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Wednesday, August 26, 2026, 4:45 am

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पूर्व जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास की पर्यावरण के महत्व पर सामयिक कविता

(पूर्व जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास जोधपुर ही नहीं देश की जानी-मानी हस्ती है। आप राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त होने के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर भी सुशोभित रहे। इन दिनों आप साहित्य और समाज सेवा को समर्पित है। यहां आपकी पर्यावरण प्रेम को समर्पित एक कविता पेश है। 

मां को समर्पित पेड़

दौड़ती इस जिंदगी में
काम मन से नेक करो।
अपनी माँ की याद में
वृक्षारोपण जरूर करो।
उन वृक्षों को सींचकर
धरती पर छाया करो।
हरे भरे वृक्षों से मिलने
घनघोर घटाएँ आएँगी।
सूखी प्यासी धरती पर
अन्न की फसल उगायेगी।
जैसे अपने बच्चों का माँ
लालन पालन करती है,
वृक्ष को बच्चा समझकर
परवरिश तुमको करनी है।
वृक्षों के संग झूम झूमकर
बादल भी पानी बरसाते हैं,
हरी भरी इस वसुन्धरा पर
निर्मल नीर बरसाते जाते हैं।
जीव का जीवन अनमोल है
बिन पानी प्यासा रहता है।
पेडों से शक्ति पाकर बादल
उमड़ घुमड़ के बरसता है।
खलिहानों को सींच सींचकर
खेतों में अनाज भी उगाता है।
आओ हम सब मिलजुल कर
अब दिल से प्रतिज्ञा करते हैं।
पेड को अपना भाई मानकर
हम माँ को समर्पित करते हैं।
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Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor

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