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Thursday, September 3, 2026, 10:41 am

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स्कूलों से चलेगा एचपीवी टीकाकरण का विशेष अभियान, छात्राओं को मिलेगी जागरूकता की सीख

अभिभावकों को भी दी जाएगी जानकारी, स्वास्थ्य विभाग के साथ शिक्षा विभाग करेगा समन्वय

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

किशोरियों को ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण से बचाव और टीकाकरण के प्रति जागरूक करने के लिए अब स्कूल स्तर पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत छात्राओं को एचपीवी संक्रमण, टीकाकरण की उपयोगिता और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही अभिभावकों को भी अभियान से जोड़कर उन्हें टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा।

राजस्थान में एचपीवी टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। स्कूलों को जागरूकता गतिविधियों का प्रमुख माध्यम बनाया जाएगा, ताकि पात्र छात्राओं और उनके अभिभावकों तक सही एवं वैज्ञानिक जानकारी पहुंच सके।

छात्राओं को दी जाएगी एचपीवी टीकाकरण की जानकारी

अभियान के दौरान स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें छात्राओं को एचपीवी वायरस, इससे होने वाले संक्रमण तथा बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी। विशेष रूप से यह समझाया जाएगा कि समय पर टीकाकरण भविष्य में एचपीवी से संबंधित बीमारियों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। केंद्र सरकार ने 28 फरवरी 2026 को राजस्थान के अजमेर से 14 वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया था। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर पात्र बालिकाओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत एचपीवी वैक्सीन निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। टीकाकरण स्वैच्छिक है और इसके लिए माता-पिता या अभिभावक की सहमति आवश्यक है।

अभिभावकों को भी बताया जाएगा टीके का महत्व

अभियान में केवल छात्राओं तक जानकारी सीमित नहीं रहेगी। अभिभावकों को भी एचपीवी टीकाकरण के फायदे, सुरक्षा और प्रक्रिया के बारे में बताया जाएगा। इसका उद्देश्य टीके को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी या भ्रम को दूर करना और परिवारों को सही जानकारी उपलब्ध कराना है। स्कूल स्तर पर शिक्षक-अभिभावक बैठकों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से पात्र किशोरियों के माता-पिता से संवाद किया जा सकता है। इससे अभिभावकों को विशेषज्ञों से सवाल पूछने और टीकाकरण से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

क्यों जरूरी है एचपीवी टीकाकरण

एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमावायरस एक सामान्य वायरस है। इसके कुछ प्रकार आगे चलकर कैंसर से जुड़े हो सकते हैं। इनमें सर्वाइकल कैंसर प्रमुख है। इसी वजह से किशोरावस्था में एचपीवी से बचाव के लिए टीकाकरण को महत्वपूर्ण निवारक उपाय माना जाता है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय अभियान का लक्ष्य देशभर में लगभग 1.2 करोड़ 14 वर्षीय पात्र लड़कियों तक एचपीवी टीकाकरण पहुंचाना है। अभियान के दौरान सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में यह टीका नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

स्कूलों और स्वास्थ्य विभाग में बेहतर तालमेल पर जोर

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय जरूरी होगा। स्कूलों के माध्यम से पात्र छात्राओं की पहचान, जागरूकता कार्यक्रम और अभिभावकों से संवाद को गति दी जा सकती है। देश के अन्य जिलों में भी स्कूल स्तर पर इसी तरह की रणनीति अपनाई जा रही है। उदाहरण के तौर पर हमीरपुर में स्वास्थ्य विभाग ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा कर स्कूलों में 14-15 वर्ष की लड़कियों और उनके अभिभावकों को एचपीवी टीकाकरण के प्रति जागरूक करने के लिए शिक्षक-अभिभावक बैठकें आयोजित करने पर जोर दिया है।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है टीका

राष्ट्रीय अभियान के तहत पात्र 14 वर्षीय लड़कियों के लिए एचपीवी टीकाकरण सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध कराया गया है। इनमें आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उप-जिला अस्पताल, जिला अस्पताल और सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शामिल हैं। टीकाकरण से पहले अभिभावक की सहमति आवश्यक है। अभियान के दौरान टीकाकरण के साथ जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि छात्राओं और उनके परिवारों को केवल टीका लगवाने के लिए प्रेरित करने के बजाय उसके उद्देश्य और स्वास्थ्य संबंधी महत्व की भी जानकारी हो।

जागरूकता से बढ़ेगा भरोसा

एचपीवी टीकाकरण को लेकर कई बार सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अधूरी या भ्रामक जानकारियां भी सामने आती हैं। ऐसे में स्कूलों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशिक्षित अधिकारियों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना उपयोगी साबित हो सकता है। इससे छात्राओं और अभिभावकों को विश्वसनीय स्रोत से जानकारी मिलेगी और वे टीकाकरण से जुड़े सवालों का समाधान प्राप्त कर सकेंगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण और जागरूकता को साथ लेकर चलना जरूरी है। स्कूलों के माध्यम से किशोरियों तक पहुंच बनाने से अभियान को व्यापक स्तर पर प्रभावी बनाया जा सकता है। राजस्थान से शुरू हुआ राष्ट्रीय अभियान अब देशभर में किशोरियों के बेहतर स्वास्थ्य और सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में आगे बढ़ रहा है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor