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Tuesday, September 8, 2026, 3:56 pm

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अध्यात्मक का उजास…संवित धाम में श्रीगुरु स्तंभ मंदिर का 14वां वार्षिकोत्सव 15 को

वैदिक मंत्रों से सप्तऋक्षियों का आह्वान कर पूजन होगा

राइजिंग भास्कर. जोधपुर

परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ईश्वरानंद गिरि महाराज द्वारा दईजर-लाछा बासनी में स्थापित संवित धाम आश्रम में स्थित श्रीगुरु स्तंभ मंदिर का 14वां वार्षिकोत्सव भाद्रपद शुक्ल पंचमी तथा ऋषि पंचमी उत्सव मंगलवार, 15 सितंबर को सायं 5 बजे से वैदिक विधि-विधान के साथ आयोजित किया जाएगा।

जोधपुर संवित साधनायन सोसायटी की अध्यक्षा रानी ऊषा देवी के मार्गदर्शन में होने वाले इस धार्मिक आयोजन में स्वामी ईश्वरानंद गिरि महाराज के गुरुदेव परमहंस स्वामी नरसिह्म गिरि महाराज के श्रीविग्रह एवं श्रीपादुका का वैदिक मंत्रों के साथ पूजन, अभिषेक और अर्चना की जाएगी। साथ ही ऋषि पंचमी के अवसर पर सनातन वैदिक परंपरा के ऋषि-मुनियों का आह्वान कर उनका विधिवत पूजन किया जाएगा। वरिष्ठ संवित साधक महेश हर्ष, महेश जोशी, शेखर थानवी, अनिल राघवानी, राघवेंद्र वशिष्ठ, रोहित सोनी एवं नटवर व्यास सहित अन्य साधक सामूहिक रूप से वेदमंत्रों का समवेत स्वर में उच्चारण करते हुए पूजन-अनुष्ठान में सहभागी बनेंगे।

ऋषि परंपरा का स्मरण

जोधपुर संवित साधनायन सोसायटी के उपाध्यक्ष दिनेश चन्द्र सिंघल एवं डॉ. सी. एस. कल्ला ने बताया कि श्रीगुरु स्तंभ मंदिर का वार्षिकोत्सव केवल मंदिर की स्थापना की स्मृति का अवसर नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा और सनातन वैदिक ज्ञान-परंपरा के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का पर्व है। संवित धाम में इसी वैदिक भावना के अनुरूप ऋषि परंपरा के प्रथम गुरु श्रीदक्षिणामूर्ति, ऋषिवर श्रीवसिष्ठ, श्रीवेद व्यास, ऋषि अत्रि, ऋषि कश्यप, ऋषि गौतम, ऋषि भरद्वाज, ऋषि विश्वामित्र, ऋषि पुलस्त्य तथा आद्यगुरु आदि शंकराचार्य सहित अन्य ऋषि-महर्षियों का आह्वान एवं पूजन किया जाएगा।

कुशा मंडल में सप्तऋषियों का आह्वान

जोधपुर संवित साधनायन सोसायटी के ब्रजेश हर्ष एवं रामराज पुरोहित ने बताया कि आयोजन की विशेषता सप्तऋषियों के लिए कुशा मंडल का निर्माण रहेगा। वैदिक मंत्रों द्वारा मंडल में ऋषियों का आवाहन कर पुरुष सूक्त, नील सूक्त आदि वैदिक मंत्रों से पूजन एवं अर्चना की जाएगी। वैदिक परंपरा में कुशा को पवित्रता और यज्ञीय कर्म से जुड़ा महत्वपूर्ण द्रव्य माना गया है। इसी प्रकार पुरुष सूक्त वैदिक उपासना की महत्वपूर्ण स्तुति है, जिसमें विराट पुरुष के माध्यम से सृष्टि की समग्रता और विश्व-व्यवस्था का दार्शनिक निरूपण मिलता है।

हेमाद्रि संकल्प एवं दशविध स्नान के साथ पूजन

पूजन से पूर्व हेमाद्रि संकल्प एवं दशविध स्नान आदि वैदिक विधान संपन्न किए जाएंगे। इसके पश्चात गुरु स्तंभ मंदिर में श्रीगुरु महाराज के श्रीविग्रह एवं श्रीपादुकाओं का अभिषेक, पूजन एवं अर्चन होगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor