वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ की आहुति के बीच शिव परिवार की भव्य मूर्ति स्थापना, संत डॉ. रामप्रसाद महाराज ने दिया आशीर्वाद
सुमनेश व्यास. जोधपुर
कबीर नगर स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में रविवार को आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा दिव्य संगम देखने को मिला, जिसने पूरे वातावरण को शिवमय कर दिया। मंदिर परिसर में शिव परिवार की मूर्तियों की विधिवत स्थापना का भव्य धार्मिक आयोजन श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि, यज्ञ की सुगंध और श्रद्धालुओं के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में डूबा रहा। भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय सहित शिव परिवार के विग्रहों की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा एवं स्थापना को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया।
रामस्नेही पूज्य संत डॉ. रामप्रसाद जी महाराज एवं आचार्य शास्त्री मोहित भाई दाधीच के कर-कमलों से शिव परिवार की मूर्तियों की विधिवत स्थापना संपन्न हुई। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना करते हुए परिवार, समाज और क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगल की कामना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति और श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
मंत्रों की गूंज के बीच हुआ पावन यज्ञ
शिव परिवार की मूर्ति स्थापना से पूर्व और उसके क्रम में वैदिक विधि-विधान से यज्ञ का आयोजन किया गया। शास्त्री मोहित भाई दाधीच के आचार्यत्व में मांगीलाल दाधीच, सोम दाधीच, राजेंद्र दाधीच, प्रदीप दाधीच एवं पुशराम के सान्निध्य में यज्ञ संपन्न करवाया गया।
यज्ञशाला में जब वैदिक मंत्रों का उच्चारण प्रारंभ हुआ तो वातावरण में एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति का संचार हो गया। यजमानों ने विधि-विधान के साथ यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं। प्रत्येक आहुति के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का स्मरण किया। यज्ञ के दौरान वातावरण में घी, हवन सामग्री और औषधीय द्रव्यों की सुगंध फैलती रही। वैदिक ऋचाओं और मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिभूत नजर आए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार यज्ञ केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि प्रकृति, देवत्व और मानव जीवन के बीच सामंजस्य स्थापित करने की पवित्र साधना है। अग्नि में आहुति अर्पित करते समय व्यक्ति अपने भीतर के अहंकार, नकारात्मकता और विकारों को भी त्यागने का संकल्प करता है। इसी भावना के साथ श्रद्धालुओं ने शिव परिवार के समक्ष क्षेत्र की खुशहाली और सभी परिवारों के मंगल की प्रार्थना की।
संत डॉ. रामप्रसाद महाराज के आशीर्वचन से धन्य हुआ अवसर
मूर्ति स्थापना के इस पावन अवसर पर रामस्नेही पूज्य संत डॉ. रामप्रसाद महाराज की उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ा दिया। संत महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करते हुए धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
संतों की उपस्थिति किसी भी धार्मिक आयोजन को केवल अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहने देती, बल्कि उसे आध्यात्मिक संदेश का माध्यम बना देती है। शिव परिवार की स्थापना के अवसर पर भी श्रद्धालुओं के लिए यह केवल मंदिर में नई मूर्तियों के विराजमान होने का प्रसंग नहीं रहा, बल्कि जीवन में भगवान शिव के आदर्शों को आत्मसात करने का अवसर बन गया।
भगवान शिव को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में त्याग, तप, करुणा, समत्व और कल्याण का प्रतीक माना गया है। माता पार्वती शक्ति और मातृत्व की प्रतीक हैं, भगवान गणेश बुद्धि एवं शुभारंभ के और कार्तिकेय साहस एवं पराक्रम के प्रतीक माने जाते हैं। इस दृष्टि से शिव परिवार का एक साथ विराजमान होना अपने आप में परिवार और समाज के लिए एक सुंदर आध्यात्मिक संदेश भी प्रस्तुत करता है।
भक्तों के लिए शिव परिवार के दर्शन बने विशेष आकर्षण
मूर्ति स्थापना के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान शिव परिवार के दर्शन किए। भक्तों ने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर अपने परिवार के सुख-शांति और क्षेत्र की समृद्धि के लिए प्रार्थना की। कई श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव के समक्ष अपनी मनोकामनाएं रखीं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य, सुख एवं शांति की कामना की।
मंदिर परिसर में पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा। भगवान शिव के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था और उल्लास स्पष्ट दिखाई दे रहा था। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सहित विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालुओं ने आयोजन में सहभागिता की।
शिव परिवार की स्थापना को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में भी विशेष प्रसन्नता रही। उनका मानना था कि मंदिर में शिव परिवार के विराजमान होने से धार्मिक वातावरण और अधिक सुदृढ़ होगा तथा आने वाले समय में यह स्थान क्षेत्रवासियों के लिए आस्था, साधना और सामूहिक धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा।
भामाशाहों के सहयोग से साकार हुआ पुण्य कार्य
शिव परिवार की मूर्ति स्थापना जैसे पवित्र कार्य में अनेक भामाशाहों और श्रद्धालुओं ने सहयोग प्रदान किया। आयोजन में श्रीमती उषा, धर्मपत्नी श्री दाऊलाल प्रजापत; श्रीमती संतोष, धर्मपत्नी कानाराम प्रजापत; सुरेश, सुपुत्र स्वर्गीय मोहनलाल प्रजापत; विजय, सुपुत्र दाऊलाल प्रजापत; श्रीमती लीला बाई, धर्मपत्नी स्वर्गीय राणीलाल प्रजापत; शंकर, सुपुत्र भंवरलाल प्रजापत; बंशीलाल एवं लक्ष्मण, सुपुत्र नारायण कुचावटिया; श्रीमती सुनीता, धर्मपत्नी देवीलाल प्रजापत; श्यामा सिंह, सुपुत्र जोहरा सिंह; सत्तू, पुत्र स्वर्गीय रामचंद्र प्रजापत सहित बाबा रामदेव पेट्रोल पंप का सहयोग रहा।
धार्मिक कार्यों में समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को जीवंत करती है, जिसमें सामूहिक सहयोग से धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों को गति मिलती है। इस आयोजन में भी सहयोग करने वाले भामाशाहों और श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुरूप योगदान देकर पुण्य कार्य में सहभागिता निभाई।
आयोजकों ने सभी सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि धार्मिक कार्यों की सफलता सामूहिक भावना और सहयोग से ही संभव होती है। मंदिर में शिव परिवार की स्थापना में योगदान देने वाले प्रत्येक व्यक्ति की श्रद्धा इस आयोजन की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बनी।
यजमानों ने विधि-विधान से निभाई धार्मिक जिम्मेदारी
मूर्ति स्थापना एवं यज्ञ के दौरान यजमान के रूप में विजय राज एवं धर्मपत्नी मूमल, शंकर एवं धर्मपत्नी उषा, जितेंद्र एवं धर्मपत्नी हेमलता, जितेंद्र एवं धर्मपत्नी मीनाक्षी, नितेश एवं धर्मपत्नी ट्विंकल, मनोज एवं धर्मपत्नी मोनिका, भावेश एवं धर्मपत्नी रक्षिता तथा किशोर एवं धर्मपत्नी निकिता उपस्थित रहे।
यजमानों ने आचार्यों के निर्देशन में विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की। मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना, संकल्प, हवन और आहुतियों की प्रक्रिया संपन्न हुई। धार्मिक अनुष्ठान में दंपतियों की सहभागिता ने आयोजन को पारिवारिक और सामूहिक स्वरूप प्रदान किया।
यज्ञ के दौरान यजमानों ने भगवान शिव से अपने परिवारों के साथ-साथ समस्त समाज के कल्याण की प्रार्थना की। श्रद्धालुओं ने भी सामूहिक रूप से भगवान शिव का स्मरण करते हुए मंगलकामना की।
शिव परिवार में समाया संपूर्ण जीवन का आध्यात्मिक दर्शन
भगवान शिव का परिवार भारतीय संस्कृति में केवल एक देवी-देवता परिवार का स्वरूप नहीं है, बल्कि इसमें जीवन के अनेक गहरे आध्यात्मिक संदेश समाहित हैं। शिव का स्वरूप हमें सादगी, तप और त्याग की प्रेरणा देता है। माता पार्वती शक्ति, प्रेम और समर्पण की प्रतीक हैं। गणेश जी विवेक, बुद्धि और शुभता का संदेश देते हैं, वहीं कार्तिकेय साहस, अनुशासन और विजय के प्रतीक हैं।
शिव परिवार की स्थापना के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए यह संदेश भी महत्वपूर्ण रहा कि परिवार में अलग-अलग स्वभाव और गुणों के बावजूद प्रेम, सामंजस्य और परस्पर सम्मान बना रहना चाहिए। शिव परिवार का स्वरूप इसी संतुलन और समरसता की प्रेरणा देता है।
