राष्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त : मेजर ध्यानचंद जी की जयंती पर विशेष
श्रीमती तेज कंवर. जोधपुर
आज पूरा देश हॉकी के जादूगर, भारत के गौरव मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय खेल दिवस मना रहा है। इस अवसर पर हम सभी को ये प्रण लेना होगा कि खेल को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएंगे। खेल क्या है? खेल सिर्फ मैदान में दौड़ना-भागना नहीं है। खेल अनुशासन है, खेल संस्कार है, खेल टीम भावना है। खेल हमें हार कर भी मुस्कुराना और जीत कर भी विनम्र रहना सिखाता है। जो बच्चा रोज खेलता है, वो जीवन में कभी अकेला नहीं पड़ता।
एक वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी के तौर पर मैं रोज देखती हूँ कि बीमारियों की सबसे बड़ी जड़ है निष्क्रिय जीवनशैली।
- हृदय के लिए वरदान : रोज 30-45 मिनट खेलने, तेज चलने या दौड़ने से हमारा हृदय मजबूत होता है। ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है। दिल की बीमारियों का खतरा 50% तक कम हो जाता है।
- मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य के लिए: खेलते समय हमारे शरीर में हैप्पी हॉर्मोन (एंडोर्फिन) निकलता है, जो तनाव, चिंता और डिप्रेशन को दूर करता है। बच्चों की एकाग्रता, याददाश्त बढ़ती है। बुजुर्गों में अल्जाइमर का खतरा कम होता है। एक घंटा मैदान में खेलना, मनोचिकित्सक की कई दवाओं से ज्यादा असरदार है।
- शारीरिक सक्रियता और रोग प्रतिरोधक क्षमता: जो व्यक्ति रोज खेलता है, उसकी इम्यूनिटी बहुत मजबूत होती है। मोटापा नहीं आता, हड्डियाँ मजबूत रहती हैं, शरीर लचीला रहता है। “फिट इंडिया” तभी बनेगा जब हर नागरिक दिन में कम से कम एक घंटा खेल के मैदान में देगा।
मेरी सभी माताओं, बहनों, युवाओं और विद्यार्थियों से अपील है – मोबाइल की स्क्रीन से निकलकर मैदान की मिट्टी से जुड़िए। अपने बच्चों को एक खेल जरूर सिखाइए। यह उनके लिए जीवन भर की सबसे बड़ी दौलत होगी।
आइए, मेजर ध्यानचंद जी को सच्ची श्रद्धांजलि दें – आज से ही रोज एक घंटा खेलने का संकल्प लें।
जय हिंद, जय खेल!
भवदीया
श्रीमती तेज कंवर
वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी, महात्मा गांधी चिकित्सालय, जोधपुर


