Explore

Search

Saturday, August 29, 2026, 3:16 am

Saturday, August 29, 2026, 3:16 am

LATEST NEWS
[wonderplugin_slider id=1]
Lifestyle

बहुचर्चित जीडी कल्ला कॉलोनी में ग्रेवल सड़क निर्माण में बड़े खेल का अंदेशा, राजकोष को करोड़ों रुपए का चूना

यह कॉलोनी वैसे भी ज्यादा हाइट में होने के कारण पहले से ही पास में निकलने वाले हाईवे से ऊंची थी मगर फिर भी ठेकेदारों ने सड़को को 4 से 5 फीट फालतू और फ्री की मिट्टी डालकर ऊंचा कर दिया ताकि बिल बड़ा बन सके।

इस छोटी सी कॉलोनी में ग्रेवल सड़कें बनाने के लिए कुल 25 करोड़ 32 लाख रुपए का भुगतान किया गया। वहीं पीडब्ल्यूडी के नॉर्म्स के अनुसार यह सड़कें इसके आधे से भी कम में बनाई जा सकती थी।

आनंद एम. वासु. जैसलमेर

जैसलमेर की बहुचर्चित गोवर्धनदास कल्ला आवासीय कॉलोनी लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई हैं। फिर चाहे आवंटन पर रोक हो या आनन फानन में लॉटरी, लॉटरी में पक्षपात के आरोप हो ना मामला फिर से न्यायालय में जाने की बात हो, मगर इस कॉलोनी का प्लान बनने के बाद से ही यह चर्चाओं में रही हैं। चर्चा हो भी क्यों नहीं इस कॉलोनी को जो नाम दिया गया वो जैसलमेर के गांधी कहे जाते थे और बाबूजी के नाम से जाने जाते थे जो ईमानदारी की जिंदा मिसाल थे, उस महान आत्मा स्वर्गीय गोवर्धनदास कल्ला का नाम दिया कॉलोनी को। मगर नगरपरिषद जैसलमेर उनके नाम पर भी बड़े और काले कारनामे करने से बाज नहीं आई। जिसके चलते इस कॉलोनी पर कई आरोप लगे हैं।

ताजा मामला हैं इस कॉलोनी में ग्रेवल सड़को के निर्माण को लेकर जिसमे जमकर सरकारी पैसों की लूट हुई हैं। पीडब्ल्यूडी के सूत्रों से ज्ञात हुआ हैं कि उक्त सड़के नियमानुसार ना बना के केवल माप बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई हैं। जिससे कि लागत बढ़ सके और ठेकेदार और अधिकारियों का हिस्सा बड़ा हो सके। यह कॉलोनी वैसे भी ज्यादा हाइट में होने के कारण पहले से ही पास में निकलने वाले हाईवे से ऊंची थी मगर फिर भी ठेकेदारों ने सड़को को 4 से 5 फीट फालतू और फ्री की मिट्टी डालकर ऊंचा कर दिया ताकि बिल बड़ा बन सके। क्योंकि कॉलोनी में अभी सीवरेज, पाइपलाइन और नालियां बननी बाकी है तो ऐसे में सड़क के लिए छोड़ी गई पूरी चौड़ाई में ग्रेवल नहीं बिछाई जानी थी। बल्कि दोनो साइड गैप छोड़ा जाना था मगर यदि गैप छोड़ा जाता तो शायद माप कम बनता जिस कर हिस्सा कम हो जाता इसलिए अधिक से अधिक फ्री की मिट्टी डालकर ज्यादा से ज्यादा नाप दिखाया गया।

इस छोटी सी कॉलोनी में ग्रेवल सड़कें बनाने के लिए कुल 25 करोड़ 32 लाख रुपए का भुगतान किया गया। वहीं पीडब्ल्यूडी के नॉर्म्स के अनुसार यह सड़कें इसके आधे से भी कम में बनाई जा सकती थी। इस हिसाब से आप सहज अंदाज लगा सकते हो कि कितने लगे होंगे और कितने बंटे होंगे?

इन सड़को को बनाने वाले ठेकेदारों ने यूआईटी की जमीन से मिट्टी चोरी की जिस बाबत यूआईटी ने पत्र भी लिखा हैं और कॉलोनी के पास बने बड़े बड़े गड्ढे भी चीख चीख कर बोल रहे हैं, मगर इसके बावजूद भी नगरपरिषद ने भुगतान कर कर दिया। यूआईटी भी कोई कार्यवाही नहीं कर रही, हो सकता हैं उनका पत्र देना केवल फॉर्मलिटी हो जबकि अंदरखाने उनकी भी मिलीभगत हो। मगर कुल मिलाकर लाखों रुपए के राजस्व की हानि सरकार को हुई हैं।

जब इस तरह बंदरबांट होगी तो फिर शहर की परेशानियां और समस्याएं कहां से हल होगी?

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor