अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दो कविताएं
डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’ हर किरदार में सफल नारी खूब निभाई मैने अपनी जिम्मेदारी। तब जाकर खुश रंग हुई घर की फुलवारी। मन मंदिर में उस दिन गूंजे ढोल नगाड़े। जिस दिन मेरे आंगन में गूंजी किलकारी। एक तमन्ना कब से ही बैठी है जिद्द पर। घर का घर हो बाहर ऊंची चारदीवारी। नर नारायण … Read more