विनायक दिव्यांग सेवा संस्थान के सचिव से राखी पुरोहित की खास बातचीत
राइजिंग भास्कर | जोधपुर
विनायक दिव्यांग सेवा संस्थान का हाल ही में गठन किया गया है। संस्थान का सोसायटी एक्ट के तहत विधिवत रजिस्ट्रेशन करवाया गया है। संस्थान के सचिव भागीरथ जयपाल के साथ राइजिंग भास्कर एडिटर इन चीफ राखी पुरोहित ने विस्तृत बातचीत की। यहां प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश-
प्रश्न 1. विनायक दिव्यांग सेवा संस्थान की शुरुआत करने के पीछे आपकी मुख्य प्रेरणा क्या रही?
भागीरथ जयपाल : मेरा मानना है कि जरूरतमंद दिव्यांग बच्चों को सहारा देना और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर उपलब्ध करवाना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कई बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें परिवार, आर्थिक परिस्थितियों या अन्य कारणों से पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पातीं। ऐसे बच्चों को सहारा देने के उद्देश्य से हमने विनायक दिव्यांग सेवा संस्थान की शुरुआत की। हमारा प्रयास है कि कोई भी जरूरतमंद बच्चा केवल संसाधनों के अभाव में उपेक्षित न रहे। हम चाहते हैं कि इन बच्चों को अपनापन, सुरक्षा और आगे बढ़ने का अवसर मिले।
प्रश्न 2. संस्थान की शुरुआत कब हुई और वर्तमान में यहां कितने बच्चे रह रहे हैं?
भागीरथ जयपाल : संस्थान की शुरुआत लगभग तीन-चार महीने पहले हुई है। वर्तमान में यहां लगभग 10 से 15 दिव्यांग बच्चे रह रहे हैं। संस्था की ओर से बच्चों को रहने, खाने और पीने जैसी बुनियादी सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही हैं। नई संस्था होने के कारण अभी हमारा कार्य शुरुआती चरण में है, लेकिन हमारा संकल्प बड़ा है। हम धीरे-धीरे व्यवस्थाओं को मजबूत करना चाहते हैं, ताकि जरूरतमंद बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और वे सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन आगे बढ़ा सकें।
प्रश्न 3. संस्थान का संचालन किस प्रकार किया जा रहा है? क्या आपको समाज का सहयोग मिल रहा है?
भागीरथ जयपाल : संस्थान का संचालन मुख्य रूप से जनसहयोग, दानदाताओं और भामाशाहों के योगदान से किया जा रहा है। कोई व्यक्ति राशन उपलब्ध करवाता है, तो कोई भवन के किराये में सहयोग देता है। कुछ लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध करवाकर भी सहयोग करते हैं। इस तरह समाज के छोटे-छोटे योगदान मिलकर बच्चों की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मददगार बनते हैं। हम मानते हैं कि सेवा का यह कार्य केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के लोग मिलकर आगे आएं, तो जरूरतमंद बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
प्रश्न 4. एक नई संस्था के रूप में आपको किन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
भागीरथ जयपाल : सबसे बड़ी चुनौती नियमित आर्थिक संसाधनों की उपलब्धता है। बच्चों के भोजन, राशन, भवन के किराये और दूसरी आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए लगातार सहयोग की जरूरत रहती है। संस्था नई है, इसलिए अभी हमारे पास संसाधन सीमित हैं। कभी-कभी रोजमर्रा की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हमारी कोशिश रहती है कि आर्थिक अभाव के कारण किसी बच्चे की आवश्यक सुविधा प्रभावित न हो। इसके लिए हम समाजसेवियों, व्यापारियों, दानदाताओं और भामाशाहों से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं, ताकि संस्थान का काम निरंतर चलता रहे।
प्रश्न 5. संस्थान के पंजीकृत उद्देश्य क्या हैं?
भागीरथ जयपाल : विनायक दिव्यांग सेवा संस्थान के उद्देश्यों में दिव्यांगजनों का कल्याण, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग, शिक्षा एवं प्रशिक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास शामिल हैं। मानसिक दिव्यांगजनों के पुनर्वास तथा जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा और प्रशिक्षण से जुड़े कार्य भी हमारी प्राथमिकताओं में हैं। हमारा उद्देश्य केवल बच्चों को रहने और भोजन की सुविधा देना नहीं है, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करवाना भी है। हम चाहते हैं कि बच्चे अपनी क्षमताओं को पहचानें और जीवन में यथासंभव आत्मनिर्भर बन सकें।
प्रश्न 6. क्या संस्थान भविष्य में बच्चों की शिक्षा और प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान देगा?
भागीरथ जयपाल : निश्चित रूप से, शिक्षा और प्रशिक्षण दिव्यांग बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रत्येक बच्चे की जरूरत और क्षमता अलग होती है। इसलिए आवश्यक है कि उन्हें उनकी परिस्थितियों के अनुरूप अवसर मिलें। संस्थान के पंजीकृत उद्देश्यों में शिक्षा, प्रशिक्षण, जागरूकता और पुनर्वास से जुड़े कार्य शामिल हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि उपलब्ध संसाधनों और जनसहयोग के आधार पर इन क्षेत्रों में काम को आगे बढ़ाया जाए। हम चाहते हैं कि बच्चों को केवल आश्रय तक सीमित न रहना पड़े, बल्कि वे अपनी क्षमता के अनुसार सीख सकें और जीवन में आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त करें।
प्रश्न 7. आप प्रदेश के भामाशाहों और समाजसेवियों से क्या अपील करना चाहेंगे?
भागीरथ जयपाल : मैं प्रदेश के भामाशाहों, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों, दानदाताओं और आमजन से अपील करना चाहता हूं कि वे इस सेवा कार्य में अपनी सामर्थ्य के अनुसार भागीदारी निभाएं। कोई राशन देकर, कोई आर्थिक सहायता देकर, कोई भवन के किराये में सहयोग करके और कोई बच्चों की जरूरत की सामग्री उपलब्ध करवाकर मदद कर सकता है। सहयोग की राशि छोटी हो या बड़ी, उसका महत्व इस बात में है कि उससे किसी जरूरतमंद बच्चे की जरूरत पूरी हो सके। यदि समाज के लोग आगे आएं, तो हम बच्चों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं कर सकते हैं और संस्था के सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा सकते हैं।
प्रश्न 8. जो लोग संस्थान से जुड़ना या सहयोग देना चाहते हैं, वे किस प्रकार संपर्क कर सकते हैं?
भागीरथ जयपाल : इच्छुक व्यक्ति सीधे संस्थान से संपर्क कर सकते हैं। विनायक दिव्यांग सेवा संस्थान का पता 1/60, राजीव गांधी कॉलोनी, पाल लिंक रोड, जोधपुर, राजस्थान है। हमारा निवास एवं सेवा केंद्र जीवन ज्योति हॉस्पिटल के पीछे, सूथला, जोधपुर में स्थित है। सहयोग देने के इच्छुक भामाशाह और दानदाता संस्था के बैंक खाते में भी राशि जमा कर सकते हैं। हम सभी सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। हमारा विश्वास है कि सामूहिक प्रयासों से जरूरतमंद दिव्यांग बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
प्रश्न 9. अंत में, आप विनायक दिव्यांग सेवा संस्थान के माध्यम से समाज को क्या संदेश देना चाहेंगे?
भागीरथ जयपाल : मेरा संदेश यही है कि दिव्यांग बच्चों को दया की नहीं, बल्कि सम्मान, सहयोग और अवसरों की जरूरत है। हमें उनकी क्षमताओं को पहचानना चाहिए और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। विनायक दिव्यांग सेवा संस्थान इसी भावना के साथ काम करना चाहता है। हम अभी शुरुआत के दौर में हैं और हमें समाज के सहयोग की आवश्यकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के अनुसार थोड़ा-सा योगदान दे, तो मिलकर बहुत कुछ किया जा सकता है। हमारा संकल्प है कि जरूरतमंद दिव्यांग बच्चों को सहारा मिले, उनका सम्मान बना रहे और उन्हें बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का अवसर प्राप्त हो।
विनायक दिव्यांग सेवा संस्थान : संपर्क एवं सहयोग विवरण
- अध्यक्ष: गोवर्धन मेघवाल
- सचिव: भागीरथ जयपाल
- उपाध्यक्ष: रेखा देवी
- पंजीकरण क्रमांक: COOP/2026/JODHPUR/501283
- संस्था आधार संख्या (SAN): 8005440021000725
- पता: 1/60, राजीव गांधी कॉलोनी, पाल लिंक रोड, जोधपुर, राजस्थान – 342008
- निवास एवं सेवा केंद्र: जीवन ज्योति हॉस्पिटल के पीछे, सूथला, जोधपुर
बैंक विवरण
- बैंक: पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
- शाखा: चौपासनी रोड, प्रथम पुलिया, जोधपुर
- खाता संख्या: 1019102100001800
- IFSC कोड: PUNB0101910
संपर्क नंबर: 7425937337, 9529227906, 7427885851

