मंडलनाथ महादेव मंदिर परिसर में दो दिवसीय आयोजन हुआ, समाज के इतिहास, गोत्र-प्रवर-कुलदेवियों, वंशावलियों और परंपराओं के दस्तावेजीकरण पर विचार-विमर्श
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
ऐतिहासिक मण्डलनाथ महादेव मंदिर परिसर में दो दिवसीय पुष्करणा ब्राह्मण इतिहास संकलन शिविर आयोजित हुआ। जिसमें देशभर से आए इतिहासकारों, शोधकर्ताओं, शोधार्थियों एवं समाज के प्रबुद्धजनों ने समाज के इतिहास, गोत्र-प्रवर, कुलदेवियों, वंशावलियों और परंपराओं के दस्तावेजीकरण पर विचार-विमर्श किया।
शिविर के प्रथम दिन वरिष्ठ इतिहासकार महेश आचार्य फलोदी की अध्यक्षता में समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, गोत्र-प्रवर, गोत्र ऋषियों एवं कुलदेवियों के मूल स्थानों पर चर्चा हुई। महेश आचार्य, योगेश बोहरा, प्रदीप व्यास एवं गोविंद राज पुरोहित ने कुलदेवियों के मूल स्थानों से संबंधित जानकारी साझा की। जिन खांपों एवं देवियों के संबंध में पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उनके तथ्य जुटाने का संकल्प लिया गया।
दूसरे दिन शिलालेखों, पीएचडी शोध, ऐतिहासिक प्रसंगों, थानवी समाज के इतिहास और वंशावलियों पर शोध प्रस्तुतियां हुईं। राकेश व्यास ने शिलालेखों के महत्व, डॉ. कीर्ति कल्ला ने अपने शोध एवं प्राचीन शिलालेखों, डॉ. अरुण आचार्य ने अपनी पीएचडी थीसिस तथा राजा दाहिर सेन के इतिहास पर जानकारी दी। ओम थानवी ने थानवीयों के इतिहास, जबकि गांधीनगर से आए अरुण पुरोहित ने वंशावलियों में मौजूद अंतराल को वैज्ञानिक एवं सामाजिक तरीकों से दूर करने पर विचार रखे। ओम श्रीराम एवं रामाकिशन ने कर्मकांड संबंधी पुस्तक का परिचय दिया, वहीं दिनेश रामदेव ने समाज के लिए समर्पित मोबाइल एप विकसित करने की आवश्यकता बताई। इसके बाद खुले विचार-मंथन सत्र में उपस्थित लोगों ने इतिहास संकलन अभियान को लेकर सुझाव दिए। शिविर के समापन सत्र में योगेश बोहरा ने पुष्करणा समाज की एकीकृत वेबसाइट pushkarnabandhu.com का पीपीटी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वेबसाइट के माध्यम से ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के साथ देश-विदेश में बसे समाज के लोगों को एक मंच पर जोड़ा जा सकेगा।
भविष्य की कार्ययोजना के तहत राम व्यास एवं लक्ष्मीलाल ने आगामी सम्मेलनों की व्यवस्था एवं जिम्मेदारी संभालने की इच्छा जताई। मण्डलनाथ महादेव की जयकार के साथ शिविर का समापन हुआ। शिविर में जोधपुर, फलोदी, बीकानेर, उदयपुर, भीनमाल, किशनगढ़, कलबुरगी (कर्नाटक) एवं गांधीनगर से इतिहासकार और समाज के प्रबुद्धजन शामिल हुए।
शिविर में एस.डी. व्यास, पार्थ जगाणी, पवन पुष्करणा, सुनील पणिया, ललित पुरोहित, जितेन्द्र कुमार बोधा, गिरीश बोहरा, विवेकानंद बिस्सा, ऋषिराज व्यास, आनंद व्यास, एस.बी. मुथा, राधाकिशन व्यास, नवनीत मुथा, राकेश बोहरा, वेदान्त व्यास, निलेश व्यास, मनीष दत्त पुरोहित, दिव्यांशू व्यास, चेतन कुमार वासु एवं राजेश बिस्सा ने भी विचार व्यक्त किए।

