ये कैसा बदलाव…”एक समय था… जब विदाई में आंसू आते थे, अब श्मशान में भी नहीं आते”
21वीं सदी में संवेदनाओं की दहलीज पर आए बदलाव को हम किस तकनीक का नाम देंगे? क्या कभी हम विचार करेंगे कि ये बदलाव हमारी नई पीढ़ी में संस्कारों का क्षरण तो नहीं कर रहा… राइजिंग भास्कर की एडिटर इन चीफ राखी पुरोहित का आलेख एक समय था, जब हम किसी अपने को रेलवे स्टेशन … Read more