कार्यक्रम की शुरुआत नुक्कड़ नाटक “मन का बोझ” से हुई, जिसका निर्देशन क्रिंजल गहलोत और सोनल ने किया। नाटक ने इस संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया कि “मानसिक स्वास्थ्य उतना ही ज़रूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।”
राइजिंग भास्कर. जोधपुर
न्यू कैंपस के मनोविज्ञान विभाग ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर) के अवसर पर प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया। विभागाध्यक्ष डॉ. हेमलता जोशी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने छात्रों के भीतर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति नई ऊर्जा और जागरूकता का संचार किया। कार्यक्रम की शुरुआत नुक्कड़ नाटक “मन का बोझ” से हुई, जिसका निर्देशन क्रिंजल गहलोत और सोनल ने किया। नाटक ने इस संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया कि “मानसिक स्वास्थ्य उतना ही ज़रूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।”
विद्यार्थियों ने समाज में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और इससे जुड़ी भ्रांतियों पर विचारोत्तेजक प्रस्तुति दी। इसके बाद आयोजित हुआ ओपन माइक सत्र, जहां छात्रों ने कविताओं, कहानियों, स्टैंड-अप और मोनोलॉग्स के माध्यम से अपने मन की बात खुलकर कही। इस मंच ने युवाओं को अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने का शानदार अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन ग्रुप मेडिटेशन सत्र से हुआ, जो गगनप्रीत (आत्मन हीलिंग स्टूडियो) के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। इस सत्र ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को आत्मिक शांति और मानसिक संतुलन का अनुभव कराया। प्रोफेसर हेमलता जोशी ने छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति ऐसी ऊर्जा और जागरूकता समाज को सकारात्मक दिशा में अग्रसर करती है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से अपनी मानसिक सेहत का हमेशा ध्यान रखने और जीवन में संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया। मानसिक स्वास्थ्य सहायता: विशेषज्ञों और ऑनलाइन संसाधनों की जानकारीकार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन, स्थानीय काउंसलर और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बारे में भी जानकारी दी गई।










