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Wednesday, August 26, 2026, 5:29 am

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रातानाडा शिव मंदिर में ‘नानी बाई का मायरा’ कथा में भक्त हुए भावविभोर

पंकज जांगिड़. जोधपुर

आषाढ़ सुदी गुप्त नवरात्रि के उपलक्ष्य में रातानाडा स्थित शिव मंदिर में रातानाडा महिला एवं भक्त मंडल की ओर से 12 से 15 जुलाई तक ‘नानी बाई का मायरा’ संगीतमय कथा का आज भगवान शंकर, राधाकृष्ण व व्यास पीठ की विधि-विधान से पूजा अर्चना के साथ शुभारंभ हुआ।

कथा वाचक सुश्री दिव्या उज्जैन ने दोपहर 1.30 से शाम 4.30 बजे तक कथा करते हुए प्रथम दिन की कथा में बताया कि ‘नानी बाई का मायरा’ भक्त नरसी की भगवान कृष्ण की भक्ति पर आधारित कथा है। दिव्या ने कहा कि हमारी मातृ भूमि संतों और मंदिरों की भूमि है। यहां पर महात्मा और संतों का जन्म हुआ है। इन्होंने अपने भक्ति भाव से न केवल ईश्वर की प्राप्ति की है बल्कि दूसरों का जीवन भी प्रकाश से भरा है। नरसी मेहता ऐसे ही एक महान भक्त थे। नरसी मेहता को साधुओं की सेवा करने में बड़ा आनन्द आता था उन्हीं साधुओं की सेवा करते करते नरसी जी ने भी सत्संग में भगवान की भक्ति शुरू कर दी। भाभी द्वारा अपमानित करने पर उन्होंने अपने घर का ही त्याग कर दिया तथा वह गिर पर्वत के घने जंगल में कहीं चले गये। वहीं कहीं उन्हें एक शिवालय दिखाई दिया। नरसी जी वहीं रहने लगे और वहीं शिव की आराधना में लीन हो गये। फिर सात दिनों बाद स्वयं भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिये और कहा कि जो तुम्हारी इच्छा हो वो वरदान मांग लो। नरसी मेहता ने वह भक्ति किसी भी प्रकार के फल की कामना में नहीं की थी इसलिये नरसी जी ने कहा जो आपकी इच्छा हो वो मुझे दे दीजिये। उनके इस वचन से प्रसन्न होकर भगवान शिव उन्हें गौलोक ले गये। गौलोक में भगवान कृष्ण गोपियों के संग रासलीला रचा रहे थे। ऐसा मनमोहित दृश्य देखकर नरसी मेहता उसी में खोकर रह गये। वह इस दृष्य को बिना पलकें झपकाए देखते रह गये और भक्ति रस में लीन हो गये। तब ही भगवान कृष्ण ने नरसी जी की ओर देखा और उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान किया और कहा जैसे भक्ति रास में तुम डूबे हो वैसे ही रसपान का आनन्द सारे जगत को कराओ। नरसी जी ने इसे ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया और पृथ्वी पर जगह जगह कृष्ण भजन गाते हुए मग्न रहने लगे।​​

प्रसंग के दौरान मंजू डागा और विकास वैष्णव ने भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी तो भक्त झूमने लगे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor

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