7 जुलाई 2024 को दो वीडियो सहित जोधपुर की एक बस्ती की स्विमिंग पूल की हालत और लोगों की परेशानी पर राइजिंग भास्कर ने रिपोर्ट प्रकाशित की थी, इसमें बताया था कि स्विमिंग पूल संचालक कैसे महिलाओं के साथ अंडरवियर में बदतमीजी करता है, मगर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, अब प्रस्तुत है राजस्थान भर की रिपोर्ट-
राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित की विशेष रिपोर्ट
राजस्थान में बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन के बीच स्विमिंग पूल अब केवल अमीरों का शौक नहीं रहे, बल्कि कच्ची बस्तियों, अवैध कॉलोनियों, निजी स्कूलों, निजी क्लबों और एनजीओ तक ने स्विमिंग पूल खोल दिए हैं — वो भी बिना किसी सरकारी अनुमति या सुरक्षा मानकों के पालन के। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि आम नागरिकों की जान को भी जोखिम में डाल रही है। 7 जुलाई 2024 को राइजिंग भास्कर कार्यालय में आकर एक महिला ने शिकायत की कि पाल रोड प्रेक्षा अस्पताल ट्रेक्टर एसोसिएशन क्षेत्र में सरोवर नाम से स्विमिंग पूल खोला गया है। यह स्विमिंग पूल नियम विरुद्ध तो चल ही रहा है साथ ही आबादी क्षेत्र में खुलने से लोगों का जीना हराम हो गया है। कच्ची बस्ती के लोग सिगरेट का कश लगाते और शराब पीकर यहां स्विमिंग करने आते हैं और हुड़दंग मचाते हैं। इससे मोहल्लेवासियों को परेशानी हो रही है, मगर प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इस खबर के साथ राइजिंग भास्कर ने दो वीडियो भी लगाए थे जिसमें स्विमिंग पूल संचालक अंडरवियर में घूम रहा था और महिला के साथ बदतमीजी से बात कर रहा था। इस न्यूज के बाद भी प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की और अभी तक स्विमिंग पूल चल रहा है। बात यहां तक होती तो ठीक थी, मगर ऐसे अनेक स्विमिंग पूल राजस्थान भर में संचालित हो रहे हैं, जो नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
1. नियम क्या कहते हैं, और जमीन पर क्या हो रहा है?
राजस्थान भवन विनियम, जल गुणवत्ता नियंत्रण मानक, और नगर निकाय अधिनियमों के तहत स्विमिंग पूल बनाने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं:
- निर्माण पूर्व स्थानीय नगर निगम से अनुमति (परमिट) लेना आवश्यक है।
- पूल के चारों ओर कम से कम 5 फीट ऊंची बाड़, सेल्फ-लॉकिंग गेट, और पूल अलार्म सिस्टम लगाना अनिवार्य है।
- जल गुणवत्ता के लिए क्लोरीन, ब्रोमीन या ओजोन जैसे कीटाणुनाशकों का उपयोग और नियमित pH स्तर की जांच अनिवार्य है।
लेकिन राजस्थान के कई जिलों—जैसे जोधपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर और अलवर—में यह नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गए हैं।
2. कच्ची बस्तियों में भी खुल गए पूल – ये किसका मॉडल है?
राजधानी जयपुर में ही अनेक कच्ची बस्तियों में स्विमिंग पूल खुल गए हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने आरटीआई के तहत मांगी जानकारी में खुलासा हुआ है कि राजस्थान में 14 से अधिक ऐसे स्वीमिंग पूल है जो कच्ची बस्तियों में खुल गए हैं। न पाइपलाइन की मंजूरी, न निकासी की व्यवस्था, और न कोई सुरक्षा घेरा।
राकेश मीणा ने बताया –
“लोग अपने प्लॉट में 10×20 फीट का गड्ढा खोदकर प्लास्टिक की शीट बिछा रहे हैं। टैंकर से पानी भर लेते हैं। बच्चे वहां नहाते हैं। कभी भी हादसे हो सकते हैं।
3. अवैध कॉलोनियों में ‘पूल क्लब’ का ट्रेंड
राजस्थान भर में कई अवैध कॉलोनियों में पूल क्लब का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। जोधपुर में ही कई अवैध कॉलोनियों में पूल क्लब खुल गए हैं। “पूल पार्टी क्लब” नामक नए कारोबार तेजी से फैल रहे हैं। बिना किसी पंजीकरण और जल परीक्षण के रुपए 50 से रुपए 100 तक की एंट्री फीस लेकर युवाओं को आमंत्रित किया जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता विजयलक्ष्मी कहती हैं:
“रातभर शोर मचता है। शराब और हुक्का भी चलता है। शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। “
4. स्कूलों और एनजीओ में नियम विहीन पूल
कोटा, अजमेर और अलवर में कई प्राइवेट स्कूल और एनजीओ हर साल बच्चों के लिए ‘समर कैम्प’ गतिविधियों में स्विमिंग पूल शामिल कर रहे हैं — बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के। अगर कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। प्रशासन और सरकार स्विमिंग पूल को लेकर सख्त कदम नहीं उठा रही है।
- पूल का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है।
- कोई लाइफगार्ड नियुक्त नहीं होते।
- जल गुणवत्ता की जांच नहीं होती।
लोगों की शिकायत पर FIR भी दर्ज नहीं होती, संस्थानों पर कोई कार्रवाई भी नहीं होती।
5. प्रशासनिक उदासीनता – सब देख रहे हैं, लेकिन कोई सुन नहीं रहा
नगर निगम के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
“हमें प्रतिदिन माह 10-12 शिकायतें मिलती हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई के लिए पुलिस और उच्च अधिकारियों का सहयोग नहीं मिलता। कई बार राजनैतिक दबाव भी होता है।”
जोधपुर नगर निगम की RTI से सामने आया कि बीते दस साल में वैध परमिट जारी किए गए, उसकी तुलना में 75 प्रतिशत अवैध स्विमिंग पूल खुल गए और नियमों की पालना भी नहीं हो रही।
6. हादसों के लिए जिम्मेदार कौन होगा? आखिर सरकार सख्त कार्रवाई क्यों नहीं करती?
एक सामाजिक कार्यकर्ता ने आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार बताया कि पिछले 10 साल में राज्यभर में स्विमिंग पूल से जुड़े कम से कम 10 हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 9 की मौत हुई। ये तो दर्ज मामले हैं, जबकि कई मामले तो सामने ही नहीं आते।
- बीकानेर: यहां भी अनेक अवैध और नियम विरुद्ध स्विमिंग पूल चल रहे हैं।
- उदयपुर: पार्टी पूल के नाम पर नियम विरुद्ध स्विमिंग पूल चल रहे हैं।
- अजमेर: स्कूलों में भी नियम विरुद्ध स्विमिंग पूल चल रहे हैं।
लेकिन इनमें से 80% मामलों में प्रशासन कार्रवाई नहीं करता।
7. विशेषज्ञों की चेतावनी – जल संकट और संक्रमण का खतरा
जल विशेषज्ञों का कहना है :
“राजस्थान पहले ही जल संकट से जूझ रहा है। बिना फिल्टर या पुनःप्रयोग की व्यवस्था के हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।”
वहीं, त्वचा रोग विशेषज्ञ का कहना है:
“गंदे पानी में नहाने से बच्चों में फंगल इन्फेक्शन, आंखों की एलर्जी, और डायरिया जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।”
8. कानून की आंखें बंद, जुर्माने का डर नहीं
राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 133 के तहत अवैध निर्माण पर कार्रवाई हो सकती है। जल गुणवत्ता उल्लंघन पर जुर्माना लगाया जा सकता है। लेकिन इस कानून का पालन कहीं नहीं हो रहा।
- जयपुर नगर निगम ने 2024 में सिर्फ 3 मामलों में जुर्माना लगाया।
- कोटा नगर निगम ने कोई विशेष कार्रवाई ही नहीं की।
9. समाधान क्या हो सकता है?
- राज्य स्तर पर पूल के पंजीकरण के लिए सख्त कानून बनाया जाए। जल गुणवत्ता निगरानी के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया जाए।
- पुलिस और प्रशासनिक निगरानी दल गठित हो। प्रत्येक जिले में “स्विमिंग पूल जांच सेल” बनाई जाए।
- जन जागरूकता अभियान चलाया जाए। बच्चों और माता-पिता को स्विमिंग पूल की सुरक्षा और साफ-सफाई के बारे में शिक्षित किया जाए।
- जल संरक्षण नीति से जोड़ना भी अनिवार्य किया जाए। स्विमिंग पूल को “रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग” से जोड़ना अनिवार्य हो।
10. कानून है, मगर उसका पालन नहीं
राजस्थान जैसे जल-संकटग्रस्त राज्य में स्विमिंग पूल का निर्माण और संचालन बेहद संवेदनशील मुद्दा है। लेकिन जब नियमों को ताक पर रखकर जान जोखिम में डाली जाए और प्रशासन मूकदर्शक बना रहे, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार और लापरवाही नहीं — बल्कि सामाजिक आपराधिकता बन जाती है।
अब सवाल ये है –
क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है? या प्रशासन और समाज मिलकर समय रहते इन अनियमितताओं पर लगाम लगाएगा?




