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Friday, July 10, 2026, 12:26 am

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भगवान कहते हैं—मुझे घनघोर घटा और बारिश में देख

एक दिन मैने यूँ ही माँ से पूछ लिया भगवान को कैसे देख सकते हैं तो माँ बोली- बरसात में उसे देखा जा सकता है, वाकई माँ सच कहती है. ये आलेख एक पड़ताल… डी के पुरोहित. जोधपुर “भगवान कहते हैं, मुझे घनघोर घटा और बारिश में देख”—यह वाक्य केवल एक काव्यात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि … Read more

वरुण, वली, व प्रजापत ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को किया आनंद विभोर

त्रैमासिक त्रिभाषा एकल काव्य पाठ एवं सांखला साहित्य सम्मान समारोह की चौथी कड़ी में ख़ूब रंग जमा। डी के पुरोहित. बीकानेर मां जद भी राखे चूल्हे माथे हांडी/सगळा भाई भेळा हो जांवा आंगणे मांय/बापू राख दी हांडी ने आंगणे मांय। राजस्थानी भाषा के कवि आलोचक डॉ. गौरी शंकर प्रजापत द्वारा प्रस्तुत ‘हांडी’ शीर्षक की इस … Read more