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Thursday, March 12, 2026, 9:31 am

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 “मन, शरीर, प्राण का नवजागरण: योग का आलोकमय पथ”

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को लेकर राइजिंग भास्कर में रोज एक आलेख प्रकाशित किया जायेगा. आज एडिटर इन चीफ राखी पुरोहित का विशेष आलेख
राखी पुरोहित. जोधपुर
मनुष्य के जीवन में संतुलन, शांति और स्वास्थ्य की प्राप्ति सदैव से एक आदर्श रही है। आधुनिक जीवनशैली, मानसिक तनाव और अनियमित दिनचर्या के इस युग में, यदि कोई मार्ग मन, शरीर और प्राण के पुनर्जागरण की ओर ले जाता है, तो वह है – योग। योग न केवल एक व्यायाम पद्धति है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक विज्ञान है, जो मानव जीवन के प्रत्येक पहलू को जाग्रत कर परम चेतना से जोड़ने की प्रक्रिया है।

योग की परिभाषा और मूल अर्थ

‘योग’ शब्द संस्कृत की ‘युज्’ धातु से निकला है, जिसका अर्थ होता है – जुड़ना, समाहित होना या एकता की स्थिति में आना। योग का तात्पर्य है – आत्मा का परमात्मा से मिलन, शरीर का मन से, और मन का श्वास व प्राण से समन्वय।

योग भारतीय मनीषियों द्वारा प्रदत्त वह अमूल्य धरोहर है, जो केवल शरीर की आकृति तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के सभी आयामों को स्पर्श करता है – भौतिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक


मन का नवजागरण: आत्मसंयम से आत्मबोध तक

मनुष्य का मन अत्यंत चंचल, विचारों से भरा हुआ और द्वंद्वों से ग्रसित रहता है। योग का अभ्यास विशेषकर ध्यान (Meditation) और प्रत्याहार के माध्यम से मन को केंद्रित करने का अभ्यास कराता है।

1. ध्यान के माध्यम से चित्त की शुद्धि

ध्यान योग का वह स्तंभ है, जो मन को बाह्य भटकावों से हटाकर आंतरिक यात्रा की ओर प्रेरित करता है। ध्यान के अभ्यास से मन में:

  • एकाग्रता आती है
  • अनावश्यक विचारों की भीड़ कम होती है
  • आत्मनिरीक्षण की प्रवृत्ति बढ़ती है
  • रचनात्मकता और निर्णय क्षमता विकसित होती है

2. प्रज्ञा का विकास

योग मन की स्थिरता को जन्म देता है, जिससे व्यक्ति अपने भीतर की प्रज्ञा (आंतरिक बुद्धि) को पहचानता है। इस अवस्था में व्यक्ति स्वभाव, व्यवहार और सोच में संतुलन प्राप्त करता है।


शरीर का नवजागरण: स्वास्थ्य से सौंदर्य तक

योग एक वैज्ञानिक प्रणाली है, जो शरीर के अंगों, ग्रंथियों और तंत्रों पर प्रभाव डालकर सम्पूर्ण शारीरिक प्रणाली को सशक्त बनाता है।

1. आसनों का प्रभाव

विभिन्न योगासन, शरीर को लचीला, मजबूत और संतुलित बनाते हैं। जैसे:

  • भुजंगासन (सर्प मुद्रा) रीढ़ को स्वस्थ रखता है
  • त्रिकोणासन शरीर के संतुलन और ऊर्जा प्रवाह को बेहतर करता है
  • पवनमुक्तासन पाचन तंत्र को सक्रिय करता है

2. शरीर के अंदरूनी अंगों पर प्रभाव

योग से:

  • रक्त संचार बेहतर होता है
  • पाचन क्रिया सुधरती है
  • ग्रंथियों की स्राव प्रक्रिया संतुलित होती है
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है

3. आसनों से शरीर का सौंदर्य

नियमित योगाभ्यास से शरीर में:

  • तेज और कांति आती है
  • त्वचा में निखार होता है
  • शरीर की आकृति आकर्षक होती है
  • उम्र के प्रभाव धीमे पड़ते हैं

प्राण का नवजागरण: ऊर्जा का प्रस्फुटन

प्राणायाम योग की वह विधा है, जो जीवन की सूक्ष्म ऊर्जा – प्राण – को संतुलित और नियंत्रित करती है। प्राणायाम से शरीर और मन के बीच एक पुल बनता है, जिससे संपूर्ण अस्तित्व ऊर्जावान बनता है।

1. प्राण का महत्व

प्राण वह शक्ति है, जिससे शरीर में जीवन का संचार होता है। यह केवल श्वास नहीं, बल्कि जीवनशक्ति (Vital Force) है। जब यह प्राण बाधित होता है, तब:

  • रोग जन्म लेते हैं
  • मानसिक उदासी बढ़ती है
  • ऊर्जा में गिरावट आती है

2. प्राणायाम की विधियाँ

  • अनुलोम-विलोम: नाड़ियों का शुद्धिकरण करता है
  • भस्त्रिका: शरीर को ऊर्जावान बनाता है
  • कपालभाति: मस्तिष्क को जाग्रत करता है
  • ब्रह्मरी: तनाव और चिंता को कम करता है

3. प्राण जागरण के लाभ

  • मानसिक स्पष्टता बढ़ती है
  • ध्यान की गुणवत्ता सुधरती है
  • आत्मबल में वृद्धि होती है
  • चेतना उच्च स्तर पर कार्य करती है

योग: एक समग्र चिकित्सा पद्धति

योग चिकित्सा की दृष्टि से भी कारगर है। यह अनेक शारीरिक एवं मानसिक रोगों में आश्चर्यजनक लाभ देता है, जैसे:

रोग योग से लाभ
डायबिटीज मंडूकासन, प्राणायाम से शुगर नियंत्रण में
उच्च रक्तचाप शवासन, नाड़ी शोधन प्राणायाम से लाभ
अवसाद ध्यान, ब्रह्मरी प्राणायाम से राहत
थायरॉयड सर्वांगासन और मत्स्यासन उपयोगी

योग के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नयन

योग केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आत्मा की यात्रा को भी सशक्त करता है। राजयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग और कर्मयोग के माध्यम से व्यक्ति:

  • आत्मा का बोध करता है
  • मोह, माया, अहंकार से ऊपर उठता है
  • संसार के कर्तव्यों को निष्काम भाव से निभाता है
  • जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति की ओर अग्रसर होता है

वर्तमान युग में योग की प्रासंगिकता

21वीं सदी के भागदौड़ भरे जीवन में योग:

  • मानसिक तनाव का समाधान है
  • आधुनिक बीमारियों का उपचार है
  • युवाओं के लिए अनुशासन का मार्ग है
  • वृद्धजनों के लिए स्वास्थ्य रक्षा की कुंजी है
  • बच्चों के लिए एकाग्रता और अनुशासन का साधन है

आंकड़े बताते हैं कि

  • नियमित योग करने वाले लोगों में 70% तक तनाव के स्तर में कमी आती है
  • योग करने वाले छात्रों की एकाग्रता और स्मृति शक्ति में वृद्धि देखी गई है

सरकार और वैश्विक मंच पर योग का प्रचार

भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयासों से 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। यह केवल भारत ही नहीं, विश्व के 170+ देशों में योग की स्वीकार्यता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में कहा:
“योग भारत की प्राचीन परंपरा है। यह मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन बनाता है।”


योग: जीवनशैली नहीं, जीवन दर्शन

योग केवल सुबह का व्यायाम नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवनशैली और जीवनदृष्टि है जो:

  • सादा जीवन जीना सिखाता है
  • संयम और संतुलन का मार्ग दिखाता है
  • आहार-विहार को संयमित करता है
  • अहिंसा, सत्य, अस्तेय जैसे नैतिक मूल्यों की स्थापना करता है

निष्कर्ष: योग से नवजीवन

योग एक जागरण है – मन का, शरीर का और प्राण का। यह न केवल रोगों से मुक्ति देता है, बल्कि एक नई चेतना, एक नई ऊर्जा और एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है। योग से जीवन में स्थिरता, संतुलन और सौंदर्य आता है। योग वह दीप है जो जीवन के अंधकार को हरता है और आत्मा में प्रकाश भरता है।


बॉक्स: योग के आठ अंग (अष्टांग योग)

क्रम अंग विवरण
1 यम नैतिक अनुशासन (अहिंसा, सत्य आदि)
2 नियम व्यक्तिगत अनुशासन (शौच, संतोष आदि)
3 आसन शारीरिक मुद्राएँ
4 प्राणायाम श्वास का नियंत्रण
5 प्रत्याहार इंद्रियों का संयम
6 धारणा एकाग्रता
7 ध्यान ध्यानावस्था
8 समाधि आत्मा से परमात्मा का मिलन

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor