कलम से क्रांति, लहू से जीवन : 118 बार रक्तदान कर चुके डॉ. वशिष्ठ का एक ही संकल्प जीवन की यात्रा में जरूरतमंदों की सेवा करते जाओ, ईश्वर की बनाई दुनिया में हम सब एक-दूसरे के लिए बने
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
कलम के साथ अपने लहू से वो इबारत लिख जाएंगे, कायनात में अपनी एक अमिट छाप छोड़ जाएंगे। जी हां, हम बात कर रहे हैं लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के उस सजग प्रहरी की, जो अपने ज्वलंत संपादकीय लेखों एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है, साथ ही एक निस्वार्थ समाजसेवक के तौर पर अपने कार्यों के लिए पहचाना जाता है। जिसने अपने कार्यों द्वारा पत्रकारिता ही नहीं, बल्कि सूर्यनगरी जोधपुर एवं राजस्थान प्रदेश का नाम रोशन किया है।
जिसने गत वर्ष 2025 में रक्तदान के क्षेत्र में महाराष्ट्र के दिलीप कोठावडे का 105 बार रक्तदान करने का रिकॉर्ड तोड़कर, किसी भी पत्रकार अथवा मीडियाकर्मी द्वारा सर्वाधिक 106 बार रक्तदान करने का रिकॉर्ड बनाया, वो शख्सियत हैं सूर्यनगरी के वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादकीय लेखक डॉ. राकेश वशिष्ठ।
जिनके द्वारा विभिन्न मुद्दों पर लिखे गए आलेख प्रतिदिन देश के अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशित होते हैं। आपने 106 बार रक्तदान के रिकॉर्ड के साथ हर बार अपना ही बनाया रिकॉर्ड तोड़ते हुए, वर्तमान में 118 बार रक्तदान कर चुके हैं और उनके सेवा के जज्बे को उनके इस वाक्य से समझा जा सकता है कि “जब तक ईश्वर स्वस्थ रखेगा, रक्तदान का यह सफर लगातार जारी रहेगा।” रक्तदान का उनका यह सफर युवाओं के लिए एक आदर्श और प्रेरक बना है। आपने अभी तक अनेक गंभीर अवस्था के मरीजों को अपने रक्त से नया जीवनदान दिया है।
आपको बता दें कि डॉ. राकेश वशिष्ठ द्वारा “किसी भी पत्रकार अथवा मीडियाकर्मी द्वारा सर्वाधिक रक्तदान करने” के विश्व रिकॉर्ड के टाइटल्स की डिटेल्स, जो कि विभिन्न प्रतिष्ठित एजेंसियों द्वारा दस्तावेजों और उपलब्ध आंकड़ों की गहन जांच के बाद, रक्तदाता द्वारा निस्वार्थ भाव से किए गए रक्तदान के सम्मान में निःशुल्क जारी किए गए हैं, इस प्रकार हैं:
एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
नेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
वर्ल्ड एक्सीलेंस अवार्ड एंड वर्ल्ड रिकॉर्ड
वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ यूनिवर्स
UN बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
आदि टाइटल जारी किए जा चुके हैं। एवं लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड तथा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में रिकॉर्ड दर्ज करवाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही ऑफिशियल रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा।
डॉ. वशिष्ठ अनेक रक्तदान संस्थाओं में पदाधिकारी भी हैं और निरंतर रक्तदान के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। डॉ. वशिष्ठ को पत्रकारिता, साहित्य-लेखन एवं रक्तदान, देहदान, अंगदान आदि क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से सेवा कार्यों के चलते चार बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एवं अनेकों बार राष्ट्रीय स्तर पर सरकार, प्रशासन एवं अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। अभी हाल ही में DCCBI (दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया) ने डॉ वशिष्ठ को बतौर मीडिया डायरेक्टर नियुक्त किया है आप अनेक प्रतिष्ठित संगठनों में राष्ट्रीय पदाधिकारी के तौर पर कलम और अपने सेवा कार्यों से अपना योगदान दे रहे हैं।
डॉ. वशिष्ठ देहदान-अंगदान के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। आपने वर्ष 2005 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में देहदान-अंगदान हेतु संकल्प लेकर पंजीयन करवाया था। तब से वर्ष 2026 तक आप 568 व्यक्तियों को प्रेरित कर उनका स्वैच्छिक देहदान-अंगदान हेतु पंजीयन करवा चुके हैं और निरंतर एक प्रेरक के तौर पर सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनके अनुसार, मरते समय या (मेडिकली ब्रेन डेड घोषित होने पर) भी यदि हमारे मृत शरीर से किसी मरीज की जान बच जाए, उसे जीवनदान मिल जाए तो इससे बड़ा पुण्य कार्य कोई और नहीं हो सकता।
मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों को शल्य चिकित्सा की बारीकियां, नई-नई तकनीक सीखने और अनेक असाध्य रोगों से बचाव के प्रयोग करने के लिए मृत देह की आवश्यकता होती है, जो कि सिर्फ स्वैच्छिक देहदान द्वारा ही संभव है। आश्चर्यजनक किंतु कटु सत्य है कि भारत में जागरूकता के अभाव में एवं धार्मिक मान्यताओं व भ्रांतियों के चलते देहदान-अंगदान का प्रतिशत अत्यंत कम है, जिसे बढ़ाने के लिए समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है।
रक्तदान के क्षेत्र में आज भी युवा ही नहीं, बल्कि ग्रामीण एवं शहरी पढ़े-लिखे लोग भी रक्तदान करने से डरते हैं। अस्पतालों में करीब से देखा है कि मरीज के सगे परिजन, खास रिश्तेदार भी अपने मरीज के लिए रक्तदान करने से कतराते हैं कि कमजोरी आ जाएगी। मैं उनको बताना चाहता हूं कि रक्तदान करने से किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी नहीं आती, बल्कि रक्तदान करने से आपके शरीर में नए रक्त का निर्माण होता है, जिसकी वजह से आप अनेक आने वाली बीमारियों से बचते हैं और नए रक्त की वजह से शरीर चुस्त और स्वस्थ बनता है। अतः हमें नियमित रूप से रक्तदान करना चाहिए।
रक्तदान मुख्यतः 4 प्रकार से होता है –
- होल ब्लड डोनेशन – 90 दिन के अंतराल से वर्ष में चार बार
- सिंगल प्लेटलेट डोनेशन (SDP) – 7-8 दिन के अंतराल से वर्ष में 24 बार
- प्लाज्मा डोनेशन – 28 दिन के अंतराल से वर्ष में 13 बार
- डबल रेड सेल डोनेशन – 112 दिन के अंतराल से वर्ष में 3 बार
रक्तदान करने के लिए स्वस्थ व्यक्ति की उम्र 18 से 65 वर्ष, वजन 45 किलो से अधिक, हीमोग्लोबिन 12.5 से ऊपर होना चाहिए, जिसने पिछले 24 घंटे में शराब/नशा न किया हो और बुखार न हो। आइए, हम अपने समाज में रक्तदान, देहदान, अंगदान को एक मुहिम के तौर पर लेकर जागरूकता फैलाएं।
जय हिंद 🇮🇳 भारत माता की जय।

