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Sunday, August 23, 2026, 3:30 am

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पत्रकारिता के आकाश में उदित होता “राइजिंग भास्कर” : चौथी वर्षगांठ पर सजी आत्मीयता, संघर्ष और संकल्प की संध्या

मधुबन स्थित कार्यालय में आयोजित हुआ संक्षिप्त लेकिन भावनाओं से ओतप्रोत गेट-टू-गेदर कार्यक्रम

राइजिंग भास्कर | जोधपुर

पत्रकारिता केवल खबरों का संकलन नहीं होती, बल्कि यह समाज की नब्ज को महसूस करने, सच को शब्द देने और जनभावनाओं को स्वर प्रदान करने का माध्यम होती है। इसी विचार और सामाजिक सरोकार की भावना के साथ शुरू हुआ “राइजिंग भास्कर” आज अपने तीन वर्ष पूर्ण कर चौथे वर्ष में प्रवेश किया है और पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राइजिंग भास्कर डॉट कॉम की चौथी वर्षगांठ के अवसर पर मधुबन स्थित राइजिंग भास्कर कार्यालय में एक संक्षिप्त लेकिन बेहद आत्मीय “गेट-टू-गेदर” कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा और संस्कृति से जुड़े अनेक लोगों ने सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम का वातावरण आत्मीयता, संघर्ष, प्रेरणा और भविष्य के संकल्पों से सराबोर दिखाई दिया। यह आयोजन केवल वर्षगांठ समारोह नहीं था, बल्कि उस यात्रा का उत्सव था जो अथक परिश्रम, संघर्ष, समर्पण और सामाजिक चेतना से निर्मित हुई है।

संघर्ष से सफलता तक की कहानी : दिलीप कुमार पुरोहित ने साझा किए शुरुआती दिन

कार्यक्रम में राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने अपने संबोधन में राइजिंग भास्कर की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की यात्रा को भावुक शब्दों में साझा किया। उन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों, सहयोगियों और शुभचिंतकों को चौथी वर्षगांठ की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राइजिंग भास्कर केवल एक समाचार मंच नहीं, बल्कि एक विचार, एक मिशन और एक सामाजिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा—

“हमारा विजन आने वाले वर्षों में पत्रकारिता के आकाश पर उदित होते भास्कर की तरह स्थापित होना है और कलम के माध्यम से क्रांति का शंखनाद करना है।”

उनके शब्दों में केवल महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि एक स्पष्ट सामाजिक दृष्टि और पत्रकारिता के प्रति समर्पण झलक रहा था।

दिलीप कुमार पुरोहित ने अपने संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए बताया कि जब राइजिंग भास्कर की शुरुआत हुई थी, उस समय वे दैनिक भास्कर में कार्यरत थे। दिनभर की व्यस्त दिनचर्या और जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने सपने को जीवित रखा।

उन्होंने कहा—

“मैं शाम करीब 5 बजे दैनिक भास्कर कार्यालय जाता था और रात लगभग 2 बजे घर लौटता था। इसके बाद रात 2 बजे से सुबह 8 बजे तक राइजिंग भास्कर की खबरों को एडिट करता था। वह दौर बेहद कठिन था, लेकिन मेरे भीतर कुछ नया और सार्थक करने का जुनून था।”

उनके इन शब्दों ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया। यह संघर्ष उस समर्पण का प्रतीक था जिसने राइजिंग भास्कर को आज इस मुकाम तक पहुंचाया।

“सुरेश जी राठी का योगदान मेरे लिए अनमोल” : भावुक हुए दिलीप पुरोहित

अपने संबोधन के दौरान दिलीप कुमार पुरोहित विशेष रूप से भावुक नजर आए जब उन्होंने वरिष्ठ समाजसेवी सुरेश जी राठी के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जीवन के कठिनतम दौर में सुरेश जी राठी ने उन्हें केवल सहयोग ही नहीं दिया, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संबल भी प्रदान किया।

उन्होंने कहा—

“उन्होंने मेरे सिर पर और मेरी पीठ पर ऐसे समय हाथ रखा, जब मुझे किसी सहारे की सबसे अधिक जरूरत थी। वे मेरे लिए बड़े भाई साहब और राइजिंग भास्कर के संरक्षक की भूमिका में हैं। उनके बिना राइजिंग भास्कर की आगे की यात्रा अधूरी है।”

यह वक्तव्य केवल आभार नहीं था, बल्कि उन रिश्तों की गरिमा का परिचायक था जो संघर्ष के समय मजबूत आधार बनते हैं।

