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Sunday, August 23, 2026, 10:07 am

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Lifestyle

रक्त से राष्ट्र तक: इंसानियत की मिसाल बने रफीक कारवां

हेल्पिंग हैंड्स संस्था के संस्थापक रफीक कारवां से विशेष बातचीत

एक हादसे से जन्मी सेवा की लौ

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

कभी-कभी जीवन का सबसे गहरा अंधेरा ही सेवा का सबसे उज्ज्वल दीप जला देता है। वर्ष 2000 में एक भयानक दुर्घटना में अपने भाई को खोने के बाद रफीक कारवां के जीवन ने एक नया मोड़ लिया। उस क्षण उन्होंने महसूस किया कि यदि समय पर रक्त उपलब्ध होता, तो शायद एक जीवन बच सकता था। यही पीड़ा, यही प्रश्न और यही संकल्प आगे चलकर बना—हेल्पिंग हैंड्स संस्था। जोधपुर के आखलिया चौराहे के पास, प्लॉट नंबर 273 से संचालित यह संस्था आज रक्तदान से लेकर सामाजिक सेवा के अनेक आयामों में सक्रिय है। रफीक कारवां से हुई यह बातचीत केवल एक इंटरव्यू नहीं, बल्कि इंसानियत के प्रति समर्पण की कहानी है।

राइजिंग भास्कर : हेल्पिंग हैंड्स संस्था की स्थापना के पीछे आपकी प्रेरणा क्या रही?

रफीक कारवां: मेरे लिए यह संस्था कोई सामाजिक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि मेरे भाई की याद और उसका अधूरा जीवन है। जब उसे दुर्घटना के बाद समय पर रक्त नहीं मिला, तब मुझे पहली बार समझ आया कि रक्त की कमी कितनी बड़ी त्रासदी बन सकती है। उसी दिन मैंने ठान लिया कि आगे से किसी की जान सिर्फ खून की कमी से नहीं जाएगी। वर्ष 2000 में इसी भावना से हेल्पिंग हैंड्स अस्तित्व में आई।

राइजिंग भास्कर : रक्तदान को आप इतना महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?

रफीक कारवां: रक्तदान किसी को नया जीवन दे सकता है—इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं। पैसा, दवा, सुविधा—सब बाद में आते हैं, लेकिन खून नहीं मिला तो जीवन रुक जाता है। मैं मानता हूँ कि हर स्वस्थ व्यक्ति को जीवन में नियमित रूप से रक्तदान करना चाहिए। यह न धर्म देखता है, न जाति, न मजहब—सिर्फ इंसानियत देखता है।

हेल्पिंग हैंड्स: सेवा का व्यापक दायरा

हेल्पिंग हैंड्स संस्था केवल रक्तदान तक सीमित नहीं है। संस्था का प्रमुख उद्देश्य है—ज़रूरत के समय ज़रूरतमंद के साथ खड़ा होना। रफीक कारवां बताते हैं कि शिक्षा, चिकित्सा, सामूहिक विवाह, स्वच्छता जागरूकता और राष्ट्रवादी सोच को बढ़ावा देना संस्था की प्राथमिकताओं में शामिल है।

राइजिंग भास्कर : सामाजिक कार्यों में आपकी संस्था किन-किन क्षेत्रों में सक्रिय रही है?

रफीक कारवां: हमने हमेशा जाति और धर्म से ऊपर उठकर काम किया है। ज़रूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग किया, सामूहिक विवाह आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाई। शिक्षा और चिकित्सा सहायता के साथ-साथ युवाओं को राष्ट्रवाद और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करना भी हमारा उद्देश्य रहा है।

स्वच्छ जोधपुर अभियान में उल्लेखनीय भूमिका

हेल्पिंग हैंड्स संस्था ने जिला प्रशासन और नगर निगम जोधपुर के साथ मिलकर स्वच्छ जोधपुर जागरूकता अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और चर्चों के बाहर स्वच्छता संबंधी पेम्फ़लेट बाँटकर लोगों को जागरूक किया गया। घर-घर कचरा संग्रहण को लेकर आम नागरिकों को प्रेरित किया गया।

रफीक कारवां कहते हैं: “स्वच्छता कोई सरकारी काम नहीं, यह नागरिक जिम्मेदारी है। जब तक समाज साथ नहीं देगा, तब तक कोई अभियान सफल नहीं होगा।”

राइजिंग भास्कर : आपके व्यवसाय और सामाजिक सोच का मेल कैसे होता है?

रफीक कारवां: मैं लोहा-इस्पात के व्यवसाय से जुड़ा हूँ और ‘कबाड़ से जुगाड़’ मेरे काम की पहचान है। मेरा मानना है कि रचनात्मकता भी राष्ट्रसेवा का माध्यम हो सकती है। बेकार समझे जाने वाले कबाड़ से उपयोगी और प्रेरणादायक चीजें बनाना—यह भी समाज को कुछ लौटाने का तरीका है।

कबाड़ से जुगाड़ और राष्ट्रभक्ति का संगम

पिछले तीन वर्षों से रफीक कारवां पश्चिमी राजस्थान उद्योग हस्तशिल्प मेले में अपने उत्पादों के साथ सक्रिय सहयोग कर रहे हैं।
2026 के मेले में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम के अंतर्गत उनके द्वारा निर्मित एस-400, ब्रह्मोस, अग्नि और प्रलय मिसाइलों के मॉडल प्रदर्शित किए गए। विशेष आकर्षण बना लड़ाकू विमान राफेल का मॉडल, जिसे देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

राइजिंग भास्कर : इस तरह के मॉडल बनाने के पीछे आपकी सोच क्या है?

रफीक कारवां: यह सिर्फ मॉडल नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सम्मान है। युवा पीढ़ी को यह समझाना जरूरी है कि भारत आत्मनिर्भर है और उसकी रक्षा शक्ति कितनी मजबूत है। अगर कबाड़ से बने ये मॉडल किसी बच्चे में देशभक्ति जगा दें, तो मेरा उद्देश्य पूरा हो जाता है।

सेवा, संवेदना और संकल्प का नाम—रफीक कारवां

रफीक कारवां की कहानी बताती है कि व्यक्तिगत दुःख अगर सेवा में बदल जाए, तो वह समाज के लिए वरदान बन जाता है।
हेल्पिंग हैंड्स संस्था आज केवल एक संस्था नहीं, बल्कि आवश्यकता के समय आगे बढ़ने वाला हाथ है—जो रक्त देता है, जीवन बचाता है और इंसानियत को जिंदा रखता है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor