दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
बैंक ऑफ राजस्थान रिटायर्ड स्टाफ सोसायटी, जोधपुर संभाग के जोधपुर चैप्टर के सदस्यों की महत्वपूर्ण बैठक आज 9 सितंबर 2026 को प्रातः 10:00 बजे शांतिप्रिय नगर पार्क स्थित सभागार में संपन्न हुई। बैठक में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित न्यायोचित अधिकारों, विशेषकर पारिवारिक पेंशन एवं आजीवन चिकित्सा सुविधा के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता बैंक ऑफ राजस्थान रिटायर्ड स्टाफ सोसायटी के केंद्रीय नेतृत्व के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण मैढ़ ने की। जोधपुर चैप्टर के सचिव घनश्याम जालान ने उपस्थित सभी सदस्यों एवं अतिथियों का स्वागत किया।
बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण मैढ़ ने कहा कि लगभग 16 वर्ष पूर्व दी बैंक ऑफ राजस्थान लिमिटेड का भारत सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक के आदेश एवं निर्देशों के तहत आइसीआइसीआइ बैंक में विलय हुआ था। विलय के समय जारी आदेशों एवं संबंधित व्यवस्थाओं में यह स्पष्ट भावना एवं प्रावधान था कि बैंक ऑफ राजस्थान के कर्मचारियों एवं अधिकारियों को उनके पूर्व सेवा लाभों की तुलना में किसी भी स्थिति में प्रतिकूल स्थिति में नहीं रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि विलय के समय आइसीआइसीआइ बैंक(ICICI Bank) प्रबंधन की ओर से बैंक ऑफ राजस्थान के कर्मचारियों एवं उनके जीवनसाथियों के लिए जीवनपर्यंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया था। किंतु अत्यंत खेद का विषय है कि विलय के लगभग 16 वर्ष बाद भी इन महत्वपूर्ण विषयों पर आइसीआइसीआइ बैंक प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट एवं संतोषजनक नीति सामने नहीं आई है।
मैढ़ ने कहा कि बैंक ऑफ राजस्थान रिटायर्ड स्टाफ सोसायटी द्वारा समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर तथा लिखित पत्रों के माध्यम से बैंक प्रबंधन के समक्ष अपनी समस्याएं एवं मांगें रखी गई हैं। सोसायटी बैंक प्रबंधन के साथ खुले मन से वार्ता कर सौहार्दपूर्ण एवं न्यायसंगत समाधान के लिए आज भी तैयार है। लेकिन बैंक प्रबंधन की ओर से लगातार दिखाई जा रही उदासीनता के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों में स्वाभाविक रूप से निराशा एवं असंतोष उत्पन्न हो रहा है।
उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बैंक की सेवा में समर्पित कर चुके हैं। अतः उनके वैधानिक एवं न्यायोचित अधिकारों की रक्षा करना केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि उनके सम्मान एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ प्रश्न है।
इस विषय में केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक सार्थक हस्तक्षेप कर आइसीआइसीआइ बैंक प्रबंधन के साथ संवाद स्थापित कर बैंक ऑफ राजस्थान के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के न्यायोचित एवं विधिसम्मत लाभों, विशेषकर पारिवारिक पेंशन एवं चिकित्सा सुविधा, के संबंध में प्रभावी एवं स्थाई समाधान सुनिश्चित करवाने हेतु विनम्र आग्रह किया गया
बैंक ऑफ राजस्थान का गौरवपूर्ण इतिहास
मैढ़ ने कहा कि बैंक ऑफ राजस्थान का इतिहास राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के बैंकिंग क्षेत्र के गौरवपूर्ण इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बैंक की स्थापना 8 मई 1943 को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर भीलवाड़ा में हुई थी। तत्कालीन समय में ही बैंक के नाम में राजस्थान की पहचान को प्रमुखता दी गई थी।
भीलवाड़ा से प्रारंभ हुई यह बैंकिंग संस्था समय के साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों में विस्तारित हुई और लाखों ग्राहकों को अपनी सेवाएं प्रदान करते हुए देश के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बैंक के कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने भी संस्था के विकास में अपना जीवन और सेवाकाल समर्पित किया।ऐसे कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति पश्चात अधिकारों एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों का सम्मानपूर्वक समाधान होना आवश्यक है।
बैठक के दौरान जोधपुर चैप्टर की अध्यक्ष श्रीमती शशि जैन ने समयाभाव के कारण पूर्व में प्राप्त त्यागपत्र को सदन ने सर्वसम्मति से स्वीकार करते हुए उनके द्वारा विगत वर्षों में संगठन एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हित में दी गई उत्कृष्ट सेवाओं के लिए आभार व्यक्त किया।
इसके पश्चात वरिष्ठ साथी रमाकांत शर्मा को सर्वसम्मति से जोधपुर चैप्टर का कार्यकारी अध्यक्ष दायित्व सौंपा गया। शर्मा ने दायित्व स्वीकार करते हुए सभी सदस्यों को साथ लेकर चलने तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हितों के लिए पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण से कार्य करने का आश्वासन दिया।
बैठक में बैंक के वरिष्ठ साथी निर्मल व्यास, सत्यनारायण विजयवर्गीय, पूर्व संयुक्त सचिव नरेंद्र सिंघवी, लखपत टाटिया, रमाकांत शर्मा एवं सुरेंद्र सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
अंत में कार्यकारी अध्यक्ष श्री रमाकांत शर्मा ने सभी उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन एकजुट होकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना प्रयास जारी रखेगा।