आज के बदलते सामाजिक परिवेश में परिवार और सामाजिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। ऐसे में मंदिरों में होने वाले धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर नई पीढ़ी को भारतीय संस्कारों और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम भी बन सकते हैं।
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर बना आस्था का केंद्र
कबीर नगर स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में शिव परिवार की स्थापना के साथ मंदिर की धार्मिक गरिमा और बढ़ गई है। स्थानीय श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर प्रसन्नता रही कि अब उन्हें मंदिर परिसर में शिव परिवार के दर्शन का अवसर मिलेगा।
मंदिर भारतीय जीवन परंपरा में केवल पूजा का स्थान नहीं रहा है। यह सामाजिक संवाद, आध्यात्मिक चिंतन, संस्कार और सामूहिकता का केंद्र भी रहा है। मंदिर परिसर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान लोगों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं और सामूहिक श्रद्धा को मजबूत करते हैं।
शिव परिवार की स्थापना भी इसी धार्मिक और सामाजिक चेतना को आगे बढ़ाने वाली पहल के रूप में सामने आई। श्रद्धालुओं ने उम्मीद जताई कि भविष्य में मंदिर में धार्मिक आयोजन, पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक गतिविधियां निरंतर होती रहेंगी।
भक्तिभाव में डूबा रहा पूरा मंदिर परिसर
मूर्ति स्थापना और यज्ञ के दौरान मंदिर परिसर में ऐसा वातावरण बना रहा, मानो हर ओर शिवत्व की अनुभूति हो रही हो। वैदिक मंत्रों की ध्वनि के साथ श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक रंग प्रदान किया।
श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए उत्साह के साथ मंदिर पहुंचे। किसी ने परिवार की सुख-शांति की कामना की तो किसी ने अपने जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। कई श्रद्धालुओं ने क्षेत्र में शांति, सौहार्द और खुशहाली की मंगलकामना की।
धार्मिक आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि इसमें व्यक्तिगत आस्था के साथ सामूहिक कल्याण की भावना भी दिखाई दी। भगवान शिव के समक्ष की गई प्रार्थनाओं में केवल व्यक्तिगत इच्छाएं ही नहीं, बल्कि समाज और क्षेत्र के मंगल की कामना भी शामिल रही।
‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा कबीर नगर
शिव परिवार की मूर्ति स्थापना के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के जयकारे लगाए। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। भक्ति और आस्था से भरे इस माहौल ने आयोजन को यादगार बना दिया।
श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर केवल धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने का नहीं, बल्कि भगवान शिव की शरण में बैठकर कुछ समय आत्मिक शांति अनुभव करने का भी रहा। आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच ऐसे धार्मिक आयोजन व्यक्ति को भीतर की ओर देखने और अपनी आध्यात्मिक चेतना से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
श्रद्धा से स्थापित विग्रह, अब नियमित दर्शन का अवसर



नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में शिव परिवार की विधिवत स्थापना के बाद अब श्रद्धालुओं को नियमित रूप से शिव परिवार के दर्शन और आराधना का अवसर मिलेगा। मूर्ति स्थापना के इस पावन प्रसंग ने कबीर नगर के धार्मिक वातावरण को नई ऊर्जा दी है।
आयोजन के अंत में श्रद्धालुओं ने संत डॉ. रामप्रसाद महाराज, आचार्य शास्त्री मोहित भाई दाधीच सहित सभी आचार्यों, यजमानों, भामाशाहों और आयोजन से जुड़े सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
शिव परिवार की स्थापना के इस पावन अवसर ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जहां श्रद्धा होती है, वहां साधारण क्षण भी असाधारण आध्यात्मिक अनुभव में बदल जाते हैं। वैदिक मंत्रों, यज्ञ की पवित्र अग्नि, संतों के आशीर्वाद और श्रद्धालुओं की सामूहिक प्रार्थनाओं के बीच नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में शिव परिवार का विराजमान होना कबीर नगर के लिए आस्था का नया अध्याय बन गया।
हर-हर महादेव के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से यही प्रार्थना की कि महादेव सभी के जीवन में शांति, सद्बुद्धि, सुख, समृद्धि और मंगल प्रदान करें तथा कबीर नगर सहित पूरे जोधपुर क्षेत्र पर अपनी कृपा बनाए रखें।


