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Tuesday, August 25, 2026, 8:45 am

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दो कविताएं

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’ हर किरदार में सफल नारी खूब निभाई मैने अपनी जिम्मेदारी। तब जाकर खुश रंग हुई घर की फुलवारी। मन मंदिर में उस दिन गूंजे ढोल नगाड़े। जिस दिन मेरे आंगन में गूंजी किलकारी। एक तमन्ना कब से ही बैठी है जिद्द पर। घर का घर हो बाहर ऊंची चारदीवारी। नर नारायण … Read more

बेचारी नहीं है नारी…हर किरदार में सफल है नारी

नारी समाज का मूल आधार है तथा ईश्वर द्वारा समाज को दिया गया खूबसूरत उपहार है। जो समाज में नारी, बहन, मां, पत्नी बेटी का रिश्ता निभाती है। आलेख : डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’ भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति में वर्तमान काल, आधुनिक काल में सुधार हुआ है, लेकिन आज भी महिलाओं को कई … Read more