कविता के माध्यम से राखी पुरोहित ने सराहा जुनून और समर्पण

कार्यक्रम का आरंभ बेहद भावनात्मक और साहित्यिक अंदाज में हुआ। राइजिंग भास्कर की एडिटर इन चीफ राखी पुरोहित ने कविता पाठ के माध्यम से संस्थापक दिलीप कुमार पुरोहित के संघर्ष, समर्पण और जुनून को शब्द दिए।
उनकी कविता में पत्रकारिता के प्रति निष्ठा, सपनों के लिए संघर्ष और समाज के लिए कुछ सार्थक करने की प्रेरणा स्पष्ट रूप से झलक रही थी। कविता पाठ के दौरान उपस्थित लोगों ने भावुक होकर तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।

उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम को साहित्यिक गरिमा प्रदान की और यह साबित किया कि राइजिंग भास्कर केवल समाचार मंच नहीं, बल्कि संवेदनाओं और विचारों का भी परिवार है।

गीत-संगीत से सजी आत्मीय शाम

कार्यक्रम में संगीत ने भी अपनी विशेष छाप छोड़ी। हर्षद सिंह भाटी ने अपने मधुर गीतों से पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। उन्होंने कई लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसी क्रम में राइजिंग भास्कर के रिपोर्टर पंकज जांगिड़ ने बेहद भावनात्मक अंदाज में प्रसिद्ध गीत—

“तेरे जैसा यार कहां, कहां ऐसा याराना, याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना…”

प्रस्तुत किया। इस गीत ने कार्यक्रम में आत्मीयता और मित्रता के भावों को और गहरा कर दिया। उपस्थित लोगों ने गीत का भरपूर आनंद लिया और तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

“सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता ही राइजिंग भास्कर की पहचान” : इंसाफ खान

राइजिंग भास्कर के एडिटर इंसाफ खान ने अपने संबोधन में कहा कि राइजिंग भास्कर की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता है।

उन्होंने कहा—“राइजिंग भास्कर केवल खबरें प्रकाशित नहीं करता, बल्कि समाज की समस्याओं, संवेदनाओं और सकारात्मक प्रयासों को मंच प्रदान करता है। यही बात उसे समाज से जोड़ती है और यही उसकी वास्तविक पहचान है।”

उन्होंने दिलीप कुमार पुरोहित और पूरी टीम के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि आने वाले समय में राइजिंग भास्कर पत्रकारिता के क्षेत्र में और अधिक ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

शुभकामनाओं का सिलसिला : सभी ने की उज्ज्वल भविष्य की कामना

कार्यक्रम में उपस्थित अनीता जांगिड़ ने राइजिंग भास्कर के संस्थापक दिलीप कुमार पुरोहित को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका संघर्ष और कार्यशैली प्रेरणादायी है।

वहीं स्नेहलता सुथार ने राइजिंग भास्कर की निरंतर प्रगति और विकास की कामना करते हुए कहा कि आज के दौर में सकारात्मक पत्रकारिता की अत्यधिक आवश्यकता है और राइजिंग भास्कर इस दिशा में सार्थक कार्य कर रहा है।

राजेश भैरवानी ने जताया आभार

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री जागृति संस्थान के अध्यक्ष राजेश भैरवानी ने अपने संबोधन में राइजिंग भास्कर की टीम को चौथी वर्षगांठ की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि समाज और पत्रकारिता का रिश्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब पत्रकारिता सामाजिक चेतना और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ती है, तब वह समाज में बदलाव की मजबूत ताकत बन जाती है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी अतिथियों, सहयोगियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

रिफ्रेशमेंट के साथ हुआ आत्मीय समापन

कार्यक्रम का समापन रिफ्रेशमेंट और आपसी संवाद के साथ हुआ। आयोजन भले ही संक्षिप्त था, लेकिन उसमें आत्मीयता, संघर्ष की प्रेरणा, मित्रता, साहित्य, संगीत और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला।राइजिंग भास्कर की चौथी वर्षगांठ केवल एक संस्थान का उत्सव नहीं थी, बल्कि उस विश्वास का उत्सव थी कि यदि इरादे मजबूत हों, दृष्टि स्पष्ट हो और उद्देश्य समाजहित का हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है। आज राइजिंग भास्कर जिस ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है, वह आने वाले समय में निश्चित रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अलग और सशक्त पहचान स्थापित करेगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor