी-अभी बड़ी खबर! जनता के दबाव के कारण बैंक खोल दिए गए।”

के बी व्यास:

वाह गुरु जी! गलती भी आपकी और जीत भी आपकी!

व्हाट्सऐप गुरु:

यही तो डिजिटल प्रबंधन है। पहले भ्रम पैदा करो, फिर उसके समाधान का श्रेय ले लो।

के बी व्यास:

और जिन लोगों ने काम छोड़कर बैंक की लाइन लगाई?

व्हाट्सऐप गुरु:

उन्हें तीसरा मैसेज भेज दिया—“सावधान नागरिक वही है जो हर खबर पर तुरंत प्रतिक्रिया दे।”

के बी व्यास:

आपके परिवार वाले क्या कहते हैं?

व्हाट्सऐप गुरु:

पत्नी कहती हैं, “मोबाइल छोड़ो, सब्जी ले आओ।”

मैं तुरंत उनको मैसेज भेज देता हूँ—

“जो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित होता है, वह जीवन की शांति खो देता है।”

के बी व्यास:

फिर?

व्हाट्सऐप गुरु:

फिर वह एक ऐसा संदेश देती हैं जो लिखित रूप में नहीं होता।

के बी व्यास:

समझ गया। घरेलू नेटवर्क बहुत शक्तिशाली है!

व्हाट्सऐप गुरु:

हाँ, उसमें न फॉरवर्ड की जरूरत है, न स्क्रीनशॉट की। संदेश सीधे चेहरे पर पढ़ा जाता है और तुरंत समझ में भी आ जाता है।

के बी व्यास:

क्या आप हर मैसेज पढ़ते हैं?

व्हाट्सऐप गुरु:

हर एक! मेरे फोन में 63 ग्रुप हैं।

के बी व्यास:

63?

व्हाट्सऐप गुरु:

जी—परिवार ग्रुप, बड़ा परिवार ग्रुप, बहुत बड़ा परिवार ग्रुप, स्कूल वाले मित्र, कॉलेज वाले मित्र, पुराने मित्र, नए मित्र, पड़ोसी, बिल्डिंग, योग, भजन, स्वास्थ्य, राजनीति, समाज सेवा, रेसिपी, जोक्स, निवेश, नौकरी, स्थानीय खबर, राष्ट्रीय खबर और “सिर्फ जरूरी संदेश” नाम का ग्रुप, जिसमें सबसे ज्यादा गैरजरूरी संदेश आते हैं।

के बी व्यास:

इतने ग्रुप संभालते कैसे हैं?

व्हाट्सऐप गुरु:

सरल है। सुबह जो मैसेज पहले ग्रुप में आता है, शाम तक वही बाकी 62 में पहुँचा देता हूँ।

के बी व्यास:

अर्थात आप आदमी नहीं, वितरण केंद्र हैं!

व्हाट्सऐप गुरु:

वितरण केंद्र नहीं, लोकतांत्रिक प्रसार तंत्र। मेरे पास कोई संपादक नहीं, कोई तथ्य-जाँच नहीं, कोई जवाबदेही नहीं—फिर भी हर संदेश जनता तक पहुँचता है।

के बी व्यास:

और अगर संदेश गलत निकले?

व्हाट्सऐप गुरु:

तो कह देंगे—“मैंने तो सिर्फ आगे भेजा था।”

के बी व्यास:

यानी उँगली आपकी, जिम्मेदारी किसी और की!

के बी व्यास:

फेक न्यूज़ से आप कैसे बचते हैं?

व्हाट्सऐप गुरु:

मैं बहुत सावधान रहता हूँ। अगर किसी मैसेज में लाल रंग से लिखा हो—

“यह खबर मीडिया आपको कभी नहीं बताएगा”—

तो मैं तुरंत मान लेता हूँ कि बात बहुत महत्वपूर्ण है।

के बी व्यास:

और यदि लिखा हो “तुरंत शेयर करें”?

व्हाट्सऐप गुरु:

फिर तो पढ़ने का भी समय नहीं लेता। पहले शेयर, बाद में विचार।

के बी व्यास:

यानी आपके यहाँ विचार की गति इंटरनेट से धीमी है!

व्हाट्सऐप गुरु:

विचार करने से संदेह पैदा होता है, संदेह से सवाल और सवाल से स्रोत माँगना पड़ता है। फॉरवर्ड संस्कृति में यह सब असुविधाजनक है।

के बी व्यास:

और यदि संदेश में किसी नेता, अभिनेता या वैज्ञानिक की तस्वीर लगी हो?

व्हाट्सऐप गुरु:

तो वह सत्य के बराबर है। तस्वीर के नीचे नाम लिख दो, आदमी ने जीवन में कभी वह बात न कही हो, फिर भी उसका चेहरा प्रमाणपत्र बन जाता है।

के बी व्यास:

यानी फोटोशॉप नया शास्त्र है और स्क्रीनशॉट उसका धर्मग्रंथ!

व्हाट्सऐप गुरु:

देखिए व्यास जी, ज्ञान बाँटने से बढ़ता है।

के बी व्यास:

पर गलत ज्ञान?

व्हाट्सऐप गुरु:

वह भी बाँटने से इतना बढ़ जाता है कि सही लगने लगता है!

के बी व्यास:

और डर?

व्हाट्सऐप गुरु:

डर तो सबसे तेज फैलता है। “बच्चे गायब हो रहे हैं”, “फल में जहर है”, “कल से इंटरनेट बंद है”—ऐसे संदेशों को तथ्य नहीं, घबराहट चाहिए। लोग जाँच नहीं करते, अपने डर को फॉरवर्ड कर देते हैं।

के बी व्यास:

और नफरत?

व्हाट्सऐप गुरु:

वह तो प्रीमियम पैकेज है। उसमें झूठ, अधूरा वीडियो, पुरानी तस्वीर और उत्तेजक शीर्षक मिलाकर भेजो। फिर लोग खबर नहीं पढ़ते, अपनी पहचान की रक्षा करने निकल पड़ते हैं।

के बी व्यास:

गुरु जी, आपकी यह बात तो सच में खतरनाक रूप से सच्ची लग रही है!

व्हाट्सऐप गुरु:

सच्ची है, इसलिए इसे भी फॉरवर्ड कर दीजिए। लोग सत्य को तभी गंभीरता से लेते हैं जब उसके नीचे लिखा हो—“इसे रोकना मत।”

 टिंग! टिंग! टिंग!

के बी व्यास:

गुरु जी, इंटरव्यू के बीच में लगातार मोबाइल क्यों देख रहे हैं?

व्हाट्सऐप गुरु:

बहुत जरूरी मैसेज आया है।

के बी व्यास:

क्या लिखा है?

व्हाट्सऐप गुरु:

“आज रात 12 बजे से पृथ्वी के बहुत पास से कॉस्मिक किरणें गुजरेंगी। मोबाइल बंद करके फ्रिज में रखें।”

के बी व्यास:

किस संस्था ने कहा?

व्हाट्सऐप गुरु:

NASA।

के बी व्यास:

NASA की वेबसाइट देखी?

व्हाट्सऐप गुरु:

नहीं, लेकिन मैसेज में NASA बड़े अक्षरों में लिखा है। उससे बड़ा प्रमाण क्या होगा?

के बी व्यास:

NASA का आधिकारिक बयान, वैज्ञानिक स्रोत या विश्वसनीय समाचार?

व्हाट्सऐप गुरु:

ये सब बहुत धीमे प्रमाण हैं। बड़े अक्षरों वाला स्क्रीनशॉट तुरंत विश्वास दिलाता है।

के बी व्यास:

फिर मोबाइल फ्रिज में रखेंगे?

व्हाट्सऐप गुरु:

नहीं।

के बी व्यास:

क्यों?

व्हाट्सऐप गुरु:

फ्रिज में जगह नहीं है। पिछले साल के मैसेज के बाद से पत्नी का मोबाइल वहीं रखा है!

(स्टूडियो में जोरदार ठहाका)

के बी व्यास:

गुरु जी, डिजिटल साक्षरता आपके लिए क्या है?

व्हाट्सऐप गुरु:

बहुत सरल है—मोबाइल चलाना आ जाए, इमोजी भेजना आ जाए, वीडियो डाउनलोड हो जाए और फॉरवर्ड बटन मिल जाए।

के बी व्यास:

नहीं गुरु जी। डिजिटल साक्षरता का अर्थ केवल ऐप चलाना नहीं, सूचना को समझना भी है। संदेश किसने बनाया, स्रोत क्या है, तारीख क्या है, तस्वीर पुरानी तो नहीं, वीडियो काट-छाँटकर तो नहीं बनाया गया, दावा किसी विश्वसनीय संस्था ने किया है या नहीं—इन सवालों को पूछना भी डिजिटल कौशल है।

व्हाट्सऐप गुरु:

इतने सवाल पूछेंगे तो फॉरवर्ड कब करेंगे?

के बी व्यास:

शायद देर से करेंगे, लेकिन किसी की जेब, प्रतिष्ठा, स्वास्थ्य या सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने से बचेंगे।

व्हाट्सऐप गुरु:

तो डिजिटल साक्षरता का मतलब है—फॉरवर्ड से पहले ब्रेक लगाना?

के बी व्यास:

हाँ। और कभी-कभी “डिलीट” दबाना भी नागरिक जिम्मेदारी है।

के बी व्यास:

अंत में श्रोताओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?

व्हाट्सऐप गुरु:

यही कि जीवन छोटा है, डेटा सस्ता है और फॉरवर्ड का बटन पास है। जो भी ज्ञान मिले, तुरंत फैलाइए!

के बी व्यास:

नहीं गुरु जी, यहाँ मैं स्पष्ट सुधार करूँगा—

जो भी मैसेज मिले, पहले रुकिए, फिर सोचिए, स्रोत जाँचिए, तारीख और संदर्भ देखिए, और तभी आगे भेजिए। क्योंकि हर चमकती हुई तस्वीर सुविचार नहीं होती, हर वायरल वीडियो नया नहीं होता और हर “ब्रेकिंग न्यूज़” खबर नहीं होती।

व्हाट्सऐप गुरु:

अच्छा… यह बात कहाँ से मिली?

के बी व्यास:

तथ्य-जाँच, आधिकारिक स्रोतों और थोड़ी-सी सामान्य समझ से।

व्हाट्सऐप गुरु:

सामान्य समझ? यह कौन सा ऐप है?

के बी व्यास:

गुरु जी, यही वह ऐप है जिसे आजकल लोग सबसे कम खोलते हैं—और जिसकी बैटरी कभी खत्म नहीं होती!

(पूरा स्टूडियो ठहाकों से गूँज उठता है)

व्हाट्सऐप गुरु:

बहुत बढ़िया! यह लाइन मुझे व्हाट्सऐप कर दीजिए। मैं तुरंत 63 ग्रुप में भेजूँगा—और नीचे लिखूँगा, “एक महान दार्शनिक ने कहा है…”

के बी व्यास:

और उस महान दार्शनिक का नाम?

व्हाट्सऐप गुरु:

वही… “फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स!”

के बी व्यास:

लेकिन इस बार नीचे यह भी लिखिए—“सत्यापन लंबित है।”

व्हाट्सऐप गुरु:

इतना ईमानदार फॉरवर्ड कौन पढ़ेगा?

के बी व्यास:

शायद वही, जो नागरिक भी है और डिजिटल उपयोगकर्ता भी।

 टिंग!

व्हाट्सऐप गुरु:

अरे! अभी नया मैसेज आया है—“जो इस कार्यक्रम को आगे नहीं भेजेगा, उसके फोन की सारी कॉन्टैक्ट लिस्ट मिट जाएगी!”

के बी व्यास:

तो आज पहली बार गुरु जी, आप इसे फॉरवर्ड नहीं करेंगे।

व्हाट्सऐप गुरु:

क्यों?

