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Saturday, September 5, 2026, 9:52 am

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जोधपुर संभाग के बांधों की सबसे खराब स्थिति, राजस्थान के बांधों में पिछले साल से 31.7 प्रतिशत कम पानी

693 बांधों में 7,611.67 एमसीएम पानी उपलब्ध, 200 बांध पूरी तरह खाली; कोटा संभाग सबसे बेहतर

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

राजस्थान में बांधों में पानी की स्थिति पिछले साल की तुलना में चिंताजनक बनी हुई है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के आधार पर प्रदेश के 693 बांधों में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में करीब 31.7 प्रतिशत कम जलभराव दर्ज किया गया है। सबसे खराब स्थिति जोधपुर संभाग की है, जबकि कोटा संभाग पानी की उपलब्धता के मामले में प्रदेश में सबसे आगे है।

693 बांधों में 7,611.67 एमसीएम पानी

प्रदेश के 693 बांधों की कुल भराव क्षमता करीब 13,029.09 मिलियन घन मीटर (एमसीएम) है। इनमें वर्तमान में लगभग 7,611.67 एमसीएम पानी उपलब्ध बताया गया है। यह कुल क्षमता का करीब 58.42 प्रतिशत है।
इसके मुकाबले पिछले वर्ष इसी अवधि में बांधों में करीब 85.54 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। यानी इस वर्ष जलभराव में 27.12 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है। यह अंतर प्रदेश में कमजोर जल उपलब्धता की तस्वीर सामने रखता है।

200 बांध पूरी तरह खाली

आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 693 बांधों में से करीब 200 बांध पूरी तरह खाली हैं। वहीं 436 बांध आंशिक रूप से भरे हुए हैं, जबकि केवल 57 बांध पूरी तरह भर पाए हैं। इस स्थिति का असर आने वाले महीनों में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर पड़ सकता है। खासकर जिन जिलों में स्थानीय जल स्रोतों और बांधों पर निर्भरता अधिक है, वहां पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

जोधपुर संभाग में सबसे कम पानी

क्षेत्रवार स्थिति देखें तो जोधपुर संभाग सबसे पीछे है। यहां बांधों में केवल करीब 17.77 प्रतिशत पानी उपलब्ध बताया गया है। पश्चिमी राजस्थान में कम बारिश और जल स्रोतों पर अधिक निर्भरता के कारण यह स्थिति विशेष चिंता का विषय है।
जोधपुर संभाग के कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी का सीधा असर बांधों के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में आगामी रबी सीजन के लिए सिंचाई पानी की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।
हाल के जल संसाधन विभाग के आंकड़े भी जोधपुर जोन में प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम जलभराव की पुष्टि करते हैं। 2 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में भी जोधपुर जोन सबसे नीचे था।

कोटा संभाग में सबसे बेहतर स्थिति

इसके विपरीत कोटा संभाग में बांधों की स्थिति प्रदेश में सबसे अच्छी बनी हुई है। यहां करीब 73.38 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। अन्य क्षेत्रों की स्थिति भी जोधपुर की तुलना में बेहतर है। बांसवाड़ा, जयपुर और उदयपुर क्षेत्र में भी बांधों में पानी मौजूद है, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में जल उपलब्धता कम है।
पिछले साल भी अंतर साफ दिखाई दिया था
राजस्थान के बांधों में इस वर्ष जलभराव की कमी लंबे समय से दिखाई दे रही है। जून के अंत में भी प्रदेश के 693 बांधों में कुल क्षमता का 43.98 प्रतिशत पानी था, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में करीब 49.96 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। उस समय भी जोधपुर जोन सबसे कमजोर स्थिति में था। जुलाई के अंत तक भी पिछले वर्ष की तुलना में बांधों में हजारों एमसीएम कम पानी दर्ज किया गया था।

रबी फसल और पेयजल पर नजर

बांधों में कम जलभराव का सबसे बड़ा असर कृषि और पेयजल प्रबंधन पर पड़ सकता है। रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की मांग बढ़ेगी। ऐसे में बांधों में उपलब्ध पानी का संतुलित उपयोग महत्वपूर्ण होगा।
प्रदेश के प्रमुख बांधों और अन्य जल स्रोतों से होने वाली जलापूर्ति पर भी नजर रखनी होगी। हालिया रिपोर्टों में कमजोर जल उपलब्धता के कारण रबी सिंचाई और पेयजल संकट की आशंका भी जताई गई है।

बारिश पर टिकी उम्मीद

अब किसानों और जल प्रबंधन से जुड़े विभागों की नजर आगामी बारिश और बांधों में होने वाली जल आवक पर है। यदि पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो पहले से कम जलभराव वाले क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कुल मिलाकर, प्रदेश के 693 बांधों का आंकड़ा राजस्थान के सामने जल प्रबंधन की बड़ी चुनौती दिखाता है। 58.42 प्रतिशत जलभराव और पिछले वर्ष की तुलना में 31.7 प्रतिशत कम पानी इस बात का संकेत है कि उपलब्ध जल का सावधानीपूर्वक उपयोग और क्षेत्रवार जल प्रबंधन आने वाले महीनों में बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor