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Thursday, September 3, 2026, 10:41 am

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Lifestyle

जिस परफ्यूम की खुशबू आपको पसंद है, वही बन सकती है परेशानी की वजह!

खुशबूदार परफ्यूम और कॉस्मेटिक्स में मौजूद कुछ रसायनों से एलर्जी, सिरदर्द और त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा; विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की दी सलाह

दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली

परफ्यूम, डियोड्रेंट और बॉडी स्प्रे आज रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। घर से निकलने से पहले कुछ स्प्रे करना लोगों की सामान्य आदत है। अच्छी खुशबू व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाती है और लंबे समय तक शरीर से आने वाली गंध को नियंत्रित करने में भी मदद करती है। लेकिन जिस खुशबू को हम पसंद करते हैं, वह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है।

कुछ लोगों में परफ्यूम और अन्य सुगंधित उत्पादों में मौजूद रसायन त्वचा में जलन, खुजली, लालिमा या एलर्जी जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं। वहीं तेज खुशबू कुछ संवेदनशील लोगों में सिरदर्द, चक्कर, आंखों या नाक में जलन और सांस संबंधी परेशानी को भी बढ़ा सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर परफ्यूम नुकसानदायक है, बल्कि विशेषज्ञों के अनुसार समस्या मुख्य रूप से व्यक्ति की संवेदनशीलता, उत्पाद की संरचना और उसके इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करती है।

परफ्यूम में क्या होता है?

परफ्यूम केवल फूलों या प्राकृतिक सुगंध का मिश्रण नहीं होता। इसमें सुगंध पैदा करने वाले कई अलग-अलग पदार्थों के साथ अल्कोहल, सॉल्वेंट और अन्य घटक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। किसी एक परफ्यूम की खुशबू तैयार करने के लिए अनेक सुगंधित पदार्थों का मिश्रण संभव है।

लेबल पर कई बार इन सभी पदार्थों के नाम अलग-अलग लिखे हुए नहीं मिलते और उन्हें सामूहिक रूप से “Fragrance” या “Parfum” जैसे शब्दों के तहत दर्शाया जा सकता है। यही वजह है कि किसी व्यक्ति को यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि उसमें मौजूद कौन-सा घटक उसके लिए परेशानी पैदा कर रहा है।

त्वचा पर दिखाई दे सकता है असर

परफ्यूम से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में त्वचा की जलन और एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस शामिल हैं। संवेदनशील व्यक्ति में परफ्यूम लगाने के बाद उस जगह पर लालिमा, खुजली, जलन या छोटे-छोटे दाने दिखाई दे सकते हैं।

कभी-कभी समस्या तुरंत सामने आती है, जबकि कुछ मामलों में बार-बार संपर्क के बाद संवेदनशीलता विकसित हो सकती है। गर्दन, कलाई और कानों के पीछे परफ्यूम लगाने की आदत होने के कारण इन जगहों पर प्रतिक्रिया दिखाई दे सकती है।

अगर किसी उत्पाद को लगाने के बाद लगातार त्वचा में जलन या खुजली होती है, तो उसे दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

तेज खुशबू से सिरदर्द क्यों हो सकता है?

कुछ लोग तेज सुगंध के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोगों में परफ्यूम, एयर फ्रेशनर या अन्य सुगंधित उत्पादों के संपर्क में आने के बाद सिरदर्द, मितली या असहजता महसूस हो सकती है। यह प्रतिक्रिया हर व्यक्ति में नहीं होती। इसलिए किसी एक व्यक्ति को जिस परफ्यूम से परेशानी नहीं होती, जरूरी नहीं कि वही उत्पाद दूसरे व्यक्ति के लिए भी आरामदायक हो। विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसी विशेष खुशबू के संपर्क में आने पर बार-बार सिरदर्द या अन्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो उस उत्पाद से दूरी बनाना उचित है।

सांस की समस्या वाले लोगों को अधिक सावधानी

तेज खुशबू कुछ लोगों में श्वसन संबंधी लक्षणों को ट्रिगर कर सकती है। खासतौर पर जिन लोगों को पहले से सांस संबंधी संवेदनशीलता है, उनके लिए बंद कमरे में बहुत अधिक परफ्यूम या बॉडी स्प्रे का इस्तेमाल परेशानी पैदा कर सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सुगंधित उत्पाद सीधे तौर पर हर व्यक्ति में सांस की बीमारी पैदा करते हैं। प्रतिक्रिया व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करती है। इसी कारण सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों, कार्यालयों और बंद कमरों में अत्यधिक तेज खुशबू वाले उत्पादों का इस्तेमाल दूसरों के लिए भी असुविधाजनक हो सकता है।

“नेचुरल” या “ऑर्गेनिक” हमेशा एलर्जी-फ्री नहीं

आज बाजार में कई परफ्यूम और कॉस्मेटिक उत्पादों को “नेचुरल”, “हर्बल” या “ऑर्गेनिक” जैसे शब्दों के साथ बेचा जाता है। लेकिन प्राकृतिक होने का अर्थ यह नहीं है कि उससे एलर्जी नहीं हो सकती। प्राकृतिक आवश्यक तेलों और पौधों से प्राप्त सुगंधित पदार्थ भी कुछ लोगों में त्वचा संबंधी प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं। इसलिए केवल “नेचुरल” लिखा देखकर किसी उत्पाद को पूरी तरह जोखिम-मुक्त मान लेना सही नहीं है।

“Fragrance-free” और “Unscented” में अंतर

कॉस्मेटिक उत्पाद खरीदते समय “Fragrance-free” और “Unscented” जैसे शब्द भी दिखाई दे सकते हैं। दोनों का अर्थ एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। “Fragrance-free” का सामान्य अर्थ है कि उत्पाद में खुशबू देने के लिए fragrance ingredients नहीं जोड़े गए हैं। वहीं “unscented” उत्पाद में ऐसी सामग्री हो सकती है जो मूल गंध को दबाने के लिए इस्तेमाल की गई हो। इसलिए संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए उत्पाद का पूरा लेबल पढ़ना महत्वपूर्ण है।

परफ्यूम कपड़ों पर लगाना बेहतर है या त्वचा पर?

कई लोग मानते हैं कि परफ्यूम सीधे त्वचा पर लगाने के बजाय कपड़ों पर लगाया जाए तो समस्या नहीं होगी। लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। कपड़े पर लगा उत्पाद भी त्वचा के संपर्क में आ सकता है और उसकी खुशबू आसपास की हवा में फैलती है। अगर किसी व्यक्ति को किसी परफ्यूम से एलर्जी या सांस संबंधी परेशानी होती है, तो केवल लगाने की जगह बदलने के बजाय उस उत्पाद से बचना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

कितना परफ्यूम इस्तेमाल करना चाहिए?

परफ्यूम की मात्रा जितनी अधिक होगी, खुशबू उतनी ही तेज होगी—लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ज्यादा इस्तेमाल बेहतर है। बहुत अधिक स्प्रे करने से आसपास मौजूद लोगों को भी असुविधा हो सकती है। विशेषज्ञ सामान्य तौर पर व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार सीमित मात्रा में इस्तेमाल करने और बंद जगह में अत्यधिक स्प्रे से बचने की सलाह देते हैं।

नया परफ्यूम खरीदते समय रखें ये सावधानियां

अगर कोई व्यक्ति पहली बार कोई नया परफ्यूम इस्तेमाल कर रहा है, तो उसे अपनी त्वचा की संवेदनशीलता को ध्यान में रखना चाहिए। खासकर जिन लोगों को पहले किसी कॉस्मेटिक या सुगंधित उत्पाद से प्रतिक्रिया हो चुकी है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। उत्पाद खरीदते समय पैकेजिंग पर दिए गए ingredients और चेतावनियों को पढ़ना उपयोगी हो सकता है। किसी उत्पाद के इस्तेमाल के बाद त्वचा पर असामान्य प्रतिक्रिया दिखाई दे तो उसे रोक देना चाहिए। बार-बार या गंभीर प्रतिक्रिया होने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ या अन्य योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

क्या हर परफ्यूम खतरनाक है?

इस सवाल का जवाब है—नहीं। परफ्यूम का इस्तेमाल करने वाले अधिकांश लोगों को कोई गंभीर समस्या नहीं होती। चिंता का विषय मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जो किसी विशेष ingredient के प्रति संवेदनशील या एलर्जिक हैं। इसलिए परफ्यूम को “खतरनाक उत्पाद” कहना भी सही नहीं होगा। असली जरूरत जागरूकता और सही इस्तेमाल की है।

खुशबू के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

परफ्यूम व्यक्तिगत पसंद का विषय है, लेकिन इसकी खुशबू केवल इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती। सार्वजनिक स्थानों पर तेज सुगंध दूसरे लोगों को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए कम मात्रा में इस्तेमाल करना, बंद कमरों में अत्यधिक स्प्रे से बचना और दूसरों की संवेदनशीलता का ध्यान रखना एक जिम्मेदार आदत हो सकती है। परफ्यूम हमारी व्यक्तिगत पहचान और रोजमर्रा की ग्रूमिंग का हिस्सा हो सकता है, लेकिन हर खुशबू हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होती। कुछ लोगों में सुगंधित उत्पाद त्वचा की एलर्जी, जलन या अन्य संवेदनशीलता पैदा कर सकते हैं, जबकि तेज खुशबू कुछ संवेदनशील व्यक्तियों में सिरदर्द या सांस संबंधी असहजता को बढ़ा सकती है। इसलिए अगली बार अपना पसंदीदा परफ्यूम खरीदते या इस्तेमाल करते समय केवल खुशबू पर ध्यान देने के बजाय उसके लेबल, सामग्री और अपने शरीर की प्रतिक्रिया पर भी ध्यान देना जरूरी है। खुशबू अच्छी हो सकती है, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता करके नहीं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor