अब 24 घंटे में दर्ज होगी शिकायत, 16 घंटे उपलब्ध रहेंगे कर्मचारी; अपील का निपटारा 15 दिन में करना होगा, लापरवाही पर 20 लाख रुपये तक जुर्माना
नई दिल्ली। देश के करीब 130 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने उपभोक्ता शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत अब टेलीकॉम कंपनियां ग्राहकों की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी। शिकायत दर्ज करने से लेकर उसका समाधान करने और अपील पर निर्णय देने तक की समय-सीमा निर्धारित की गई है। नियमों की अनदेखी करने वाली कंपनियों पर 20 लाख रुपये तक का आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
ग्राहकों को मिली तीन बड़ी राहत
नए प्रावधानों में उपभोक्ताओं के हित में तीन महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
- 24 घंटे में शिकायत दर्ज: मोबाइल कंपनियों के ऐप और अन्य माध्यमों से ग्राहक दिन-रात किसी भी समय शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायत के समाधान से संतुष्ट नहीं होने पर अपील का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
- 16 घंटे उपलब्ध रहेंगे कर्मचारी: कंपनियों को प्रतिदिन कम से कम 16 घंटे प्रशिक्षित कर्मचारियों के माध्यम से ग्राहकों को सहायता उपलब्ध करानी होगी। इससे केवल स्वचालित मशीनों और चैटबॉट के भरोसे रहने वाली व्यवस्था पर निर्भरता कम होगी।
- 15 दिन में अपील का निपटारा: शिकायत के समाधान से असंतुष्ट ग्राहक द्वारा की गई अपील पर अधिकतम 15 दिनों में निर्णय देना होगा।
सिर्फ मशीनों के भरोसे नहीं चलेगा ग्राहक सेवा तंत्र
नए नियमों के अनुसार कंपनियों को शिकायत निवारण व्यवस्था में मानवीय निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। दिव्यांग उपभोक्ताओं के लिए अलग हेल्पलाइन या सहायता केंद्र की व्यवस्था भी करनी होगी। शिकायतों और उनके निस्तारण पर ग्राहकों की प्रतिक्रिया कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और वरिष्ठ प्रबंधन तक पहुंचाने का प्रावधान किया गया है।
लापरवाही पर लगेगा आर्थिक दंड
शिकायत दर्ज नहीं करने, निर्धारित समय में निपटारा नहीं करने अथवा अपील की प्रक्रिया में लापरवाही बरतने पर कंपनियों को आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। नियमों का उद्देश्य टेलीकॉम कंपनियों को जवाबदेह बनाना और उपभोक्ताओं को समयबद्ध समाधान उपलब्ध कराना है।
इन बदलावों से मोबाइल उपभोक्ताओं को खराब नेटवर्क, बिलिंग, रिचार्ज और अन्य दूरसंचार सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही मिलने की उम्मीद है।
