अंतरराष्ट्रीय से राज्य स्तर तक पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को किया सम्मानित, पैरा खिलाड़ियों को भी मिला विशेष मंच; खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की पहल
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर जोधपुर में खेल प्रतिभाओं के सम्मान का विशेष आयोजन किया गया। सिद्धार्थ सोशल सर्विसेज एवं वंदे भारत सेवा संस्थान की ओर से शनिवार को चौपासनी रोड स्थित प्राकृतिक चिकित्सालय के सभागार में आयोजित समारोह में शहर के 130 खिलाड़ियों और कोचों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी, विभिन्न खेलों के प्रशिक्षक तथा पैरा खिलाड़ी शामिल रहे।
राष्ट्रीय खेल दिवस प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। केंद्र सरकार भी इस दिन को खेल, फिटनेस और देश के खेल नायकों को सम्मान देने के अवसर के रूप में मनाती है। जोधपुर में आयोजित यह कार्यक्रम इसी भावना को स्थानीय स्तर पर आगे बढ़ाने वाला रहा।
समारोह में खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए आयोजकों ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि अनुशासन, मेहनत, आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण साधन भी है। ऐसे सम्मान समारोह खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ समाज में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के पदक विजेताओं को विशेष सम्मान
आयोजन समिति के अध्यक्ष विनोद सिंघवी के अनुसार समारोह में अलग-अलग खेलों में देश और प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। इनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी भी शामिल रहे। सम्मानित खिलाड़ियों में बॉडी बिल्डिंग के अरशान खान, बैडमिंटन के संस्कार सारस्वत, योगासन के अर्जुन परिहार, जिम्नास्टिक के शुभम कुमार, आयरनमैन संदीप टाक, मुक्केबाजी के एंजल एवं खुर्शीद राणा, शतरंज के अगम सुराणा, योगासन के रितिक विश्नोई, और पावर लिफ्टिंग में मनीषा प्रजापत, कोच नरेंद्र, प्रदीप बारासा, प्रेम सिंह चौहान, कमलेश सिसोदिया, वीरेंद्र सिंह चौहान, राजेंद्र सिंह, यशदीप को सम्मानित किया गया।
इन खिलाड़ियों ने अपने-अपने खेल में लगातार मेहनत कर प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया है। समारोह में उन्हें सम्मानित करना इस बात का संदेश भी है कि खेलों में सफलता हासिल करने के लिए केवल बड़े शहरों या बड़े संस्थानों तक सीमित रहना जरूरी नहीं है। छोटे शहरों से निकलने वाले खिलाड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
राष्ट्रीय पदक विजेताओं का भी बढ़ाया मान
समारोह में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भी सम्मान दिया गया। बैडमिंटन में ऐश्वर्या, वुशू के अलमास अली खान और अर्चना बिश्नोई, जिम्नास्टिक में भारत खन्ना, रोलर स्केटिंग की भूमि राठौड़, उदयवीर सिंह राठौड़, कनक राठौड़ और केनिषा, मलखंभ में चंद्रिका नाथावत, मुक्केबाजी में दक्ष बाघराना, गौरव मांकड़, लोकेश खींची, मुकेश आचार्य, शिवेन, देवांगी सांखला, सॉफ्टबॉल में धवल चौधरी, दीक्षिता कटारिया, क्रिकेट में विक्रांत भाकर व लक्ष्मी, इशिता सीरवी, योगासन में डोली, एकता प्रजापत, गर्व लिंबा व उज्जवल, आरचरी की दुर्गेश्वरी राठौड़, पॉवर लिफ्टिंग में ग्रेशी प्रजापत, वर्षिता परिहार, वियोम जावा, कराटे की हासस्वमी, माअेली बुडानिया, बास्केटबॉल कल्पना शेखावत, वुशू की कामाक्षा आचार्य, कनक कंवर, लक्षिता बाडोलिया, नविता, मयंक सैन, निखिल सैन, पार्थ सैन, पायल भाटी, पायल सारण, प्रिंस आचार्य, प्रिंयाशु दवे, पुष्पेंद्र गुर्जर, योगोशन की लेखिका चौधरी, मेघा विश्नोई, सोनिया आचार्य, त्वाइकांडो की माही को सम्मानित किया।
खेलों की इस विविधता से स्पष्ट है कि जोधपुर में खिलाड़ियों की प्रतिभा केवल क्रिकेट या कुछ लोकप्रिय खेलों तक सीमित नहीं है। बैडमिंटन, जिम्नास्टिक, मुक्केबाजी, योगासन, क्रिकेट, गोल्फ, सॉफ्टबॉल, मलखंभ और अन्य खेलों में भी शहर के युवा अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं।
पैरा खिलाड़ियों को भी मिला सम्मान
इस समारोह की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि पैरा खिलाड़ियों को भी सम्मान के लिए प्रमुखता से शामिल किया गया। पैरा खेलों में प्रतिभा दिखाने वाले खिलाड़ियों को मंच देकर आयोजकों ने समावेशी खेल संस्कृति का संदेश दिया। सम्मानित पैरा खिलाड़ियों में अभिनित राठौड़, अल्बीरा, अंजली, आयुषी राजपुरोहित, भागीरथराम, धर्मेंद्र, डिंपल वैष्णव, दिनेश जाखड़, जिया गमनानी, किरण कंवर, मानी, मोहनसिंह, मूलसिंह, पैपाराम, पूजा, प्रियंका, सुभाष चौधरी, सुमित और वेदांत सिंह सहित अनेक नाम शामिल रहे। पैरा खिलाड़ियों के लिए ऐसे आयोजन विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि इससे उन्हें खेल के मैदान में उनकी उपलब्धियों के लिए सार्वजनिक पहचान मिलती है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पैरा खिलाड़ियों की उपलब्धियां लगातार यह साबित कर रही हैं कि अवसर और उचित प्रशिक्षण मिलने पर प्रतिभा किसी शारीरिक चुनौती की मोहताज नहीं होती।
राज्य स्तर के खिलाड़ियों की भी हुई हौसला अफजाई
समारोह में राजस्थान स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। राज्य स्तर के पदक विजेताओं में अहाना गिरी, अभिषेक सांखला, अंदरिजादास, अक्षित शर्मा, दमन चौधरी, देवेंद्र सांचौरा, दिव्यानी सिंघवी, गौयम विराट, गुंजन भाटी, इरम जहां,डिंपल बारूपाल, कमल किशोर, कनिष्का बाडोलिया, कपिल, कात्यानी त्रिवेदी, खुशिल सिंह, लखन अग्रवाल, लोकंद्र सिंह देवड़ा, निहाल मेहरा, निशा, परम चौधरी, पीनाक पात्रा, गर्विता बाडोलिया, प्रियल चौधरी, प्रिया सिसोदिया, रिफत खान, संगीता, सूरज भान सिंह, तनिष्का, तेजस्वनी, वैष्णवी, वेदिका, विनोद कुमार शर्मा, वृद्धिनी चौधरी, गुड्डी सहित कई प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इस तरह समारोह में खेल की अलग-अलग श्रेणियों और स्तरों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया।
कोचों को सम्मान देना भी बड़ी पहल
किसी खिलाड़ी की सफलता के पीछे उसके परिवार के साथ-साथ प्रशिक्षक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। खिलाड़ी को तकनीकी प्रशिक्षण देने, उसकी कमियों को दूर करने और प्रतियोगिता के लिए मानसिक रूप से तैयार करने में कोच की अहम भूमिका होती है। इसलिए समारोह में खिलाड़ियों के साथ कोचों को भी सम्मानित किया गया। जोधपुर के कुलगुरु प्रो. पवन कुमार शर्मा, अर्जुन पुरस्कार विजेता आरके पुरोहित, सीआईडी के नरपत सिंह जेतावत, एसीपी प्रेम धणदे,, समाजसेवी विनोद चौहान तथा जिला ओलंपिक संघ के अध्यक्ष पूनमसिंह शेखावत समारोह में अतिथि के रूप में मौजूद रहे। आयोजन में खेल जगत से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। सम्मानित होने वाले खिलाड़ियों और कोचों के लिए यह अवसर केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उनकी मेहनत और उपलब्धियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किए जाने का क्षण भी रहा।
सम्मान से बढ़ेगा युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास
खेलों में करियर बनाने वाले युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय तक निरंतर मेहनत करना होती है। कई बार खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद अपेक्षित पहचान हासिल नहीं कर पाते। ऐसे में स्थानीय स्तर पर होने वाले सम्मान समारोह खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाते हैं कि उनकी मेहनत को समाज देख रहा है। जोधपुर जैसे शहरों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण सुविधाओं, खेल मैदानों, प्रशिक्षकों और प्रतियोगिताओं के साथ-साथ सामाजिक प्रोत्साहन भी जरूरी है। खिलाड़ियों को सम्मान मिलने से उनके परिवार और आसपास के अन्य बच्चों को भी खेलों में आगे आने की प्रेरणा मिल सकती है।
खेल केवल पदक तक सीमित नहीं राष्ट्रीय खेल दिवस का मूल संदेश केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है। खेल युवाओं को अनुशासन, समय प्रबंधन, शारीरिक सक्रियता और टीम भावना सिखाते हैं। केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय खेल दिवस को फिटनेस और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के अवसर के रूप में देखती है। जोधपुर में आयोजित कार्यक्रम इसी व्यापक सोच को स्थानीय स्तर पर मजबूती देता नजर आया। 130 खिलाड़ियों और कोचों का एक साथ सम्मान इस बात का संकेत है कि शहर में विभिन्न खेलों में बड़ी संख्या में प्रतिभाएं सक्रिय हैं।
छोटे शहरों से निकल रही बड़ी प्रतिभाएं
जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान को आमतौर पर रेगिस्तानी क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन यहां के युवाओं ने खेलों में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। सीमित संसाधनों के बावजूद अनेक खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच रहे हैं। बैडमिंटन से लेकर मुक्केबाजी, जिम्नास्टिक, योगासन, शतरंज, गोल्फ, पावर लिफ्टिंग और पैरा खेलों तक खिलाड़ियों की मौजूदगी यह बताती है कि खेलों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इन खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं, नियमित प्रतियोगिताएं और आर्थिक सहयोग मिले तो आने वाले समय में जोधपुर और राजस्थान से और अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय टीमों में जगह बना सकते हैं।
सम्मान समारोह से मिला आगे बढ़ने का संदेश
समारोह में सम्मानित खिलाड़ियों के लिए यह आयोजन उनके अब तक के सफर की सराहना के साथ भविष्य के लिए नई जिम्मेदारी का संदेश भी रहा। पदक जीतना किसी खिलाड़ी की यात्रा का अंत नहीं बल्कि अगले लक्ष्य की शुरुआत होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके खिलाड़ियों से लेकर राज्य स्तर पर पदक जीतने वाले युवा खिलाड़ियों तक सभी को एक मंच पर सम्मानित किए जाने से खेलों में समान अवसर और प्रोत्साहन का संदेश गया। वहीं पैरा खिलाड़ियों को सम्मान दिए जाने से यह भी स्पष्ट हुआ कि खेल प्रतिभा किसी सीमा में बंधी नहीं है।
एक मंच पर 130 प्रतिभाएं, जोधपुर के खेल भविष्य की उम्मीद
जोधपुर में राष्ट्रीय खेल दिवस पर आयोजित यह सम्मान समारोह शहर की खेल प्रतिभाओं के लिए उत्साहवर्धक अवसर बनकर सामने आया। 130 खिलाड़ियों और कोचों का सम्मान केवल संख्या नहीं, बल्कि शहर में मौजूद खेल प्रतिभा की व्यापक तस्वीर है। जरूरत इस बात की है कि ऐसे आयोजनों को निरंतरता मिले और सम्मान के साथ खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, संसाधन और प्रतियोगिताओं के अवसर भी उपलब्ध हों। यदि प्रतिभा को सही दिशा और पर्याप्त सुविधाएं मिलती रहें तो जोधपुर के ये खिलाड़ी आने वाले वर्षों में राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया के खेल मंच पर भी अपनी पहचान और मजबूत कर सकते हैं।