के बी व्यास:

क्योंकि यह झूठा है।

व्हाट्सऐप गुरु:

आपने जाँच लिया?

के बी व्यास:

हाँ। स्रोत नहीं, तारीख नहीं, प्रमाण नहीं—सिर्फ डर और “तुरंत भेजें” का आदेश।

व्हाट्सऐप गुरु:

तो इसे क्या करें?

के बी व्यास:

डिलीट करें, रिपोर्ट करें और आगे न बढ़ाएँ।

व्हाट्सऐप गुरु:

गुरु का संदेश डिलीट?

के बी व्यास:

गलत संदेश गुरु का नहीं होता—वह सिर्फ आपके फोन में बैठा हुआ अफवाह का किरायेदार होता है।

(स्टूडियो में तालियाँ और ठहाके एक साथ गूँजते हैं।)

के बी व्यास:

श्रोताओं, याद रखिए—फॉरवर्ड बटन छोटा है, लेकिन उसका असर बहुत बड़ा हो सकता है। एक गलत संदेश किसी को डराता है, किसी की प्रतिष्ठा बिगाड़ता है, किसी के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करता है और कभी-कभी समाज में नफरत तक फैला देता है।

इसलिए अगली बार कोई संदेश आए तो तीन सेकंड रुकिए और पाँच सवाल पूछिए—

किसने कहा?

कब कहा?

स्रोत कहाँ है?

क्या यह आधिकारिक या विश्वसनीय जगह पर उपलब्ध है?

और इसे आगे भेजने से किसे नुकसान हो सकता है?

अगर जवाब न मिले, तो आपका सबसे जिम्मेदार फॉरवर्ड है—फॉरवर्ड न करना।

व्हाट्सऐप गुरु:

तो आज से मैं भी बदलूँगा। पहले जाँचूँगा, फिर सोचूँगा, फिर शायद भेजूँगा।

के बी व्यास:

क्रम थोड़ा उलटा है, गुरु जी।

व्हाट्सऐप गुरु:

अच्छा?

के बी व्यास:

पहले रुकिए, फिर सोचिए, स्रोत जाँचिए, संदर्भ समझिए—और अगर बात सही, जरूरी और सुरक्षित हो, तभी साझा कीजिए।

व्हाट्सऐप गुरु:

और अगर बात गलत हो?

के बी व्यास:

तो उसे वहीं रोक दीजिए। अफवाह की सबसे बड़ी हार यही है कि उसे अगला मोबाइल न मिले।

व्हाट्सऐप गुरु:

आज से मेरा नया मंत्र—

“फॉरवर्ड से पहले विचार, संदेश से पहले सत्यापन, और क्लिक से पहले जिम्मेदारी!”

के बी व्यास:

वाह गुरु जी! पहली बार आपने ऐसा संदेश दिया है जिसे सचमुच आगे भेजा जा सकता है—लेकिन स्रोत के साथ!

 ♪♪… टिंग… टिंग… रुकिए… सोचिए… जाँचिए… फिर ही भेजिए… ♪♪

के बी व्यास:

इसी के साथ आज के कार्यक्रम से विदा लेते हैं। फिर मिलेंगे किसी नए, निराले और अद्भुत मेहमान के साथ ऑन द स्पॉट एफ.एम. 102.4 पर—जहाँ सवाल भी हँसते हैं, जवाब स्रोत माँगते हैं और हर वायरल संदेश को पहले सत्यापन की कतार से गुजरना पड़ता है!

याद रखिए—

आपके हाथ में सिर्फ मोबाइल नहीं, सूचना की जिम्मेदारी भी है।

हर फॉरवर्ड आपका डिजिटल हस्ताक्षर है—इसलिए हस्ताक्षर करने से पहले पढ़िए, जाँचिए और सोचिए।

राम-राम सा… खम्मा घणी सा! 

 ♪♪… “मैसेज आया…” नहीं—

“सत्यापन आया… सत्यापन आया…” ♪♪

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor